देश चलेगा तो आत्मनिर्भर भी बनेगा ! If the country runs, it will also become self-sufficient!






सरदार मंजीत सिंह 


देश की आबादी के करोड़ों लोग गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी बसर कर रहे है।ं इतनी बड़ी संख्या में गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वाले लोगों का जब तक जीवन स्तर उठाने व बेरोजगारों को रोजगार देने की तरफ सरकार कदम नहीं उठाती तब तक देश के आत्मनिर्भर का नारा लगाना बेईमानी होगा। देश की सरकार को आत्मनिर्भर होने का नारा भी तभी लगाना चाहिए था जब सरकार गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वालों व बेरोजगारों को रोजगार देने की तरफ पहल करती या  कुछ कदम उठाया जाता । सन 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई उस वक्त सरकार हर साल 2 करोड नौजवानों को नौकरी देने का वायदा किया था। सरकार बेरोजगारी समाप्त करने के लिए अगर कदम उठती तो शायद आज देश के हर नौजवान के हाथ रोजगार होता काम होता। देश में पूर्व में 10 करोड़ नौजवान बेरोजगार थे जिसकी संख्या लॉकडाउन के बाद काफी बढ़ गई होगी, क्योंकि जो मजदूर दूसरे प्रदेशों में काम कर रहे थे वे लौटकर गिरता मरता भूखा प्यासा रास्ते की दर्दनाक तकलीफों के साथ हजारों किलोमीटर पैदल चल कर ही अपने गांव पहुंच गये। सुप्रीम कोर्ट ने भी मजदूरों की दर्दनाक दशा को देखते सरकार को आदेश दिया कि मजदूरों को उनके घर पहुंचाने और रोजगार देने का काम करें । पूर्व के सालों में हर प्रदेश अपने यहां बेरोजगार नौजवानों को बेरोजगारी भत्ता देने का कार्य करती थी, तब सरकार की चिंता रहती थी ज्यादा से ज्यादा नौजवानों को रोजगार मिल जाए ताकि बेरोजगारी भत्ता ना देना पड़े। मगर आज बेरोजगारों को रोजगार नहीं उनके खाते में 1000 या 2000 या ₹500 डालने मे ज्यादा राजनीतिक फायदा देखती है। देश की हर योजना राजनीति का लाभ हानि देखकर बनाई जाती हैं। 

सरकार लोगों के खाते में पैसा जमा करना बंद करें और उस पैसे से उद्योग लगाएं ताकि रोजगार मिले उन्हीं राज्यों को संपन्नता का खिताब मिलता है जहां बेरोजगार कम हो । नौजवानों को रोजगार, किसान की फसल का उचित दाम गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वालों उसका जीवन स्तर उठाने के लिए योजना तैयार करें, तभी देश व प्रदेश आगे बढ़ सकता है । जब तक देश में वोटों की राजनीति समाप्त नहीं होगी देश कभी आत्मनिर्भर नहीं हो सकता। सबके हाथ काम यही हमारा नारा होना चाहिए। गरीबों के लिए मकान गरीबों के खाते में पैसा डालना या अन्य कोई योजना बनती है  इन योजनाओं  से 90 फीसदी गरीब लोगों को लाभ नहीं मिलता और भ्रष्टाचार और बढ़ जाता है। लाभ उन्हीं लोगों को मिलता है समाजिक रुतबे वालों को लाभ मिलता है। धीरे धीरे उद्योग बंद होने के कगार पर पहुंचते जा रहे हैं पिछले हफ्ते अटलस कंपनी और उसके बाद साइड फोर में ऑटो गियर का बंद होना एक पहल शुरू हो चुकी है। यह पिक्चर कहां तक जाएगी पता नहीं सिर्फ नारा लगाने से देश आत्मनिर्भर नहीं बन सकता । अभी इस नारे का वक्त नहीं था देश से पहले बेरोजगारी समाप्त होती और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के जीवन मैं संपन्नता लाए ताकि जीवन स्तर बढ़ सके । 

20 लाख करोड़ रुपए का राहत पैकेज की घोषणा करने से नहीं उस राहत पैकेज को धरती पर लाया जाए जब 20 लाख करोड रुपए का राहत पैकेज धरती पर आएगा सभी देश में रोजगार बढ़ेंगे तथा गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले का जीवन स्तर ऊंचा होगा तभी देश आगे बढ़ेगा । देश बढ़ेगा तो आत्मनिर्भरता की तरफ कदम होगा । क्या सरकार की राहत पैकेज की घोषणा चुनावी नारा ही बनकर रह जाएगा या धरती पर आएगा।  20 लाख करोड रुपए का राहत पैकेज जब देश में गिरती हुई जीडीपी ऐतिहासिक बेरोजगारी तड़पते गरीब मजदूर को छुटकारा मिलेगा सभी आत्म निर्भरता की तरफ कदम बढ़ाया जा सकता है । भूख, भूख होती है, भूख का कोई धर्म नहीं होता, कभी देश के प्रधानमंत्री जी के आवाहन पर ताली -थाली बजाने का काम किया था वह दिन दूर नहीं जब लोग भूख से बेहाल होकर खाली थाली बजाने लगेंगे। देश की आबादी का बहुत बड़ा भाग आज भूख से लड़ रहा है । इंसान को  जिंदा रहने के लिए भूख से लड़ना होता है । आओ भूख से लड़,े उद्योगपति रोजगार पैदा करें, सरकार मदद करें कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध हो कोई नया उद्योग लगाने की सोचता है तो सरकार मदद करें, किसान की फसल का उचित दाम मिले। सरकार ने जो राहत पैकेज की घोषणा की है उस को साकार करने के लिए सरकार आगे आए हाथ थामे हाथ पकड़ आगे चले तभी देश चलेगा।  देश चलेगा तो आत्मनिर्भर भी बनेगा। 

सरदार मंजीत सिंह 
आध्यात्मिक एवं सामाजिक विचारक


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