आखिर कोबिड - 19 के बीच बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव का क्यों हुआ तबादला ? After all, why was the Principal Secretary of Bihar Health Department transferred between Cobid-19?




                                   स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव

  • ब्यूरोक्रेट व राजनीतिक गलियारे में तैर रहे चर्चा के दौरान कई सवाल


  • प्रदेश में सेनेटाइजर बनानेवाली कंपनियों को लाइसेंस देने में धांधली का अंदेशा


सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बीच दो दिन पहले बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव संजय कुमार का तबादला आखिर क्यों किया गया। यह सवाल ब्यूरोक्रेट व राजनीतिक गलियारे में तैर रहा है। इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठने शुरू हो गये हैं। 

इस समय बिहार में कोरोना वायरस के मरीजो की संख्या तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे समय में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव का तबादला चर्चा का विषय बना हुआ है। इनमें कई बातें सामने आ रही है, लेकिन सच्चाई क्या है यह तो जांच के बाद ही सामने आ सकता है। वैसे कहा जा रहा है कि संजय कुमार से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई मामलों को लेकर नाराज थे। वहीं दूसरी तरफ पीपीई किट खरीद में बड़े पैमाने पर लापरवाही का मामला सामने आया था। बताया जा रहा है कि इस मामले की जांच भी की जा रही है। एक मामला सेनेटाइजर बनाने वाली कंपनियों को लाइसेंस देने में हीलाहवाली व देरी भी इसका मुख्य कारण है। 




उल्लेखनीय है कि कोविड - 19  से बचाव के लिए केंद्र सरकार द्वारा पहले चरण के लाॅकडाउन लागू होने के दौरान संजय कुमार ने पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. सत्येंद्र नारायण सिंह को सस्पेंड कर दिया था । डाॅ0 सतेन्द्र नारायण सिंह के खिलाफ आरोप था कि कोरोना वायरस के सैंपल टेस्टिंग में पीएमसीएच के माइक्रोबायोलाॅजी विभाग काफी सुस्त था और जांच में तेजी नहीं आ पा रही थी। बताया जाता है कि इस कार्य से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संजय कुमार पर काफी नाराज थे। हालांकि पांच दिन के अंदर ही राज्य सरकार ने डाॅ0 सतेन्द्र नारायण सिंह का सस्पेंसन रद््द कर दिया था। इसके बाद उन्होंने पूरे प्रदेश के 362 डाॅक्टरों की सूचि बनवाई थी जो ऐसी महामारी के दौरान अपने ड्यूटी से नदारद थे। इन सभी डाॅक्टरों को उन्होंने शो काज नोटिश जारी किया था और इनके खिलाफ कार्रवाई करने पर विचार कर रहे थे। डाॅक्टरों की यह लाॅबी भी उनके खिलाफ मुहिम चला रही थी। 

इसमें एक मामला यह भी सामने आ रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और संजय कुमार के बीच कई मुद्दों के लेकर अनबन चल रही थी। जिसका नतीजा था कि दोनों ही सोशल मीडिया पर कोविड - 19 को लेकर जानकारियां साझा कर रहे थे। दोनों के जानकारियों में काफी असमानता थी। बताया जाता है कि संजय कुमार कोरोना वायरस से संबंधित जानकारियां सरकारी ट्यूटर हेंडल के वजाय अपने निजी ट्यूटर हेंडल से साझा करते थे। इसे लेकर भी विभाग में कई तरह की बातें हो रही थी। 


                                               राज्य ड्रग कंट्रोलर रवीन्द्र सिन्हा 

विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक लाख पीपीई किट की खरीदारी की गई थी, उसमें भी लापरवाही सामने आया था। इसकी जांच चल रही है। इसी तरह केंद्र सरकार ने 18 मार्च को एक आदेश जारी कर तीन दिन के अंदर उच्च क्वालिटी के सेनेटाइजर बनानेवाली कंपनियों को लाइसेंस देने को कहा था। बिहार सरकार ने सेनेटाइजर बनाने वाली कंपनियों से आवेदन लेकर उन्हें 25 - 30 दिन तक लटकाये रखा और बहुत परेशान करने के बाद उन्हें आदेश दिया गया। लाइसेंस देने में धांधली की बू आ रही है। दो कंपनी के मालिको ने पटना हाई कोर्ट में बिहार सरकार के चीफ सिक्रेटरी, एडिशनल चीफ सिक्रेट्री प्रोविजन एक्साइज और रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट, कमिश्नर व ज्वाइंट कमिश्नर प्रोविजन एक्साइज और रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट,  राज्य ड्रग काॅन्ट्रोलर और एक्साइज सुपरिटेडेंट के खिलाफ रीट डालकर केस नंबर 5608/2020 तथा 5610/2020 के तहत सभी कागजात सही होने पर भी लाइसेंस में देरी करने पर न्याय की मांग की थी। इसमें पहली कंपनी मेसर्स फन्टाॅसी ड्रग्स प्राइवेट लिमिटेड, जिला वैशली की हाजीपुर औधोगिक क्षेत्र की है तथा दूसरी कंपनी मेसर्स सम्राट लेबोरेटरीज हरपुर अलोथ औधोगिक क्षेत्र जिला समस्तीपुर की है। दोनों मामले में न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी जांच के उपरान्त एक सप्ताह के अंदर इन्हें लाइसेंस दिया जाए और अदालत को सूचित किया जाए। 


                                                   स्वास्थ्य मंत्री के पी ए शशांक शेखर 

सूत्रों का कहना है कि बिहार सुगर मिल्स की एक प्रतिनिधि मंडल प्रदेश के चीफ सिक्रेटरी से मिल कर इसकी शिकायत की जिसमें लाइसेंस देने के नाम पर मोटी रकम लेने की जानकारी भी दी गई थी। चीफ सिक्रेटरी ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार को बुलाकर इस मामल की संज्ञान ली थी। हालांकि बिहार प्रदेश में अभी तक 10 कंपनियों को केंद्र सरकार के आदेश के बाद भी एक माह के बाद लाइसेंस जारी किया गया । इसमें मुख्य रूप से मेसर्स ग्लोबस स्पिरिट्स लि0, धन्दुआ, जन्दहा, वैशाली, मेसर्स फन्टासी ड्रग्स प्रा0 लि0 , इण्डस्ट्रीयल एरिया, वैशाली, मेसर्स हरिनगर सुगर मिल्स लि0 डिस्टलरी डिविजन, हरिनगर, पं0 चंपारण, मेसर्स वेस्टरलीन ड्रग्स प्राव लि0 फतुहा, पटना, मेसर्स क्राॅस फर्मास्यूटिकल्स प्रा0 लि0 फतुहा पटना, मेसर्स सम्राट लेबोरेटरिज, इण्डस्ट्रीयल एरिया, हरपुर अलीथ, समस्तीपुर, मेसर्स सोन सति आॅरगेनिस प्रा0 लि0 ( डिस्टलरी डिविजन), राजा पट्टी कोठी, बैकुंठपुर गोपालगंज, मेसर्स एस0सी0आई0 इण्डिया लि0 बाॅंका, मेसर्स सिमलिया रिसर्च लेबोरेटरी प्रा0 लि0 भोजपुर तथा मेसर्स सिमलिब्स रिसर्च लेबोरेटरी प्रा0 लि0 भोजपुर हैं। इन सभी को लाइसेंस देने में बड़ी धंाधली का मामला सामने आ रहा है जिसमें औषधि नियंत्रक मुख्य अनुज्ञापन प्राधिकारी रविन्द्र कुमार सिन्हा, स्वास्थ्य मंत्री के पीए शशांक शेखर समेत विभाग के कई अधिकारियों की संलिप्तता सामने आ रही है जो ड्रग्स इंस्पेक्टर तक की मिलीभगत से की गई है।  सूत्रों की माने तो अभी भी तीन कंपनियों का आवेदन पेडिंग में है जो चक्कर लगा रहे हैं। 




सूत्रों की माने तो उधर इस मामले में बिहार सुगर निर्माता संघ ने चीफ सिक्रेट्री और मुख्यमंत्री से मिल कर शिकायत की है तो दूसरी तरफ अखिल भारतीय सेनेटाइजर निर्माता संघ ने केंद्रीय सरकार से इस मामले की व्यापक जांच की मांग कर दोषियों को सजा देने की मांग की है। दोनों संस्थाओं ने शीघ्र जांच न कराने पर अदालत की शरण में जाने का मन बना रहे है। बताया जाता है कि इस मामले को संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के खिलाफ एक्शन में आये। लेकिन अभी भी मुख्य दोषी बचे हुए हैं वहीं इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री के पी ए का नाम आने से मंत्री पर भी उंगली उठ रही है। पहले भी एक अखबार में एक खबर छप चुकी है कि बिहार में हर माह 10 करोड़ के सैनेटाइजर की खपत है, लेकिन शुरू में एक ही कंपनी को लाइसेंस दिया गया था। इस खबर के बाद ही विभाग हरकत में आया और 10 इन कंपनियों को लाइसेंस दिया गया। इन्हें लाइसेंस देने में देरी का कारण ड्रग कंट्रोलर रवीन्द्र सिन्हा ने कंपनियों द्वारा कागजी कार्यवाही पूरा न होना बताया था। 


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