‘साइबर अपराध और सुरक्षा प्रणाली’ विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित Guest Lecture on 'Cybercrime and Security System' organized





  • कोरोनाकाल में मेवाड़ के विद्यार्थियों ने सीखे साइबर अपराध से बचने के तरीके


सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो

गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के एचएसएस विभाग द्वारा ‘भारत में साइबर अपराध और सुरक्षा प्रणाली’ विषय पर आयोजित ऑनलाइन अतिथि व्याख्यान में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के विजिटिंग फैकल्टी डॉ. मनोज कुमार ने साइबर अपराध व इसके सुरक्षा सम्बंधी महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

ऑनलाइन व्याख्यान सुनने के लिए विभाग के विद्यार्थी काफी संख्या में उपस्थित रहे। डॉ. मनोज कुमार यादव प्रैक्टिसिंग अधिव्यक्ता भी हैं। डॉ यादव ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के अनुसार विवरण देकर अपना व्याख्यान शुरू किया। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन की मदद से साइबर अपराध और अन्य बिंदुओं को
समझाया। उनके अनुसार अपराध एक सामाजिक और आर्थिक घटना है और अपराध मानव समाज जितना पुराना ही है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराध प्रौद्योगिकी आधारित अपराध है। इसमें कंप्यूटर या इंटरनेट का उपयोग हथियार के रूप में किया जाता है। साइबर अपराध के विभिन्न प्रकार हैं जैसे कि व्यक्ति के खिलाफ अपराध, संपत्ति के खिलाफ अपराध, सरकार के खिलाफ अपराध, समाज के खिलाफ अपराध इत्यादि। अपने उपयोगी व्याख्यान में उन्होंने फिशिंग, स्पूफिंग, इंटरनेट फार्मिंग, क्रेडिट और डेबिट कार्ड धोखाधड़ी, अश्लील सामग्री के इलेक्ट्रॉनिक प्रकाशन  को भी समझाया। कानूनी पहलुओं को बताते हुए डॉ यादव ने आईटी एक्ट 2000 के विभिन्न कानूनी प्रावधानों जैसे कि धारा 43, धारा 66, धारा 68, धारा 70, धारा 72, धारा 73, धारा 74 आदि के बारे में छात्रों को बताया। विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए

वह कहते हैं कि सेलिब्रिटीस पर मीमस बनाना अपराध नही है बशर्ते मीमस व्यक्ति या किसी भी धर्म या समुदाय इत्यादि की गरिमा में ठेस ना पहुंचाए। बैंक एटीएम धोखाधड़ी से संबंधित प्रश्नों के जवाब में उन्होंने बताया कि यदि उपभोक्ता की लापरवाही पर धोखाधड़ी नहीं होती है तो बैंक उत्तरदायी होता है और उपभोक्ता को उसका पैसा वापिस मिलेगा। ऑनलाइन अतिथि व्याख्यान में 90 से अधिक लोगों में विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता पाल, अमित पाराशर समेत अन्य अध्यापक और छात्र-छात्राएं मौजूद थे। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने बताया कि साइबर अपराध व इससे बचाव के बिन्दुओं को विद्यार्थियों ने अच्छी तरह से समझा। यह एक रोचक व आज के दौर में आवश्यक विषय है, जिसे कोरोनाकाल में समझना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस कॉलेज बंद होने के बावजूद अपने विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह मुहिम निरंतर जारी रहेगी।


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