सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो
नई दिल्ली | भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाते हुए 405 महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं को स्वदेशीकरण की नई सूची में शामिल किया है। इस फैसले के तहत निर्धारित अवधि के बाद इन वस्तुओं की खरीद घरेलू भारतीय उद्योग से किए जाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
नई सूची में तेजस लड़ाकू विमान, एएलएच हेलीकॉप्टर, टैंक और युद्धपोतों से संबंधित विभिन्न उपकरण, पुर्जे और प्रणालियां शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य महत्वपूर्ण रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करना और देश में उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पहल से भारतीय उद्योग के लिए करीब 3,070 करोड़ रुपये का संभावित कारोबारी अवसर बन सकता है। इससे रक्षा क्षेत्र में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योगों को भी नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
स्वदेशीकरण से केवल रक्षा उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि डिजाइन, इंजीनियरिंग, अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं के विकास को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे भारत के रक्षा विनिर्माण तंत्र को अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलने की संभावना है।
405 वस्तुओं को नई सूची में शामिल करना सरकार की व्यापक रक्षा आत्मनिर्भरता नीति का हिस्सा है। इसका लक्ष्य भारत की सैन्य जरूरतों के लिए घरेलू उद्योग की भूमिका बढ़ाना और देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाना है।