केंद्र सरकार आशा कर्मचारियों के प्रति उदासीन: केवाईएस Central government indifferent to ASHA employees: KYS

  • दिल्ली पुलिस द्वारा उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की करता है निंदा
  • प्राथमिकी को तुरंत वापस लेने, और आशा कर्मचारियों की तुरंत सभी मांगें मानने की मांग उठाई

                                                               विशेष संवाददाता 



नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) केंद्र सरकार की मान्यता-प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) कर्मचारियों के प्रति उदासीन रवैये और दिल्ली पुलिस द्वारा उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कड़ी भर्त्सना करता है।

ज्ञात हो कि महामारी के दौर में आशा कर्मचारियों की सबसे अग्रणी भूमिका रही है। वो घर-घर जाकर लोगों से कोरोनावायरस संबंधी जानकारी और मरीजों का हालचाल पता कर रही हैं, लेकिन सरकारें उनकी चिंताओं को लगातार नजरअंदाज करती रही हैं, जिस कारण उन्हें बेहतर वेतन और सुरक्षा उपकरण के लिए 7 अगस्त से दो-दिवसीय विरोध प्रदर्शन आयोजित करने को मजबूर होना पड़ा है।

अपने संघर्ष की एक कड़ी के तौर पर 9 अगस्त को दिल्ली की आशा कर्मचारियों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होने उनका वेतन 4000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए किए जाने की मांग की। उनकी मांग को तो सरकार ने सुनी नहीं, बल्कि बेहद शर्मनाक तरीके से दिल्ली पुलिस ने उनपर ही एक प्राथमिकी दर्ज कर दी। आशा कर्मचारियों की वेतन को बढ़ाने और सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने की मांगें पूरी तरह जायज मांगें हैं क्योंकि वो महामारी के दौरान अपनी जान को खतरे में डालकर लोगों को सुविधाएं पहुंचा रही हैं। इसके साथ ही, जो वेतन वो मांग रही हैं वो सरकार द्वारा लागू न्यूनतम वेतन से भी कम है। उनकी मांगों को तुरंत मानने की जगह, सरकार उनके और देश भर के कामगारों के प्रति अपनी उदासीनता साफ दिखा रही है, जिनको उसने अपने हाल पर छोड़ दिया है।

केवाईएस केंद्र सरकार की आशा कर्मचारियों के प्रति उदासीनता और दिल्ली पुलिस का उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की कड़ी भर्त्सना करता है। साथ ही, केवाईएस मांग करता है कि तुरंत उनकी सभी मांगें मानी जाएँ, और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को तुरंत वापस लिया जाये।



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