हाथरस की बर्बर सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत की घटना के विरोध में प्रदर्शन Protest against Hathras incident of brutal gang rape victim's death




  • केवाईएस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर मौरिस नगर थाने में ले जाया गया

  • केवाईएस ने ब्राह्मणवादी और जातिवादी यूपी मुख्यमंत्री की इस्तीफे की मांग की

  • पीड़ित और उसके परिवार के उत्पीड़न के जिम्मेदार सभी पुलिस अफसरों को बर्खास्त किए जाने और उनपर सख्त कार्रवाई किए जाने की भी करता है मांग

                                                                        विशेष संवाददाता




नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) कार्यकर्ताओं ने आज हाथरस में हुए बर्बर गैंगरेप के बाद पीड़ित की मौत की घटना पर यूपी प्रशासन और पुलिस के खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय में भारी विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्र- छात्राओं को जबरन हिरासत में लेकर मौरिस नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। बताना चाहेंगे कि पुलिस ने गैर कानूनी तरीके से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को रोकने हेतु धारा 144 लगाया, जबकि 30 सितंबर तक पुरानी गाइडलाइन की अवधि समाप्त हो चुकी है। प्रेस विज्ञप्ति जारी किए जाने तक पुलिस ने गैर कानूनी ढंग से महिला छात्राओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस स्टेशन में 6 बजे के बाद भी रोक कर रखा हुआ है।



ज्ञात हो कि एक 20 वर्षीय दलित महिला 29 सितंबर 2020 ने दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया। दो हफ्ते पहले वह उत्तर प्रदेश स्थित हाथरस में चार उच्च जातीय आदमियों द्वारा सामूहिक बलात्कार का शिकार बनी। उसके शरीर की कई हड्डियां टूट गई थी, शरीर में पक्षाघात और जीभ में काटे जाने की गहरी चोट पाई गई। उसके परिवार के अनुसार यूपी पुलिस ने पीड़िता पर अपनी चोट के बारे में झूठ बोलने का आरोप लगाया था और शुरुआत में केवल हत्या के प्रयास का केस बनाया और एक हफ्ते तक बलात्कार की धाराएं नहीं जोड़ी गई। 

उसके शव को यूपी पुलिस द्वारा परिवार को सूचित किए बगैर हाथरस ले जाया गया। शव को ले जा रही एम्बुलेंस आधी रात के करीब हाथरस में पहुंची। परिवार की याचनाओं के बावजूद शव का दाह संस्कार करने की अनुमति पुलिस ने नहीं दी, और रात में ही परिवार की अनुपस्थिति में पुलिस द्वारा पीड़ित के शव का दाह संस्कार कर दिया गया। परिवार की याचना करते और महिलाओं के एम्बुलेंस रोकने की कोशिश करने की कई तस्वीरें मीडिया ने दिखाई। एक हिंसात्मक बलात्कार की घटना होना और पुलिस प्रशासन द्वारा क्रूरता से परिवार से कहना कि ‘ वक्त के साथ रीति रिवाज भी बदलते हैं, ’ अत्यंत शर्मनाक है।  



इस घटना से एक बार फिर योगी आदित्यनाथ के राज में यूपी प्रशासन और पुलिस की अन्यायपूर्ण व्यवस्था का चेहरा सामने आया है। ऊंचे दावों के बावजूद उत्तर प्रदेश में महिला और पिछड़े समाज की असुरक्षा चरम पर है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध दर 2018-2019 के बीच 7.3 प्रतिशत बढ़ा है और अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध दर भी 7.3 प्रतिशत बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में इन दोनों श्रेणियों में सब अधिक अपराध दर है। इस अकेले राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध देश भर के दर का 14.9 प्रतिशत है। पोकसो के तहत होने वाले बच्चियों के खिलाफ अपराध में भी यह राज्य सबसे आगे है। यूपी में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध देश भर का 25.8 प्रतिशत है। 

क्रांतिकारी युवा संगठन यूपी पुलिस और सरकार की न्याय विरोधी गतिविधियों की कड़ी भर्त्सना करता है, जिनके कारण पीड़ित कोमौत के बाद भी न्याय नसीब नहीं हुआ। केवाईएस मांग करता है कि योगी आदित्यनाथ तुरंत मुख्यमंत्री के पद से तुरंत इस्तीफा दें। इस मामले में दोषी सब पुलिस अफसरों को बर्खास्त किया जाए और उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, देश में महिला सुरक्षा सुनश्चित करने के लिए पर्याप्त और सख्त प्रावधान लागू किए जाएं।

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