कारखानों को चलाना मुख्य मुद्दा Main issue of running factories





                                               सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

साहिबाबाद । गाजियाबाद के जिलाधिकारी को लॉक डाउन के कारण बंद पड़े कारखानों को   चलाना मुख्य मुद्दा है । लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है क्योंकि कोरोना के संक्रमण को रोकना और जिले की औद्योगिक गतिविधियों को पहले की अवस्था में लाना दोनों ही कठिन काम है। लेकिन बिना प्रयास के कोई भी कठिन काम आसान नहीं होता । इसी लक्ष्य को लेकर जिलाधिकारी ने आवश्यक निर्देश दिए हैं ।
      
जानकारी के अनुसार कोरोना संक्रमण के कारण हुए लॉक डाउन से जिले की औद्योगिक और व्यवसायिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गई हैं। जिन्हें फिर से पटरी पर लाने के लिए जिला प्रशासन को सूझबूझ का परिचय देना पड़ेगा। इसमें प्राथमिकता कोरोना संक्रमण से जनता को बचाना रहे या कारखानों के पहियों को चलाना, इस पर मंथन करना होगा। कोरोना नाम का दुश्मन अदृश्य है इसलिए  यह संकट भी  बड़ा है । लेकिन बिना औद्योगिक और व्यवसायिक गतिविधियों के पटरी पर आए लोगों के अंदर से भय का माहौल समाप्त करना व देश का विकास भी संभव नहीं है। बहरहाल दोनों मुद्दों का अपना एक महत्व है और इन दोनों मुद्दों पर संयम और समझदारी दोनों को ही अपनाना होगा। 
     
औद्योगिक गतिविधियों के संचालन के लिए जिलाधिकारी गाजियाबाद अजय शंकर पांडे ने जनपद में औद्योगिक गतिविधियां चलाने के लिए माहौल बनाना शुरू कर दिया है। लेकिन प्रवासी मजदूरों के पलायन से कारखानों को पूरी तरह से उर्जावान देखना मुश्किल काम हो गया है। जिलाधिकारी ने हालांकि तीसरे चरण के लॉक डाउन के साथ ही औद्योगिक गतिविधियां शुरू करने के लिए अनुमति प्रदान कर दी थी। इसका परिणाम यह हुआ के जनपद की 27000 इकाइयों में से 14915  इकाइयां चलने लगी है। शेष 12085 इकाइयों को धीरे धीरे उत्पादन शुरू कराने के लिए प्रयास चल रहे हैं ।
     
इस संबंध में जिलाधिकारी ने उपायुक्त उद्योग को निर्देश दिए हैं कि वे औद्योगिक प्रतिनिधियों से वार्ता कर उनकी समस्याओं को सुनें और प्राथमिकता के तौर पर समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी का विचार है कि बाजारों को 1 जून से पूरी तौर से खोल दिया जाए। इसके अलावा जनपद की जिन इकाइयों पर शासकीय विभागों का भुगतान शेष है ऐसी इकाइयों की सूची तैयार कर भुगतान की कार्यवाही प्राथमिकता पर पूरी कराने पर बल दिया गया है।

यहां यह भी गौरतलब है कि जिलाधिकारी ने औद्योगिक गतिविधियों को चलाने के लिए किसी तरह की अनुमति की औपचारिकता  नहीं रखी है केवल अंडरटेकिंग के आधार पर शासनादेशों के साथ चिन्हित  औद्योगिक इकाइयों को काम करने की अनुमति प्रदान की गई है। जिला अधिकारी का मानना है सामने चुनौती बड़ी है लेकिन सूझबूझ  और धैर्य से जिले में सकारात्मक माहौल तैयार कर औद्योगिक और व्यवसायिक गतिविधियों को पहले की तरह पटरी पर लाया जाएगा। 

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