डीयू के एम.फिल. व पी.एचडी. कोर्सेज के आवेदक छात्रों का दाखिला प्रक्रिया के खिलाफ आक्रोश जारी DU's M.Phil. And Ph.D. The applicants of the courses are resentful against the admission process.



  • एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांग छात्रों के लिए यूजीसी क्राइटेरिया में 5 प्रतिशत छूट भी नाकाफी
  • शोध विषयों की  प्रवेश परीक्षा में 50 प्रतिशत से अधिक अंक लाने के क्राइटेरिया को वापस करवाने का संघर्ष जारी रहेगाः केवाईएस


          
नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  डीयू के एम.फिल. व पी.एचडी. कोर्सेज की भेदभावपूर्ण दाखिला प्रक्रिया के खिलाफ आवेदक छात्रों का संघर्ष दबने का नाम नहीं ले रहा है। इसके खिलाफ आज दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस में आर्ट्स फैकल्टी पर क्रांतिकारी युवा संगठन(केवाईएस) कार्यकर्ताओं सहित अन्य संगठनों एवं छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जाहिर किया।
ज्ञात हो कि दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध विभिन्न विभागों में एम.फिल. व पी.एचडी. दाखिला प्रक्रिया जुलाई माह में शुरू की गई थी, जिसपर बाद में रोक लगा दी गयी।  दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस सत्र 2018-19 के एम.फिल. व पीएच.डी. दाखिलों में यूजीसी (एम.फिल.,पीएच.डी उपाधि प्रदान करने हेतु न्यूनतम मानदंड और प्रक्रिया) विनियम, 2016 में निर्धारित नियमों के अनुसार दाखिला शुरू किया था, परन्तु नए नियमों के अनुसार बहुसंख्यक छात्र इंटरव्यू के लिए अयोग्य साबित हो गए थे, परिणामस्वरुप अधिकतर सीटें खाली रह जाती।  इन नियमों के अनुसार सभी विभागों के दाखिलों में एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांग छात्रों के लिए भी एक ही कटऑफ क्राइटेरिया था। आरक्षण के संवैधानिक नियमों के उल्लंघन, बड़ी संख्या में छात्रों की छटनी के विरोध में जब छात्रों ने आवाज उठाई और कोर्ट के समक्ष अपील की तब नई दाखिला प्रक्रिया पर रोक लगायी गयी।

छात्रों के लगातार विरोध के दबाव में 2 महीने के अंतराल के बाद यूजीसी ने 2016 के नियमो में एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांग छात्रों के लिए 5 प्रतिशत की छूट की घोषणा की है, परन्तु यह भी नाकाफी साबित हो रही है। प्रवेश परीक्षा देने वाले अधिकतर एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांग छात्र अभी भी इंटरव्यू के लिए अयोग्य है और बहुसंख्यक जनरल केटेगरी के छात्रों को भी कोई राहत नहीं मिली है।  2016 के नियमों के लागू होने से एम.फिल. व पीएच.डी. दाखिलों जनरल, एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांग सभी छात्रों की संख्या पर भारी असर पड़ रहा है।

इस मुद्दे पर केवाईएस नए नियमों को पूर्ण रूप से वापस कर, पुराने नियमों से दाखिले शुरू करने की मांग करता है। साथ-ही-साथ सरकार की छात्र-विरोधी मंशा के खिलाफ आन्दोलन जारी रखने का संकल्प लेता है। 



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