पूर्वांचल की सिहायत में वी के सिंह पर कवायद Exercise on VK Singh in the help of Purvanchal





पूर्वांचल भवन को लेकर गाजियाबाद के सांसद पर पूर्वांचलियों में तकरार

                                                          सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

गाजियाबाद। पूर्वांचल के लोगों में पूर्वांचल भवन सिर फुटौव्वल का केंद्र बनता जा रहा। कई गुटों में बंटे पुरब के लोगों में सबसे ज्यादा गाजियाबाद सांसद वी के सिंह केंद्रबिन्दू बने हुए हैं। पिछले दिनों छठ पूजा के अवसर पर जनकपुरी छठ घाट पर सांसद वी के सिंह के सम्मान में लगाये गये पोस्टर को एक गुट के कुछ लोगों द्वारा फाड़ दिया गया था और फटे पोस्टर को एक नाले में डाल दिया गया था। इस घटना की जानकारी सांसद को भी मिल गई थी। हालांकि इस मामले में दूसरे गुट के लोगों द्वारा दो लोगों के खिलाफ डीएम को शिकायत की गई थी तथा एफआईआर भी दर्ज होने की जानकारी मिली थी। अब साहिबाबाद क्षेत्र में जनकपुरी पुरबिया सियासत का आखड़ा बनता जा रहा है। 

पिछले दिनों एक गुट ने 16 नवंबर को एक मीटिंग कर गाजियाबाद सांसद पर पूर्वांचल भवन के नाम पर पूरब को लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था तथा इसके खिलाफ धरना - प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। इस गुट का कहना है कि जब पूर्वांचल भवन का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा एक वर्ष पूर्व कर दिया गया साथ ही सांसद वी के सिंह ने चुनाव से पूर्व ही इस भवन का निर्माण कराने का आश्वासन दिया, फिर आज तक भवन का निर्माण क्यों नहीं हो पाया। लोगों का तो याहां तक कहना है कि अभी तक भवन के लिए भूमि भी निश्चित नहीं की गई है। पिछले दिनों अर्थला में कैलाशवती इंटर काॅलेज के पास एक भूमि पर पूर्वांचल के लोगों ने पूर्वांचल के लिए निश्चित की गई भूमि बता कर वहां एक मीटिंग करने की व्यवस्था की थी, लेकिन पुलिस ने आकर मीटिंग को समाप्त तो कराया ही कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की बात भी सामने आई थी। बताया जाता है इस भूमि पर अर्थला गांव के कुछ लोगों ने विवाद बता इस तरह की कोई भवन बनाने का विरोध कर रहे है। 

दूसरी तरफ एक गुट वी के सिंह को पूर्वांचल का मसीहा बता कर पूर्वांचल भवन उनके द्वारा ही बनाये जाने का प्रचार कर रहा है। इसी मामले में आज भी जनकपुरी में एक बैठक हुई है जिसमें पिछले दिनों वीके सिंह के खिलाफ बोलने वालों को लेकर निंदा प्रस्ताव पास किया गया तथा देर - सवेर पूर्वांचल भवन के निर्माण को लेकर विश्वास व्यक्त किया गया। आज फिर एक पूर्वांचल नव निर्माण मोर्चा का गठन किया गया। आखिर अब यह समझ में नहीं आ रहा है कि कई गुट में बंटा पूर्वांचल किसकी लड़ाई लड़ रहा है। ऐसी स्थिति में पूर्वांचल के लोगों का भला होता नहीं दिख रहा।  

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