इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर विमन में सफाई कर्मचारियों के आंदोलन की बड़ी जीत



  • विश्वविद्यालय प्रशासन ने सफाई कर्मचारियों को लॉकडाउन के समय का पूरा वेतन दिये जाने, और उन्हें ईएसआई और प्रोविडेंट फंड की सुविधा सुनिश्चित करने की मांग मानी

  • अपनी मांग नहीं माने जाने पर कर्मचारियों ने अपना संघर्ष फिर शुरू करने की चेतावनी दी

                                                         विशेष संवाददाता 




नई दिल्ली। इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर विमन (आई.जी.डी.टी.यू.डबल्यू.) में कार्यरत सफाई कर्मचारियों ने आज अपने संघर्ष की जीत के साथ ही कई दिनों से चल रहे सविनय अवज्ञा आंदोलन को विराम दिया।

ज्ञात हो कि सफाई कर्मचारी और उनका यूनियन सफाई कामगार यूनियन (एस.के.यू.) कर्मचारियों को उनका लॉकडाउन का वेतन न दिये जाने एवं अन्य समस्याओं को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन पर थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सफाई कर्मचारियों के आंदोलन के दबाव में उनकी सभी मांगें मान ली हैं। इसके साथ ही, सफाई कर्मचारियों ने अपने आंदोलन की जीत ऐलान किया। गौरतलब है कि अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली (एयूडी) के सफाई कर्मचारियों ने आज आई.जी.डी.टी.यू.डबल्यू. के सफाई कर्मचारियों के समर्थन में काली पट्टी बांधकर काम किया।



ज्ञात हो कि सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत आई.जी.डी.टी.यू.डबल्यू के सफाई कर्मचारी वेतन न दिए जाने और ठेकेदार द्वारा किए जा रहे शोषण के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। सफाई कर्मचारियों के शोषण पर दिल्ली सरकार द्वारा चालित विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार चुप्पी साधे हुए है। यह कर्मचारी पिछले कई  सालों से  विश्वविद्यालय में काम कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी में कार्यरत सफाई कर्मचारी वर्तमान में भारी आर्थिक तंगी का शिकार हैं क्योंकि कर्मचारियों को लगभग 3 महीने से (लॉकडाउन की पूरी अवधि का) उनका वेतन नहीं दिया गया है। मजबूरन सभी कर्मचारी 24 अगस्त से प्रशासन के सामने “सविनय अवज्ञा” पर बैठे हुए थे। सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान सभी स्थाई और कान्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पूरी सैलरी देने के सख्त आदेश के बावजूद यह सब हो रहा है।

साथ ही यह भी ज्ञात हो की ठेकेदार कंपनी के द्वारा सफाई कर्मचारियों  को दिल्ली सरकार द्वारा नियत न्यूनतम मजदूरी 14,842 भी नहीं दी जा रही है। कुछ कर्मचारियों को 11,200 रुपये और कुछ कर्मचारियों को 8000 से 10000 रूपये दिए जा रहे हैं। यही नहीं सफाई कर्मचारियों को ई.एस.आई जैसी मूलभूत स्वास्थ्य सुरक्षा सुविधा भी नहीं दी जा रही है। सफाई कर्मचारियों के शोषण का आलम यह है कि  कर्मचारियों से  मालढुलाई, शिफ्टिंग, विश्वविद्यालय की सफाई के बाद काम के लिए कहीं और भेज देना जैसे काम जो सफाई के काम में नहीं आते उनसे जबरन करवाए जाते हैं। यही नहीं, कर्मचारियों को लॉकडाउन के समय विश्वविद्यालय आने के लिये मजबूर किया गया। यह साफ दिखाता है कि किस तरह पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन सफाई कामगारों का शोषण कर रहा है जो दलित और वंचित समुदाय से आते हैं। इस तरह के तमाम शोषणों का लगातार जारी रहना विश्वविद्यालय प्रशासन और ठेकेदार कंपनी के गठजोड़ को दिखाता है।

यही कारण  हैं कि  मजबूरी में कर्मचारियों को आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ा। कर्मचारियों की मांग थी कि सभी कर्मचारियों को विश्वविद्यालय जो कि उनकी “प्रधान नियोक्ता” है द्वारा 3 महीने का बकाया वेतन जल्द से जल्द दिया जाए, सभी को दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन दिया जाए और सभी कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए ई.एस.आई. और प्रोविडेंट फंड की सुविधा तथा कोरोना को देखते हुए सभी कर्मचारियों को ग्लव्स, सैनिटाइजर, मास्क इत्यादि मुहैया करवाई जाए। कर्मचारियों और उनके यूनियन ने अपना आंदोलन आने वाले दिनों में फिर से शुरू करने की चेतावनी दी है अगर उनकी सभी मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं होती है।


Share on Google Plus

0 comments:

Post a comment