सरकारी संपत्ति को गिरोह बनाकर बेचने तथा स्टांप चोरी के मामले में 5 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज Report filed against 5 people for selling gang property and stamp theft



                                                           सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 




साहिबाबाद । थाना साहिबाबाद में गाजियाबाद के उप निबंधक द्वितीय ने सरकारी जमीन को 100-100 रूपये के स्टाम्प पेपर पर दस्तावेज लिखकर तथा उसे नोटरी के माध्यम से विभिन्न लोगों को  बेचने और 20 लाख की स्टांप चोरी के मामले में पांच लोगों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोप है कि कुछ लोगों ने गिरोह बनाकर न केवल राजस्व की चोरी की है बल्कि  सरकारी संपत्ति पर भी कब्जा किया हुआ है।
         
उपनिबंधक गाजियाबाद द्वितीय  नविन कुमार एस द्वारा लिखाई गई रिपोर्ट में बताया है कि सामाजिक कार्यकर्ता राजीव कुमार शर्मा की शिकायत पर जांच  की गई तो पाया गया कि अप्सरा बॉर्डर पर सीमा पुलिस चैकी के ठीक पीछे की सरकारी संपत्ति जो जीडीए की भूमि है को कुछ लोगों ने गिरोह बनाकर न केवल कब्जा किया हुआ है बल्कि उसकी कई बार की गई खरीद-फरोख्त में करीब 20लाख रुपए की स्टांप चोरी की गई है। इस मामले में शहीद नगर के शकील पुत्र बाबू, लक्ष्मी विहार दिल्ली के राजपाल बंसल पुत्र मदनलाल बंसल, शहीद नगर के ही मोहम्मद असलम पुत्र इस्लामुद्दीन, शालीमार गार्डन के मोहम्मद शाहिद पुत्र हाजी भोलू, शहीद नगर निवासी फरियाद हुसैन पुत्र बाबू खान तथा पूर्वी दिल्ली निवासी अमर सिंह पुत्र स्वर्गीय प्रेमचंद को आरोपित करते हुए रजिस्ट्रार द्वितीय ने पांचों लोगों के खिलाफ भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 , 120 बी तथा 420 आईपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। 
       
उपनिबंधक का आरोप है कि इन पांचों लोगों ने गिरोह बनाकर सरकारी जमीन को न केवल कई बार 100-100रुपये के स्टांप पेपर पर नोटरी करा कर इस जमीन को बेचकर करीब 20लाख रुपए राजस्व की चोरी की है बल्कि जीडीए की संपत्ति पर कब्जा किया हुआ है। जवकि इस जमीन को जीडीए कई लोगों को आवंटित कर चुका है लेकिन इसके बावजूद  भू माफियाओं के इस गिरोह ने करोडों रूपयों की सरकारी भूमि कब्जा ली गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि इस संबंध में उन्हें मानवाधिकार कार्यकर्ता राजीव कुमार शर्मा की शिकायत मिली थी और उस पर जांच की गई तो सारा मामला सच पाया गया। 
         
यहां यह भी गौरतलब है कि राजीव कुमार शर्मा द्वारा इस तरह के अनेक मामले उत्तर प्रदेश सरकार के निबंधक विभाग को पहले भी बताए जा चुके हैं और करोड़ों रुपए की स्टांप चोरी उजागर हो चुकी है ।

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