नेत्रहीन कामगार यूनियन ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को लिखा पत्र Blind Workers Union wrote a letter to Chief Minister Kejriwal






नेत्रहीन कामगारों की लॉकडाउन के समय आर्थिक और खाद्य समस्या के तुरंत निवारण के किए गुहार लगाई

                                                                विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली । मौजूदा लॉकडाउन दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत कामगारों की तरह नेत्रहीन लोगों और कामगारों को भी बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। नेत्रहीन कामगार यूनियन (बी.डबल्यू.यू) ने इस संकट की घड़ी में नेत्रहीन लोगों और कामगारों के द्वारा सहन की जा रही भारी आर्थिक और खाद्य समस्याओं को उजागर हुए इसके समाधान के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांगे रखीं।

यूनियन के आलोक कुमार और रामनाथ सिंह का कहना है कि ज्यादातर नेत्रहीन कामगार दिहाड़ी मजदूर हैं और बेहद ही खराब आर्थिक स्थिति में रहने के लिए मजबूर हैं। आर्थिक रूप से समाज के सबसे पिछड़े पायदान में रहने के कारण उनकी आवाज शायद ही मुख्यधारा के सामने आ पाती है। ऐसी परिस्थिति में उन्हें लॉकडाउन के चलते खाने और पैसे की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके परिवार भूखे रहने को मजबूर है।

देश भर के श्रम संस्थानों में नेत्रहीन कामगारों का व्यापक शोषण देखने को मिलता है, फिर भी इसकी ओर न तो प्रशासन और न ही समाज के अन्य वर्गों का ध्यान जाता है। इन कामगारों को आर्थिक पिछड़ेपन के साथ प्रशासनिक अवहेलना का शिकार होना पड़ता है। इसीलिए नेत्रहीन कामगार यूनियन मुख्यमंत्री के सामने यह मांग करता है कि वे इन कामगारों की समस्याओं का निवारण करते हुए उन पर विशेष ध्यान देने के लिए संबंधित संस्थानों को निर्देशित करें। साथ ही यह  दिल्ली के नेत्रहीन कामगारों की सूची प्रदान करते हुए मुख्यमंत्री से यह अपील भी करता कि लॉकडाउन जैसे इस संकट की घड़ी में नेत्रहीन लोगों और कामगारों के खाने और रहने जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की तुरंत पूर्ति की जाए। नेत्रहीन कामगार यूनियन इकलौता संगठन है, जो नेत्रहीन लोगों के साथ-साथ नेत्रहीन कामगारों के मुद्दों को लगातार उठाता रहता है और नेत्रहीन समाज की बेहतरी के लिए निरंतर संघर्षशील है।



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