उत्तर-पूर्व फोरम ने किया देहिंग पटकाई हाथी रिजर्व क्षेत्र में कच्चा कोयल खनन पर रोक लगाने की मांग





  • फोरम ने असम मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर खनन की मंजूरी की निंदा की तथा वन्यजीवों व पेड़ - पौधों को बचाने का अनुरोध किया। 


                                                      विशेष संवाददाता

नई दिल्ली । नॉर्थ-ईस्ट फोरम फॉर इंटरनेशनल सॉलिडेरिटी (एनईएफआईएस) असम में देहिंग पटकाई हाथी रिजर्व में खुले कच्चा कोयला खनन की मंजूरी की कड़ी निंदा करता है। फोरम ने आज असम के मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर पत्र लिखकर कहा कि खनन को तुरंत रिजर्व में रोक दिया जाना चाहिए।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि डीपिंग कोयला खनन के लिए देहिंग पटकाई आरक्षित वन के 98.59 हेक्टेयर के हिस्से को साफ कर दिया गया है, जबकि शेष आरक्षित वन को भूमिगत कोयला खनन के लिए उपयोग करने की अनुमति दी गई है। यह कदम न केवल देहिंग पटकाई हाथी रिजर्व में वनस्पतियों और जीवों पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव डालने की उम्मीद है, जो ऊपरी असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में 111 वर्ग किलोमीटर में फैले देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा है, लेकिन जहां स्थानीय जातीय समुदाय आसपास के क्षेत्र में रहते हैं। अभयारण्य को देश का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय तराई वाला वर्षावन कहा जाता है।

देहिंग पटकाई में अवैध कोयला खनन कई सालों से चल रहा है, और रिपोर्टों के अनुसार, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल ) 57.02 हेक्टेयर में कई वर्षों से बिना किसी अनुमति के वन रिजर्व में खनन कर रहा है। इसके अलावा, यह भी बताया गया है कि मंजूरी बिना किसी उचित चर्चा के वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए दी गई।

इस संबंध में, एनईएफआईएस देहिंग पटकाई हाथी रिजर्व में खुले कास्ट कोयला खनन की मंजूरी की निंदा करता है। यह मांग करता है कि न केवल रिजर्व में खनन को तुरंत रोका जाना चाहिए, बल्कि खनन गतिविधि के बारे में कोई भी निर्णय स्थानीय समुदायों की सहमति के बाद लिया जाना चाहिए।


Share on Google Plus

0 comments:

Post a comment