आम जनता की आवाज पर पुलिसिया दमन लोकतंत्र का हिस्सा नहीं: केवाईएस Police suppression on the voice of the general public is not a part of democracy: KYS





  • दिल्ली के असम भवन पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ असम में हो रहे पुलिसिया दमन के विरोध में प्रदर्शन में केवाईएस ने हिस्सेदारी निभाई
  • असम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत भारत के अन्य राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया दमन करने वाली राज्य सरकारों की करता है कड़ी भर्त्सना



                                                  विशेष संवाददाता 


नई दिल्ली । क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) कार्यकर्ताओं ने सोमवार को दिल्ली के असम भवन में आम जनों और अन्य प्रगतिशील संगठनों के साथ मिलकर दिल्ली विश्वविद्यालय पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के शुरू होते ही दिल्ली पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में ले लिया और मंदिर मार्ग थाने ले गयी। केवाईएस इस कानून के खिलाफ असम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत देश के अलग-अलग इलाकों में हो रहे प्रदर्शन के खिलाफ राज्य सरकारों की बर्बरता की कड़ी भर्त्सना करता है और यह मांग करता है कि इस कानून का विरोध कर  रहे सभी लोगों और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाये। यह कानून पूर्णतः सांप्रदायिक है, जो सिर्फ पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों को ही भारत की नागरिकता देने का प्रावधान सुनिश्चित करता है। साथ ही, यह कानून अन्य पड़ोसी देशों जैसे म्यांमार और श्रीलंका के अल्पसंख्यकों को सीधे तौर पर अपने दायरे से बाहर रखता है।    


ज्ञात हो कि पड़ोसी देशों के उत्पीड़ित प्रवासी लोगों को धार्मिक आधार पर नागरिकता देने को लेकर यह कानून पहले से ही कुख्यात है। तीन देशों के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के पीछे भाजपा की मंशा पूरी तरह से सांप्रदायिक है, क्योंकि म्यांमार और श्रीलंका को इस कानून के दायरे से दूर रखा गया है। ध्यान देने की बात है कि इन दोनों देशों में मुसलमान उत्पीड़ित समुदाय हैं। इससे साफ हो जाता है कि यह कानून सांप्रदायिक उद्देश्य के साथ लाया जा रहा है, जो यह भी प्रदर्शित करता है कि भाजपा सरकार के लिए अन्य पड़ोसी देशों के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों का कोई भी महत्त्व नहीं है।

यह कानून भारतीय संविधान के धर्म-निरपेक्षता के सिद्धान्त के भी विरुद्ध है, जहां पर यह बात सुनिश्चित की गयी है कि धर्म के आधार पर किसी समुदाय या व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता, और इसलिए यह कानून असंवैधानिक है। केवाईएस सबसे अपील करता है कि इस कानून के खिलाफ एकजुटता बनाएं रखें और लगातार हो रहे विरोधों और संघर्षों को मजबूत करें।



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