यूपीसीडा ने सरल की समायोजन प्रक्रिया, अब आवंटियों को नहीं देनी होगी डबल स्टाम्प डयूटी-आरएम यूपीसीडा UPCEDA simplifies the adjustment process




  • औद्योगिक भूमि पर वेयर हाउसिंग और लाजिस्टिक इकाईयां उद्योग के रूप में मान्य-सतीष कुमार

                                                     सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 




गाजियाबाद। आरएम यूपीसीडा सतीष कुमार ने बताया कि यूपीसीडा बोर्ड ईज आॅफ डूईग बिजनेस को बढावा देने के लिए लिये गये निणयों के बारे मे बताया। उन्होने बताया कि बड़ी इकाईंयों को स्थापित करने हेतु सुविधा प्रदान करने के लिए समायोजन की प्रक्रिया को सरल किया गया है तथा समायोजन से पहले लीज डीड के निष्पादन की आवश्यकता को हटा दिया गया है, जिससे आवंटियांे को डबल स्टेम्प डयूटी नही देनी पडेगी। 
उन्होने बताया कि प्राधिकरण में संयुक्त रूप से आवंटित भूखण्डों को अब विधिवत रूप से समायोजित मान लिया जायेगा। इस प्रकार नक्षे और उपयोग के निर्माण की प्रक्रिया को सरल बनाकर पुराने आवंटियों को नये दरों के आधार पर देय समायोजन शुल्क से बचाया जा सकेगा, जिससे उनको बडी राहत मिलेगी। उन्होने बताया कि 100 करोड रू0 से अधिक के प्रोजेक्ट लगाने के लिए दो या उससे अधिक भूखण्डों को आपस में जोडने के लिए लोगों से मांगी जाने वाली आपत्ति का समय 30 दिन के हटा कर 15 दिन कर दिया गया है। 
उन्होने बताया कि समायोजन मामलों के त्वरित निस्तारण की आवश्यकता को देखते हुए इस प्रत्यक्ष में अनुमोदन शक्ति बोर्ड द्वारा सी.ई.ओ. को प्रत्यायोजित कर दी गयी है। उन्होने बताया कि वर्तमान समय में ई-काॅमर्स में गौदामों और लोजिस्टिक पार्को की आवश्यकता देखते हुए प्राधिकरण ने सरकार के औद्योगिक भूमि पर वेयरहाउसिंग और लोजिस्टिंक इकाईंयों और पार्क अनुमन्य गतिविधियों को उद्योग के रूप में माने जाने के फेसले को आत्मसात किया है। उन्होने बताया कि मा0 मुख्यमंत्री जी के भू-जल संरक्षण के आवाहन को उचित महत्व देते हुए प्राधिकरण अब यह सुनिश्चित करेंगा कि आवंटियों ने भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने से पहले अपने भवन की योजनाओं में वर्षा जलसंचयन के लिए उचित प्रावधान किये है। 

उन्होने बताया कि प्राधिकरण के विभिन्न अनुभागों की कार्य प्रणालियों को सुगम बनाने के उददेश्य से प्रक्रिया में जरूरी बदलाव के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने निर्देशित किया है। इस सम्बन्ध में मुख्य कार्यपालक अधिकारी के निर्देशानुसार एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिससे आवंटियों को उत्पादन शुरू होने की तारीख की पुष्टि, लीज डीड के निष्पादन जैसी सुविधाओं के लिए कार्यालय में आने की आवश्यकता न पडे। उन्होने बताया कि प्राधिकरण 01 नवम्बर से असफल आवेदनों के स्वतः रिफण्ड की प्रक्रिया शुरू करेगा, साथ ही प्राधिकरण जल्द ही वाणिज्यिक और समूह आवास भूखण्डों के विपणन का ई-आॅक्शन के माध्यम से शुभारम्भ करेगा। 

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