अम्बेडकर विश्वविद्यालय छात्र संघ ने दिल्ली मुख्यमंत्री आवास पर किया प्रदर्शन Ambedkar University Students Union demonstrated at Delhi Chief Minister's residence



  • दिल्ली सरकार से तुरंत छात्रों की आरक्षण नीति में बदलाव वापस लेने और भारी फीस में कटौती करने की मांग

  • केवाईएस ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के छात्रों को दिल्ली सरकार द्वारा चालित उच्च शिक्षण संस्थानों में एड्मिशन में वरीयता देने की मांग उठाई

                                                                   विशेष संवाददाता 




नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने अन्य प्रगतिशील संगठनों के साथ मिलकर दिल्ली मुख्यमंत्री आवास पर अंबेडकर विश्वविद्यालय छात्र संघ द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन पर हिस्सेदारी निभाई। इस प्रदर्शन का आयोजन मुख्यतः अंबेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) में भारी फीस वसूले जाने और आरक्षण नीति में बदलाव किए जाने संबंधी मांगों को लेकर था। साथ ही, केवाईएस ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के छात्रों को दिल्ली सरकार द्वारा चालित उच्च शिक्षण संस्थानों में एड्मिशन में वरीयता देने की मांग भी उठाई।



ज्ञात हो कि एयूडी में छात्रों से भारी फीस वसूली जाती है, जो बताना चाहेंगे कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिल्ली सरकार द्वारा पूर्ण वित्त-पोषित कॉलेज से बहुत ज्यादा फीस वसूली जा रही है। इतनी अधिक फीस के कारण कमजोर और पिछड़े समुदायों से आने वाले छात्रों का एक बड़ा हिस्सा दाखिला प्रक्रिया पास  करने के बावजूद भी  प्रवेश नहीं ले पाता है। बताना चाहेंगे कि एयूडी में विभिन्न स्नातक व स्नातकोत्तर विषयों में ली जाने वाली फीस दिल्ली सरकार द्वारा पूर्ण वित्त-पोषित कॉलजों की फीस से 5-6 गुना अधिक है। उदाहरणतः दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ बी. आर. अम्बेडकर कॉलेज में बी. ए. (प्रोग्राम) बी. कॉम. में प्रथम वर्ष की दाखिला फीस 9830 रुपये है, जबकि अम्बेडकर विश्वविद्यालय में स्नातक विषयों की सालाना फीस 53880 रुपये( 29440 प्रत्येक सिमेस्टर) है, जो की 5 गुना अधिक है।

साथ ही, एयूडी में आरक्षण नीति को लेकर भी बदलाव किए जा रहे हैं। पहले दिल्ली के उन छात्रों को दिल्ली के छात्रों को मिलने वाले 85 प्रतिशत आरक्षण मिलता था, जो दिल्ली से बाहर पढे हैं, लेकिन अब इस नीति में बदलाव किया जा रहा है। साथ ही, एयूडी में अनुसूचित जाति के छात्रों को मिलने वाले आरक्षण पर भी संशय है, क्योंकि दिल्ली में कोई भी अनुसूचित जनजाति नहीं है।

इसके अलावा, केवाईएस ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के छात्रों को उसके द्वारा चालित उच्च शिक्षण संस्थानों में एड्मिशन में वरीयता देने कि मांग उठाई। ज्ञात हो कि एयूडी दिल्ली के शोषित और वंचित छात्रों के लिए बनाई गयी थी, लेकिन यहाँ पर वंचित छात्रों का एड्मिशन विरले ही होता है, क्योंकि यहाँ  पर ऊंची फीस और उचि कट-ऑफ होती है। जरूरत है कि वंचित छात्रों के लिए डेप्रीवेशन पॉइंट्स लागू किए जाएँ। आने वाले दिनों में केवाईएस वंचित छात्रों को डेप्रीवेशन पॉइंट्स दिये जाने को लेकर अपना आंदोलन तीव्र करेगा। 


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