खुल्लम - खुला : पप्पू पास हो गया .................... ! Pappu passed ....................!




                                           खुल्लम - खुला
चलो जैसे भी सही पप्पू पास तो हो गया। अब तो कोई भी ‘पप्पू’ पर काॅमेंट करने से पहले कई बार सोचेगा। ज्यादा काॅमेंट वहीं करते है या तो जो खुद पप्पू होते या पप्पू जैसे ही होते है। मेरे समझ में यह नहीं आज तक आया कि पप्पू एक नाम का अर्थ क्या और कैसे बना? लोगों को पप्पू कहते सुना तो मुझे भी लगा कि ‘ पप्पू ’ कोई काॅमेडी का शब्द है। मुझे उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास भी है कि कवि कुमार विश्वास भी ‘ पप्पू ’ शब्द का शाब्दिक अर्थ नहीं बता पायेंगे। कहने को तो किसी को कुछ भी व्यंगात्मक नाम रख कर पुकार दें, हंसी तो आ जायेंगी, लेकिन उसका अर्थ नहीं निकल पाता है। जब हम लोग छोटे थे तो गांव में दलित परिवार में टीमल, ढोड़ा, दहतर, गरीब, विदेशी, बहारन जैसे नाम सुनने को मिलते थे। बच्चों के छठी कक्षा में एक पाठ में एक लड़के का नाम घसीटाराम है। जब उसका साथी उससे ऐसा नाम होने का कारण पूछता है तो जवाब में घसीटाराम कहता है - मेरे मां के पांच पुत्र पैदा हुए। इसमें से एक भी बच्चा जींदा नहीं रहा। मां ने एक ज्योतिष से इसका कारण पूछी तो उसने बताया कि अब जब भी कोई बच्चा पैदा हो तो पैदा होते ही उसे जमीन पर रख कर राम का नाम लेकर पैर पकड़ घसीट दीजिएगा। मेरे जन्म लेते ही ऐसा ही किया गया। तभी से मेरा नाम घसीटाराम पड़ गया। ’ अभी तक ‘पप्पू’ नाम का कोई कारण स्पष्ट नहीं हुआ। हां, शुरू में चुनाव आयोग मतदान में लोगों के भागीदारी बढ़ाने के लिए कुछ समय तक ‘ पप्पू वोट नहीं देता’ व्यंगात्मक श्लोगन प्रचार कराया था, तभी से पप्पू नाम चर्चा में आया और अनेक तरह के इस पर काॅमेडी बनने लगां ऐसा मेरा मानना हैं। उस दौरान मैं भी अपने ‘खुल्लम - खुला’ काॅलम में ‘पप्पू वोट नहीं देता पर व्यग लिखा था। बाद में तो भक्तों ने ‘पप्पू’ शब्द का ऐसा प्रचार किया कि यह सबके जुबान पर आ गया। अब तो भक्तों  और उनके भगवान दोनों को पता चल गया कि ‘ पप्पू पास हो गया।’ राजनीति भी बड़ी विचित्र जाल है। यह जाल दिन पर दिन और बड़ा आकार लेकर अली, महाबली, राम - रावण, पांडव- कंस, नाना - नानी, दादा - दादी, मां - बाप, ....................... आदि की सीमा तक फैलता जा रहा है। आम जन भी आज के राजनीति में बड़े ही उत्सुकता दिखा रहे है। कवि तो सबसे ज्यादा आनन्द आज - कल के मुशायरे व कवि सम्मेलनों में परोस रहे है। एक जगह एक कवि मंच पर कविता सुनाते हुए लोगों को गुदगुदा रहे थे। उन्होंने कहा कि यूपीए शासन में सोनिया गंाधी ने किसानें के सभा में कहा कि आप सबका फसल इस साल बर्बाद हो गया है, इसलिए सभी को फसल के बदले मुआवजा दिया जायेगा। किसानों ने आपस में सौ - सौ रूपए जोड़ कर सोनिया गांधी के पास ले गये और बोले - ‘मैडम, यह हम सब किसानों के तरफ से आपके लिए मुआवजा है, क्योंकि आपका भी तो फसल बर्बाद  हो गया है।’ कवि जी फसल तो बर्बाद होते - होते आबाद हो गया अब क्या कहोंगे? ध्यान रखना भक्तों जिसे समझ रहे हो पप्पू, वही चलायेगा अब चप्पू । हम भी खामोश होकर देख ही रहे हैं।  
संजय त्रिपाठी  



Share on Google Plus

0 comments:

Post a comment