केवाईएस ने दिल्ली विश्वविद्यालय कुलपति को ऑनलाइन परीक्षा के संबंध में लिखा ज्ञापन KYS wrote memorandum to Delhi University Vice Chancellor regarding online examination





  • बेहद खराब गुणवत्ता और अधूरा स्टडी मटेरियल एसओएल छात्रों की सबसे बड़ी परेशानी


  • इंटरनेट सुविधा और घर में पढ़ने का अनुकूल न होने से ऑनलाइन परीक्षा एसओएल छात्रों के लिए संभव नहीं


                                                     सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने आज ऑनलाइन /ओपन बुक परीक्षा के खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन लिखा।  कोविड-19 महामारी और राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते रेगुलर और स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के कॉरेस्पोंडेंस छात्रों की कक्षाएं स्थगित हैं। विश्वविद्यालय ने छात्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑनलाइन शिक्षण शुरू किया था। अब ऑनलाइन कक्षाओं पूरी हो गई हैं यह मानते हुए प्रशासन ने ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के रेगुलर छात्रों का एक बड़ा हिस्सा बिना किताबें, नोट्स, व अन्य अध्ययन सामग्री के ऑनलाइन शिक्षण से जूझने को मजबूर है। परंतु, एसओएल के छात्रों को यह परेशानी काफी लंबे समय से झेलनी पड़ रही है। ज्ञात हो कि एसओएल छात्र गरीब और हाशिए की वर्गों से आते हैं, और ज्यादातर अपने परिवारों से पढ़ने वाली पहली पीढ़ी हैं।  साथ ही, ज्यादातर छात्रों के परिवार वाले दिहाड़ी मजदूर हैं और इस संकट के समय उनके परिवारों को जीवन और जीविका को लेकर बहुत ही दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

ज्यादातर एसओएल छात्र बहुत ही छोटे कमरों में अपने पूरी परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं। गरीब घरों के इन छात्रों के लिए जगह की कमी होने के कारण बिना किसी समस्या के पढ़ाई कर पाना संभव नहीं है। साथ ही, एसओएल में निशक्त छात्रों का एक बड़ा हिस्सा पढ़ता है, जिनकी ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए वांछित टेक्नोलोजी तक पहुँच नहीं है, और जो शिक्षण संस्थानों में मुहैया कराये जाने वाले थोड़े से संसाधनों और सुविधाओं पर पूरी तरह से निर्भर हैं। इसके अतिरिक्त, छात्राओं को होने वाली विशिष्ट दिक्कतों को भी नहीं नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिनपर लॉकडाउन के कारण घर के कामों का बोझ बढ़ा है। ऑनलाइन शिक्षा से जहां सुविधासंपन्न रेगुलर छात्रों को भी जूझना पड़ रहा है, वहीं एसओएल छात्रों के लिए यह कोई विकल्प हो ही नहीं सकता।

ऐसी स्थिति में, डीयू द्वारा ऑनलाइनध्ओपन बुक परीक्षा के फैसले से पहले से पीड़ित एसओएल छात्रों की परेशानियाँ और भी बढ़ गयी हैं। ज्ञात हो कि लॉकडाउन के कारण छात्रों को हर साल मिलने वाली कुछ कक्षाएँ ही नहीं मिली हैं। साथ ही, उनको मिला स्टडी मटेरियल इतना खराब है कि अगर ऑनलाइन परीक्षा होती है, तो एसओएल छात्रों का एक बड़ा हिस्सा फेल होगा।


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