अब कंपनियों में मजदूर मरने के लिए अभिशप्त: मजदूर एकता केंद्र Now the companies are doomed to die: workers unity center





  • संगठन ने कंपनी के अधिकारियों को कड़ी-से-कड़ी सजा सुनिश्चित करने और गुजरात मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई


                                                            विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली। मजदूर एकता केंद्र (डबल्यू.यू.सी.आई) गुजरात में एक रसायन फैक्टरी में लापरवाही के कारण हुई घटना से 10 लोगों की मौतों पर राज्य सरकार की कड़ी भर्त्सना करता है। ज्ञात हो कि भरुच में हुई घटना दिखाती है कि किस तरह मजदूर कानून में बदलावों से अब न्यूनतम सुरक्षा मानकों का भी पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है। यशस्वी रसायन नाम की एक फैक्टरी एक बॉयलर में हुए धमाके  से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, और 50 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।

यह घटना पिछले दिनों में विशाखापटनम में हुई घटना के समान है, जहां बिना सुरक्षा इंतेजामों के फिर से संयंत्र खोला जा रहा था। ज्ञात हो कि मौजूदा संकट की स्थिति में, मजदूरों और कामगार आबादी के जीवन को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह से लापरवाह रही हैं। मजदूरों के लिए न सिर्फ भूखे रहने और भीख मांगने की नौबत आ गयी है, बल्कि उन्हें विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा कॉर्पोरेटों और उद्यमियों के लिए बंधुआ श्रम प्रदान करने के लिए राज्यों से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है। विभिन्न राज्य सरकारों ने आपातकालीन ताकतों का इस्तेमाल कर श्रम कानूनों के प्रावधान को ही खत्म करने की कोशिश की है। इसमें गुजरात सरकार ने भी विभिन्न श्रम कानूनों में बदलाव कर कंपनियों को मजदूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थिति संबंधी नियमों का पालन न करने की आजादी देने का रास्ता खोला है। गुजरात में हुई घटना के साथ यह कदम दिखाते हैं कि किस तरह कॉर्पोरेट-हित में काम करने वाली सरकारों के लिए मजदूरों और आम कामगार आबादी के जीवन का बिलकुल भी महत्त्व नहीं है।

मजदूर एकता केंद्र मांग करता है कि लोगों की मौत के जिम्मेदार संयंत्र और एलजी कंपनी के अधिकारियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाये और उनको कड़ी-से-कड़ी सजा सुनिश्चित की जाये। साथ ही, इस कंपनी का लाइसेन्स तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, मजदूर एकता केंद्र गुजरात मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करता है, जिसने इस तरह की कंपनियों को प्रदेश में काम करने और श्रम कानूनों में बदलाव कर लोगों की जान खतरे में डालने की इजाजत दी है।

Share on Google Plus

0 comments:

Post a comment