मेहनतकश मजदूरों की दुर्दशा के लिए केंद्र सरकार की लापरवाही जिम्मेदार: यादव Central government's negligence responsible for the plight of toiling laborers: Yadav




  • लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट लगातार प्रथम लाॅकडाउन से ही कर रहा है जरूरतमंदों को राशन वितरण 


                                                         सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

साहिबाबाद । लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट के तरफ से लाॅकडाउन के पहले चरण से ही मेहनतकश, मजदूर, दस्तकारों, घरों में काम करने वाली महिलाओ, रेहड़ी - पटरी वालों व जरूरतमंदों को राशन किट बांटा जा रहा है। आज भी संस्था के तरफ से जनकपुरी, शालीमार गार्डन, इतवार बाजार, चंद्रशेषर पार्क के पास, राजेन्द्र नगर ब्लाक-3, गरिमा गार्डन, अशोक वाटिका, भोपुरा में राशन किट का वितरण किया गया । 


ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष राम दुलार यादव ने बताया कि राशन किट में चावल, दाल, चीनी, आटा, तेल, नमक व मसालों का बनाया गया है। संस्था पलायन करने वाले मजदूर भाइयों को भोजन का पैकेट, पानी, कोल्डड्रिंक, बिस्कुट उपलब्ध करा रही है। अब तक संस्था सैतालीस सौ से अधिक परिवारों तक राशन किट वितरित कर चुकी है, तथा विभिन्न शहरों से पलायन करने वाले मजदूर भाइयों, महिलाओं, बच्चों में 25 हजार से अधिक भोजन के पैकेट, पानी, बिस्कुट, कोल्डड्रिंक वितरित की है। अभी भी मजदूरों का पलायन बड़ी संख्या में हो रहा है, वे बेबसी, लाचारी, बीमारी में फटेहाल, तपती धूप में भूखे-प्यासे अपनी जन्मभूमि जाने की जद्दो-जहद कर रहे हैं। 

राम दुलार यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार की घोर लापरवाही के कारण पूरे देश में मेहनतकश, कामगार की बच्चों सहित यह दुर्दशा हो रही है। अब जो सरकार ने राहत पैकेज दिया है, शायद ही उन्हें इसका लाभ मिले। मेरी केन्द्र सरकार से सानुरोध मांग है कि जैसे विश्व के देश नकद बैंक में निधि डाल रहे हैं वैसे जिन मजदूर भाइयों का बैंक में खाता है, उन्हें कम से कम 9000 रुपये नकद भेजने का कष्ट करें जिनका खाता नहीं है उनका तत्काल बैंक में खाता खुलवा, उन्हें भी उपरोक्त राशि भुगतान की जाय। कुशल कारीगरों को 16000 रुपये, छोटे, मझोले दुकानदारों को क्रमशः रु0 पच्चीस से पचास हजार तक नकद भुगतान उनके बैंक खाते में किया जाय। बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता नकद भुगतान हो क्योकि देश में लाखों लोग बेरोजगार हो गये है। भारत की आर्थिक स्थिति भयावह हो गयी है, जन-जन की क्रयशक्ति बढ़ाने से ही बाजार में तरलता आयेगी, जरूरतमंद के जेब मे पैसा आयेगा जब उसे काम मिलेगा। 

उन्होंने कहा कि आजादी के 72 वर्ष बाद भी हमारे देश की दो तिहाई आबादी विपन्नता झेल रही है। कोरोना महामारी ने आर्थिक विकास की पोल खोल दी है। आजादी के बाद अनेंकों बार आपदाओं में राहत पैकेज दिया जाता है, लेकिन वह रिस-रिस कर रास्ते में ही अधिकतर रह जाता, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है, यदि विकास व राहत के नाम पर जितना धन 72 वर्ष में खर्च हुआ है, सही व जरूरतमंद तक पहुंचा होता तो आज 75 करोड़ की आबादी को दो जून की रोटी के लिए हांड़-तोड़ मेहनत न करनी पड़ती, इसलिए मेरा मानना है कि जो राहत किसान, कामगार, जरूरतमंद को दी जाय वह उन तक पहुंच सके। ईसा से 350 वर्ष पहले आचार्य चाणक्य ने कहा था कि “मछली कितना पानी तालाब में पी जाती है, जैसे इसका आकलन नहीं किया जा सकता, वैसे ही राज्याधिकारी, कर्मचारी सरकारी कोष का कितना धन गटक जाता है, उसका आकलन नहीं हो सकता” । हम 21वीं सदी में भी आज लचर व्यवस्था के शिकार हैं, मनरेगा जैसी योजनाओं का पैसा जनता तक पहुंचे तभी गाँव, कस्बे, शहर में पुन: रौनक लौटेगी, आज मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग भी राहत की इंतजार कर रहा है, उसके सामने भी भोजन का संकट है उसे भी सरकार राहत प्रदान करे। 

राशन वितरण में सहयोगी रहे, वीरेन्द्र यादव एडवोकेट, नरेश वर्मा, अवधेश यादव, अरुण भारती, इंजी0 धीरेन्द्र यादव, बिन्दू राय, उमा भारती, संजू शर्मा, रेनूपुरी, सुभाष यादव, विजय भारद्वाज, धर्मेन्द्र, अजय सिंह, बृजमोहन गर्ग, हरिशंकर यादव आदि।  

                                                              


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