खुल्लम - खुला : डूबते को तिनके का सहारा grasping at straws






                                                                         संजय त्रिपाठी   


कहते है डूबते को तिनका का सहारा। इस मुहावरे का आशय है कि विपत्ति में थोड़ी सी सहायता भी काफी होती है। है तो यह मुहावरा लेकिन कई जगहों पर इसका विशेष महत्व भी है। प्रसिद्ध विद्वान व महाकाव्य रचयिता गोस्वामी तुलसी दास के विषय में भी कहा जाता है कि कामदेव के वशीभूत होकर रात्रि में आंधी - पानी के बीच एक कदली यानी केला के पेड़ के सहारे उफनती नदी पर कर अपनी पत्नी के पास उसके मायके पहुंच गए। पत्नी द्वारा तिरस्कार करने और कटु बचन सुन कर उनके मन में वैराग्य उत्पन्न हुआ और भक्तिरस में रम कर उन्होंने रामचरित मानस जैसा महाकाव्य की रचना कर डाली। बहुत ऐसे लोग है जो पत्नी के सहारे ही अध्यात्म और दर्शन के मार्ग पर मुड़े है। एक हमारे पत्रकार और कवि साथी भी दो - तीन वर्ष पूर्व अपनी पत्नी के तिरस्कार के कारण ही फेसबुक पर फटा हुआ सर दिखाते हुए वैराग्य में लीन हो गए। बहुत सारे भ्रमण किये, बहुत सारा प्रवचन किये और आज कल मेरठ में धुनी रमाये हुए हैं। एक हम है जिसे रात - दिन सुनकर भी कोई वैराग्य उत्पन्न ही नहीं हो रहा। कृपा कहा अटकी है मुझे आज यही पता नहीं चल पाया। निर्मल बाबा को भी खोज रहा हूं, लेकिन लाॅकडाउन के कारण उनका पता भी नहीं चल रहा है। किसी ने सलाह दी कि बाबा रामदेव से ही मिल लो, परन्तु डर लग रहा है कि वे कृपा के विषय में कुछ बताये या न बताये अपने प्रोजेक्ट और दवाओं के बारे में जरूर बताने लगेंगे। साथ ही आज कल हरिद्वार में नदी के घाट के किनारे कही हवन - तर्पन कर रहे हैं और पत्रकारों को पाते ही क्या - क्या कर रहे इस महामारी के त्रासदी में गिनाने लगेंगे। सबसे बड़ा यही डर है। खैर जो भी हो गोस्वामी तुलसीदास के लिए वह केला का पेड़ भी डूबते को तिनका का सहारा ही बना। एक अकबर और बीरबल की कहानी भी कभी पढ़े थे जिसमें नौका विहार के दौरान महाराज अकबर ने बीरबल को एक तिनका देकर कहा था कि डूबते को तिनका का सहारा होता है। इस तिनके के सहारे जो भी मेरा दरबारी नदी पार कर देगा उसे अपनी राज देकर राजा बना देंगे। सभी दरबारी सोच में पड़ गए, लेकिन बीरबल ने कहा महाराज आप मुझे पहले राजा बनाइए फिर मैं आपको नदी पार कर दिखाता हूं। महाराज भी उनकी बात मान लिये और कुछ समय के लिए बीरबल को राजा बना कर बोले, बीरबल अब तुम राजा हो। यह सभी दरबारी, अंगरक्षक और सेना तुम्हारा है। जाओं मैं तुम्हें कुछ समय के लिए राजा बनाता हूं। बीरबल ने तिनका हाथ में लेकर सभी अंगरक्षकों और दरबारियों से कहा कि अब मैं राजा हूं और आप लोगों का कर्तव्य है कि अपने राजा तथा राज्य की रक्षा करें। इसके साथ ही वह बोला कि अब मुझे इस तिनके के सहारे नदी पार करना है और नदी में कूदने के लिए आगे बढ़ा तभी सारे अंगरक्षक उसे पकड़ लिए और बोले महाराज आप हमारे राजा है आपकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। हमारे रहते आप नदी में नहीं कूद सकते। ऐसा उसने कई बार किया लेकिन हर बार उसके अंगरक्षक उसे पकड़ लेते । ऐसा करते नदी का किनारा आ गया और महाराज नाव से उतरते समय बोले, बीरबल तुम हार गए। तिनके के सहारे नदी नहीं पार कर पाए। बीरबल ने कहा महाराज तिनके के सहारे ही तो नदी पार किया, क्योंकि अगर तिनका नहीं होता तो न आप मुझे राजा बनाते और न अंगरक्षक मुझे बचाते। फिर आप ही बताइए मैं कैसे नदी पार कर पाता। अकबर ठहांका लगाकर हंसे। यहां भी सारा तिनके का ही कमाल दिखा। आज पता चला कि यूपी में योगी सरकार भी मास्क के जगह गमछा और दुप्पटा के सहारे कोरोना जैसी बीमारी का सामना करने के लिए लोगों को उपदेश दिए है। ठीक है डूबते को तिनका का सहारा तो होता है लेकिन इस तिनका को तो लोग पहले से ही सहारा बना रखे थे। आज पूरे देश में ही लग रहा है कि कोरोना से लड़ाई के लिए अब तिनका का सहारा ही ढूढा जा रहा है। चलो, जो भी हो रविवार रात 9 बजे प्रकाश बुझा कर प्रकाश किया गया। कई जगह नारे भी लगे तो कई जगह ताली - थाली भी बजे। अच्छा है इसका असर बहुत बड़ा पड़ता है अब इंतजार करो अगले सप्ताह क्या करने को मिलेगा। लगे रहो, इधर हम भी लगे हैं।  राम - राम जी।  




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