एसकेयू ने अंबेउकर विश्वविधालय को पत्र लिखकर सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा साधन की मांग की SKU wrote a letter to Ambekar University





  • हैंड ग्लव्स, फेस शील्ड, प्रोटेक्टिव गियर के बिना काम करवाना सफाई कर्मचारियों और परिवारवालों की जान खतरे में डालने का कदम


  • कैम्पस में कोरोना मरीज मिलने के बावजूद सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य के प्रति एयूडी प्रशासन की उदासीनता आपराधिक


                                                       सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

नई दिल्ली। अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली (एयूडी) के सफाई कर्मचारी कोरोना महामारी की चपेट में आने के भारी जोखिम में हैं। मौजूदा समय में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण विश्वविद्यालयों को अनलॉक-1 में भी बंद रखा गया हैद्य इसके बावजूद एयूडी प्रशासन विश्वविद्यालय के तीनों कैम्पसों में कार्यरत सफाईकर्मियों को पूरी संख्या में काम पर आने का दबाव बना रहा है।

विश्वविद्यालय के बंद होने के कारण विश्वविद्यालय में न तो छात्र ही आ रहे हैं और न ही शिक्षक, यहाँ तक कि लाइब्रेरी को भी बंद रखा गया है। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामों के लिए कार्यालय नियमित रूप से नहीं खोले जा रहे हैं। प्रशासनिक कर्मचारियों को रोटेशन के आधार पर या कुछ दिनों के अंतराल पर विश्वविद्यालय में काम के लिए बुलाया जा रहा है, जबकि इसके विपरीत सफाई कर्मचारियों को तीनो कैंपस (कश्मीरी गेट, कर्मपुरा, लोधी रोड) में  रोजाना और पूरी संख्या में काम पर बुलाया जा रहा है। जब विश्वविद्यालय के सभी तरह के काम-काज बंद हैं तो सफाई कर्मियों को पूरी संख्या में काम पर बुलाना न केवल अनावश्यक है बल्कि सफाई कर्मचारियों की जिंदगी और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।

ज्ञात हो कि कोरोना के समय में अम्बेडकर विश्वविद्यालय सफाई कर्मचारियों की जिंदगी और स्वास्थ्य के प्रति लगातार गैर-जिम्मेदार बना रहा है। पिछले दिनों एयूडी से सटे हुए इंदिरा गाँधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्विद्यालय के  कैंपस में कुछ कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए तो अम्बेडकर विश्वविद्यालय कश्मीरी गेट कैंपस को बंद करने का फैसला किया गया, लेकिन इस सम्बन्ध में सफाई कर्मचारियों को कोई सूचना नहीं दी गयी और उन्हें अगले दिन भी काम पर बुलाया गया।

एयूडी में सफाई कर्मियों को सुरक्षा साधनों के नाम पर जो ग्लव्स, मास्क दिये जा रहे हैं, वो बहुत ही घटिया दर्जे के हैं, जो काम के दौरान कुछ ही घंटों में फट जाते हैं। ग्लव्स के नाम पर उन्हें घटिया पन्नी के ग्लब्स दिए जा रहे हैं और मास्क भी ऐसे हैं जिससे कोरोना के विषाणु को नहीं रोका जा सकता। इसी तरह जो सैनिटाइजर भी दिया जा रहा है उसमें पानी मिला होता है। इस सम्बन्ध में सफाई कर्मचारियों ने लिखित और मौखिक दोनों माध्यमों से अपनी शिकायत दर्ज की हैं लेकिन हर बार उनकी शिकायत पर झूठा आश्वासन देकर लगातार समस्या को टाल देने की कोशिश हुई है।

विश्वविद्यालय कुलपति के नाम जमा किए गए ज्ञापन में एसकेयू ने सफाई कर्मचारियों के साथ हो रहे इस उदासीन व्यवहार पर सख्त कार्रवाई और त्वरित समस्याओं का निपटारा करने की मांग की। साथ-ही सफाईकर्मियों और उनके परिवारवालों की सेहत की जरूरी सुरक्षा हेतु उन्हें मास्क, ग्लव्स, सैनीटाइजर व फेस कवर दिये जाने की मांग को प्रमुखता से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखा गया।  


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