खुल्लम - खुला : कहानी, फिल्म और ड्रामा Story, Film and Drama


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                                                           खुल्लम - खुला


                                                                    संजय त्रिपाठी 


हमारे देश में आज कल रोमांचक, स्स्पेंस, थ्रीलर, सनसनीखेज घटनाएं देखने को मिल रही। इन घटनाओं में कभी - कभी तो रस के सभी अंग साफ - साफ दिखने लगते हैं। इसे देखकर ऐसा लगता है कि साहित्य के सभी भाग - अनुभाग इन घटनाओं में निहित है। कभी आंखों के सामने ऐसा चित्रण आता हे कि लगता है कहानी के सभी तत्व इसमें मौजुद है, तो कभी आंखों के सामने परदे पर चलता फिल्म दिखने लगता है । अभी हम लोग इसी में खोये रहते हैं तभी परदा उठता है और अगला दृश्य ड्रामा का होता जो पूरे तन - मन को रोमांचित कर देता, दिल में गुदगुदी पैदा करता और आगे बढ़ते हुए वीर रस में भुजाओं को फड़काने लगता। कुछ दृश्य तो ऐसे - ऐसे सामने आते हें जिसे देखकर लगता है कि नई सदी का नायक अमिताभ बच्चन नहीं हो सकते सामने दिख रहा यह कैरेक्टर ही होना चाहिए। मजेदार सिक्वेंस, लाजवाब एक्शन से भरपूर ऐसी कहानी, फिल्म और ड्रामा तीनों का सार देखकर देश की जनता अचंभित और रोमांस से भर उठती है। 

अब तो कहानी लेखक, फिल्म निर्माता व संवाद लेखक तथा नाटककारों को अपनी पटकथा लेखन के लिए पहाड़ों की खाक छानने की जरूरत नहीं पडेगी। उनके लिए कहानी के तत्वों में घटनाप्रधान, भावप्रधान तथा वातावरणप्रधान सभी रूपों में सामने दिखता है। वहीं कहानी और नाट्क का चलचित्र रूपण प्रस्तुति फिल्म में दोनों का गुण विद्यमान होते हैं। जो भी आज कल चैनलों के माध्यम से देख रहे हैं उसमें कहानी और नाटक दोनों के तत्व शामिल होते, साथ ही थ्रील, स्स्पेंस, मनोरंजन समिश्रण तो साफ दिखने लगता है। नाटक केे तत्वों में मुख्यरूप से कथावस्तु, पात्र एवं चरित्र चित्रण, संवाद, देशकाल वातावरण और भाषा शैली स्पष्ट सामने झलकता दिखता है। 

वास्तविक में नाटक को ही अंग्रेजी का प्र्याय ड्रामा व प्ले को माना जाता है। इसकी व्युत्पत्ति नट् धातु से हुई है जिका अर्थ सम्बन्धित सात्त्विक भावों का प्रदर्शन है। नट यानी अभिनय करने वाला से अभिनीत होने के कारण ही इसे नाटक कहा जाता है। देश में हर काल व वातावरण में नाटक का मंच सजा दिख रहा जिसमें सभी रस का ऐसा अभिनव भाव है जो एक तरफ लोगों को हास्य का आनंद दे रहा तो दूसरी तरफ करूणा, निस्तब्धता और संशय पैदा कर रहा। कहानी के पाठक, फिल्म व ड्रामा के दर्शक सभी इसे देखकर रोमांच से भर उठते हैं। कही थू - थू होती है तो कही छी - छी गंुजने लगता है। सोशल मीडिया तो थू - थू - छिं - छिं से लबालब हो जाता है। कभी आंखों में पानी भर जाता है तो कभी इनका प्लाॅट देख गुस्से से शरीर कांपने लगता है। इसी बीच बुल्ली बाई ऐप और सिल्ली डील सामने घूमने लगता है। हालांकि कुछ दृश्य व घटनाएं ऐसी होती है जिसे दिखाया तो जाता है पर दिल पर पत्थर रखना पड़ता है। कभी - कभी तो ऐसे दृश्य हटाये भी जाते हैं पर निर्माता, लेखक देश और आम जन की पीड़ा को समझ कहा पाता है। 

देश की कुछ वर्षो की ऐसी घटनाओं को चैनलों से लेकर इन्हें वीडियोग्राफी के माध्यम से एक फिल्म बनाया जाए तो फिल्म इतिहास का सबसे रोमांस, सस्पेंस, मनोरेजन से भरपूर फिल्म होगा जिसकी कमाई अब तक के सभी रिकार्ड तोड़ देगी । मेरे बात पर यकिन न हो तो प्रकाश झा आजमा कर देख सकते हैं। इसकी शुटिंग के लिए जगह की खोजबीन करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी सिर्फ चैनलवालों से खासतौर से रिप्बलिक टीवी, जी टीवी के पास सभी कड़ी मोजुद होगा जिसमें से  केदारनाथ, बद्रीनाथ, प्रयागराज, काशी विश्वनाथ, नोएडा, दिल्ली और पंजाब के कुछ लोकेशन की क्लिपिंग ही मांगनी पड़ेगी। तो चलो भरपूर मनोरंजन का आनंद ले इस चुनावी बेला में । जितना समझा उतना लिखा।  
 
राम - राम जी !




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