खुल्लम - खुला : लोकतंत्र का सच Khullam-Khula: Truth of Democracy



                                                           संजय त्रिपाठी 



‘ सबहिं नचावत राम गोसाईं ’ तुलसी दास ने रामचरित मानस में इस पंक्ति का उल्लेख कर मार्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम की पुरूषार्थ का उल्लेख किया है। आज ठीक वैसा ही मोदी के पुरूषार्थ का उल्लेख भक्त मीडिया द्वारा किया जा रहा है। जरा ध्यान दें प्रधानमंत्री के काशी दौरे का जो विश्वनाथ मंदिर के कारिडोर उद्घाटन के लिए किया गया था । पूरा दौरा टीवी के माध्यम से आम जनता को दर्शाया गया। हम भी उस दिन बहुत समय तक टीवी पर चिपके रहे और गंगा जी के बीच रूद्राक्ष का जाप करते, चश्मा पहनकर डुबकी लगाते, गंगा जल से सूर्य भगवान को अध्र्य देते बड़े ध्यान से देखते रहे। कभी दूरदर्शन अकेला टीवी पर कार्यक्रम और समाचार दिखाता था, लेकिन इस तरह तारतमय होकर कभी नहीं दिखाया। उस समय लोकसभा में किसी का ज्यादा दिखाने पर संसद में सवाल उठ जाते थे। प्राइवेट चैनल का सबसे बड़ा फायदा यही है कि आप पर पैसा हो और आपके पास वह ताकत हो जिससे इन चैनल वालों पर कोई आंच न आता हो तो वह आपके जन्मदिन और शादी के कार्यक्रम भी उसी तनमयता के साथ दिखायेंगे। यह है प्राइवेटकरण कि आजादी। सबसे रोचक पहलू तो वह रहा जब प्रधानमंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री योगी बनारस के रेलवे स्टेशन पर रात के डेढ़ बजे टहलते हुए दिखे । भक्त मंडली बल्लियों उडलने लगी कि कमाल के हैं हमारे नेता जो दिन भर काम करने के बाद भी रात में भी देश का काम कर रहे हैं। 

काशी यात्रा यूपी के मध्यम वर्ग जो जीवन यापन व बच्चों के भविष्य से ज्यादा धर्म - कर्म के उन्मादी होता उसे भाजपा के पक्ष में लामबंद करने की यात्रा बनाई गई, क्योंकि विधानसभा चुनाव का शंखनाद जो करना था । बस आज कल ऐसी यात्राएं कर पिछले वर्ष की उन यादों पर पर्दा डालने का काम किया जा रहा है जिसका असर लोगों के दिमाग में चुनाव तक बना न रहे। याद करें गंगा में तैरती लाशें, प्रयागराज में गंगा किनारे सात किमी तक दफनाये गए हिन्दुओं के शव, दिन - रात श्मशानों में जलती चिताएं, अस्पतालों में न बिस्तर, न दवाईयां और न आक्सिजन थी, हाथरस और लखीमपुर खिरी की दर्दनाक घटनाएं जो योगी सरकार की साफ तस्वीर पेश कर रही । सच कहा है कि धार्मिक अफीम सबसे ज्यादा नशीला होता है जिसका असर बहुत बाद तक होता है। इसका शिकार सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग होता है क्योंकि मध्यम वर्ग को रोटी - कपड़ा - मकान से ज्यादा चिन्ता धर्म - मजहब की होती है। पिछले आम चुनाव में भाजपा ने यह आकलन कर लिया कि उन्हें मुसलिम मतदाताओं के वोट न भी मिले तब भी वह पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बना सकती है। क्योंकि देश के आधे से ज्यादा मतदाता मध्यम वर्ग में शामिल हो गया है और उसमें धार्मिक उन्माद सबसे ज्यादा भरा हुआ है। 

एसआईटी ने लखीमपुर खिरी कांड की जांच करने के बाद कहा है कि यहां की हत्याएं गैर - इरादत नहीं थी।  यानी इरादा के तहत यहां हत्याएं की गई थी। फिर भी सरकार अभी तक मुख्य हत्या आरोपी के पिता को केंद्र सरकार में मंत्री बनाये हुए है। विपक्ष संसद में हो - हल्ला मचा रहा पर कोई सुनने वाला नहीं । यह है हमारा लोकतंत्र और उसके लोतांत्रिक मूल्य । लालबहादुर शास्त्री भी लोकतंत्र की सजगता दिखा चुके हैं और आज भी लोग देख रहे हैं। एक पिता को इतना क्रोधित होते हुए आप भी नहीं देखे होंगे जो एक रिपोर्टर के सवाल पूछने पर देखा गया। पिता मंत्री जी को मंत्री पद से हटाने के लिए हो - हल्ला मचा है और वे रिपोर्टर का कालर पकड़ कर कहते हैं - बेवकूफी के सवाल करते हो ............ दिमाग खराब है क्या ? ................ फोन बंद कर दे ............ । लोकतंत्र का एक तस्वीर और सामने आया जब कर्नाटक विधानसभा में रेप को लेकर एक विधायक द्वारा कहा गया - रेप होना हो तो लेट जाओ, और उसे एन्जाय करो। इस पर सभी नेताओं का ठहाका लगाकर हंसना कैसा तस्वीर बना होगा ? यह हैं हमारे लोकतंत्र भारत की सच्ची तस्वीर । धन्य हैं हम और हमारी दूरदर्शिता । राम - राम जी ! 


Share on Google Plus

0 comments:

Post a Comment