जयपुरिया में वर्चुअल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम Virtual Faculty Development Program in Jaipuria





                                               सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो

साहिबाबाद। जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस ने तीन दिवसीय वर्चुअल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया। एफडीपी प्रोग्राम ‘गुणात्मक शोध: परिप्रेक्ष्य और प्रचलन’ के विषय पर केंद्रित था। इसका उद्घाटन अकील बुसराइ कंसल्टिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अकील बुसराई और प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (ग्वालियर) के निदेशक डॉ. एस. एस. भाकर ने किया। प्रोग्राम का संचालन जयपुरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस की वीपी एचआर सुश्री अंजलि खन्ना ने किया।     
           
इस आयोजन में 900 से अधिक प्रतिभागी थे। इनमें से प्रमुख लोगों में एक डॉ. अकील बुसराई का इस विषय पर जानकारी देना था कि शिक्षक कैसे ‘अनलर्न’ करें और रिवर्स मेंटरिंग के अद्भुत कांसेप्ट को रीलर्न करें। उन्होंने यह भी बताया कि हम कैसे मिलेनियल के बीच हमारे मेंटर की तलाश करें जो प्रौद्योगिकी और डिजिटल दौर में हमें वीयूसीए की दुनिया में सहज होने में मदद करेंगे। डॉ. भाकर ने जोर देकर कहा कि शोध की गुणवत्ता और मात्रा के बीच संतुलन बनाना होगा और कैसे नए मानक पर शिक्षक और विद्यार्थी के संबंध में बुनियादी बदलाव आने वाला है। दोनों ने शिक्षकों के विकास और प्रगति में संस्थान की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका बताई।
              
दूसरे दिन के अतिथि वक्ताओं में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. एच. डांगी, (डेजिग्नेशन) और जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस (गाजियाबाद) की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दमयंती दत्ता शामिल थीं। दूसरे दिन भी पूरे भारत के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (गुड़गांव), डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (दिल्ली) के 600 से अधिक शिक्षक और कई अन्य प्रतिभागी थे। आयोजन के मुख्य कांसेप्ट थे भावुकता का विश्लेषण और एनवीवो सॉफ्टवेयर।
    
तीसरे दिन की शुरुआत डॉ. तिमिरा शुक्ला ने की। उन्होंने शोध की चक्रीय प्रक्रिया के बारे में बताया और इसकी व्याख्या की। उनके अनुसार शोध एक सिद्धांत से शुरू होता है और इसके बाद साहित्य समीक्षा और शोध पद्धति पर ध्यान दिया जाता है। डॉ. नितिन कुमार सक्सेना ने सत्र को आगे बढ़ाते हुए गुणात्मक शोध के लिए शोध के मानक एवं श्रेष्ठ प्रक्रिया के बारे में बताया। जेएसबी की डॉ. वर्तिका चतुर्वेदी ने स्कोपस इंडेक्स जर्नल्स में शोध पत्र प्रकाशन की विधि बताते हुए सत्र का समापन संदेश दिया। कार्यक्रम से सबसे अहम् जानकारी यह मिली कि कैसे शोध में जुटे लोग गुणात्मक शोध का उपयोग करें और अपनाएं गुणात्मक शोध की श्रेष्ठ प्रक्रियाएं क्या हैं। भावुकता विश्लेषण की आवश्यकता और उपयोग के बारे में भी सीखने को मिला।


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