नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजधानी में एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जा रही है और कई मतदाताओं को अपने दस्तावेज और विवरण सत्यापित कराने की जरूरत पड़ रही है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली के करीब 30 प्रतिशत मतदाता ऐसे रिकॉर्ड में शामिल हैं जिनकी जानकारी को लेकर सत्यापन या दस्तावेजी जांच की जरूरत सामने आई है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि इन सभी लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। अंतिम फैसला सत्यापन और दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
दिल्ली में SIR के तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की जांच कर रहे हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या गलत तरीके से दर्ज नामों को हटाना और पात्र मतदाताओं की जानकारी को सही करना है।
लेकिन राजधानी की बड़ी और लगातार बदलती आबादी के कारण यह प्रक्रिया आसान नहीं है। दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जो नौकरी, पढ़ाई या कारोबार के कारण अलग-अलग राज्यों से यहां आए हैं। कई लोगों के पुराने पते और मौजूदा निवास के बीच अंतर होने से सत्यापन की प्रक्रिया जटिल हो रही है।
यही वजह है कि इस पूरी कवायद को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि फर्जी या गलत नाम हटाने की कोशिश में कहीं वास्तविक मतदाता अनजाने में सूची से बाहर न हो जाएं।
चुनाव आयोग की तरफ से मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने तथा किसी भी गलती की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराने की सलाह दी जा रही है।
दिल्ली में यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड नहीं है। किसी नागरिक का नाम सूची में मौजूद होना उसके चुनाव में मतदान करने के अधिकार से सीधे जुड़ा है।
फिलहाल SIR की प्रक्रिया जारी है और दिल्ली की संशोधित मतदाता सूची आने वाले चरणों में सामने आएगी। तब यह स्पष्ट होगा कि सत्यापन के बाद कितने नाम बरकरार रहते हैं और कितने रिकॉर्ड में बदलाव किया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया की असली परीक्षा यही होगी कि मतदाता सूची साफ भी हो और कोई वास्तविक मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित भी न हो।
— सर्वोदय शांतिदूत दिल्ली डेस्क