अंबेडकर विश्वविद्यालय द्वारा एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी के छात्रों के फीस माफी के प्रवधान खत्म करने का विरोध fee waiver for SC / ST / PWD students


  • प्रशासन से त्वरित इस फैसलों को वापस लेने की माँग की

                                                    विशेष संवाददाता 




नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने अन्य प्रगतिशील संगठनों के साथ मिलकर अम्बेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) में एससी/ एसटी/पीडब्ल्यूडी छात्रों के लिए लागू किए गए फीस माफी के प्रावधानों को खत्म करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। एयूडी में दाखिला लेने वाले एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी छात्रों के लिए 100 प्रतिशत फीस माफी का प्रावधान है। प्रस्तावित किया गया है कि नीतिगत बदलावों के तहत इस प्रावधान को खत्म कर दिया जाएगा, जिसके पश्चात यूनिवर्सिटी में फीस माफी केवल आर्थिक आधार पर दिए जाने का नियम लागू होगा।



बताना चाहेंगे कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिल्ली सरकार द्वारा पूर्ण वित्त-पोषित कॉलेज से बहुत ज्यादा फीस वसूली जा रही है। इतनी अधिक फीस के कारण कमजोर और पिछड़े समुदायों से आने वाले छात्रों का एक बड़ा हिस्सा दाखिला प्रक्रिया पास  करने के बावजूद भी  प्रवेश नहीं ले पाता है। बताना चाहेंगे कि एयूडी में विभिन्न स्नातक व स्नातकोत्तर विषयों में ली जाने वाली फीस दिल्ली सरकार द्वारा पूर्ण वित्त-पोषित कॉलजों की फीस से 5-6 गुना अधिक है। उदाहरणतः दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ बी. आर. अम्बेडकर कॉलेज में बी. ए. (प्रोग्राम), बी. कॉम. में प्रथम वर्ष की दाखिला फीस 9830 रुपये है, जबकि अम्बेडकर विश्वविद्यालय में स्नातक विषयों की सालाना फीस 53880 रुपये ( 29440 प्रत्येक सिमेस्टर) है, जो की 5 गुना अधिक है।

इसके साथ ही यह भी बताना चाहेंगे कि में दिल्ली सरकार द्वारा पूर्ण वित्त-पोषित कॉलेज में फीस लगभग 40 श्रेणियों में बांटी गई है, जिसमें शैक्षणिक सत्र 2020-21( मई - अप्रैल) 5 रुपये एडमिशन फीस, 180 रुपये ट्यूशन फीस है। जबकि एयूडी में फीस का श्रेणियों में कोई बंटवारा नहीं है और पूरी फीस ट्यूशन फीस के तहत ली जाती है। इस अनुपात पर अगर ध्यान दें तो एयूडी में ट्यूशन फीस के तहत लिया जा रहा 42880 रुपये, डॉ बी. आर. अम्बेडकर कॉलेज में ट्यूशन फीस के तहत लिया जा रहा 180 रुपये, 238 गुना अधिक है।

छात्रों से वसूली जा रही बेहद अधिक फीस और फीस माफी के प्रावधानों में किए जा रहे मौजूदा बदलाव न केवल प्रशासन के ब्राह्मणवादी चरित्र का उदाहरण है बल्कि अभिजातीय मानसिकता को दर्शाता है। साफ तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन बहुसंख्यक पिछड़े और कमजोर वर्ग के छात्रों की समस्याओं और जरूरतों को नजर अंदाज कर रहा है। विश्वविद्यालय में बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के नाम के तले ही समाज के कमजोर समुदायों से आने वाले छात्रों का बहिष्कार जारी है।

केवाईएस संकल्प लेता है कि विश्वविद्यालय में फीस माफी के प्रावधानों में बदलाव का पुरजोर विरोध जारी रखेगा, जब तक इस फैसले की पूर्ण वापसी नहीं हो जाति है।



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