बीज जनित एवं भूमि जनित रोग फसलों को कभी कभी बहुत अधिक हानि पहुचाते है - आर एस वर्मा Seed-borne and land-borne diseases sometimes cause great harm to crops - RS Verma



                                                सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 




गाजियाबाद। रबी  2020-21 में बीज शोधन / भूमि शोधन कियान्वन के लिए रबी की प्रमुख फसलों गेहूँ, जौ, सरसो, आलू,चना, मटर, मसूर आदि फसलो में बीज शोधन एवं भूमि शोधन करना अनिवार्य है क्योकि में बीज जनित एवं भूमि जनित रोग फसलों को कभी कभी बहुत अधिक हानि पहुचाते है। उक्त  जानकारी  डॉ आर एस वर्मा जिला कृषि रक्षा अधिकारी गाजियाबाद ने दी । 

श्री वर्मा ने कहा कि बीज शोधन भूमि शोधन कार्य हेतु कृषको को प्रोत्साहित किया जाये। बीज जनित एवं भूमि जनित रोगो से आगामी बोई जाने वाली फसल के बचाव हेतु गेंहू की फसल में करनाल बन्ट अनावृत्त कण्डवा जौ में आवृत्त कण्डवा पत्ती का धारीदार रोग एवं चना, मटर, मसूर का उकठा रोग सरसों का झुलसा सफेद गेरूई तुलासिता रोग आदि फफूदी जनित रोगों में बीज शोधन का अत्यधिक महत्व है। बीज शोधन से फसलो की रक्षा कर अधिक पैदावार ली जा सकती है। इस प्रकार प्रमुख भूमि जनित कीटो जैसे दीमक, सफेद गिंडार, सुत्रकृमि, भूमि जनित कारक मिटटी में पाये जाते है। जिनका भूमि शोधन द्वारा रोकथाम किया जा सकता है जिनका उपचार  विभिन्न प्रकार से किया जा सकता है जिसमे  बीज शोधनः- रबी की फसलो में फंफुदी द्वारा लगने वाले रोगो में बीज शोधन के लिए थीरम 75 प्रतिशत डब्लू०एस० की 2.5 ग्राम मात्रा को या कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू0पी0 की 2 ग्रा० मात्रा को प्रति कि0ग्रा0 बीज को उपचारित करना चाहिये या 4 ग्रा0 ट्राइकोडर्मा प्रति कि0ग्रा0 बीज के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

भूमि शोधनः- रबी की फसलो भूमि जनित कीटो जैसे दीमक, सफेद गिंडार, सुत्रकृमि, की रोकथाम के लिए क्लोरोपाइरोफास 20 प्रतिशत की 2.5 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि शोधन करना चाहिये या काब्रोफयूरान 3 प्रतिशत सी0जी0 की 25-30 कि0ग्रा0 मात्रा प्रयोग करना चाहिये या ब्यूवेरिया बेसियाना 1 प्रतिशत बायोपेस्टिसाइड का 2.5 से 5 किग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से भूमि शोधन किया जाये एवं भूमि जनित रोगो की रोकथाम के लिए ट्राइको डर्मा से 2.5 कि0ग्रा0 प्रति हे0 की दर से भूमि शोधन करने की सलाह कृषको को दी जाती है। 

उन्होंने कहा है कि  कृषकों को इसी प्रकार जानकारी निरंतर प्रदान करते रहेंगे और कृषकों को प्रशिक्षण,साहित्य, पम्पलैट आदि के माध्यम से प्रचार प्रसार के द्वारा किसानों को में बीज शोधन एवं भूमि शोधन के महत्व के विषय में बताया जायेगा।


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