खुल्लम - खुला: कमजोर की लुगाई, गांव भर की भौजाई




                                                            खुल्लम - खुला

मैं अभी बैठ कर आज की राजनीति पर सोच ही रहा था कि ठेकेदार जी धमक पड़े। राम - दुआ के बाद मैने पूछा ‘ आज कल तो राजनीति में खूब खींचड़ी पक रही है। लगता है जुगल जोड़ी इस बार भी 2014 जैसा ही कोई नया करनामा कर दिखायेंगीे। ’ ठेकेदार जी ने तपाक से जवाब देते हुए बोला ‘ हां, ऐसा ही लगता है। इनके सामने कोई विकल्प ही नजर नहीं आ रहा हैं। विपक्षी सब अपने में मग्न है। सबको लगता है कि प्रधानमंत्री के लिए वे ही सबसे ज्यादा सटीक नेता है। इनकी इसी लड़ाई ने तो बीजेपी का सीना चैड़ा कर दिया है।’ कुछ छण के लिए दोनों ही चुप हो गए। फिर ठेकेदार जी ने बीजेपी के चुनावी मोड को राजनीतिक पैतरा बताते हुए कहा कि लोगों को अपने पक्ष में बांधने में बीजेपी को महारथ हासिल है। विपक्षी लाख जोर लगा रहे है, लेकिन उनका ग्राफ जरा सा भी नीचे नहीं गिर रहा है। अभी भी देश की आम जनता में ‘ फिर एक बार, मोदी सरकार ’ का नारा गूंज रहा है। अभी भी लोगों में मोदी का जादू सर चढ़ कर बोल रहा है। यह है राजनीतिक गेम, यह है जनता को मार कर भी कराहने से रोकना। यही कारण है कि जोशी, अडवानी, जसवंत सिन्हा, शत्रुधन सिन्हा जैसे पार्टी के विरोधी नेता मौन के अलाव कुछ कर नहीं पा रहे है। कुछ तो चिढ़ कर दूसरे विपक्षी पार्टियों के मंच साझा कर रहे है। बहुत पहले ऐसा कदम कारगर होता था, जब अपनी ही पार्टी का नेता बगावती सुर अलापता था। अब तो कोई पर्क ही नहीं पड़ रहा है। महंगाई से आम जनता त्रस्त है, पेट्रौल - डीजल के भाव आसमान छू रहे है, गैस सिलेण्डर की मंहगाई लोगों को मार रही है, हर वस्तु का दाम दिन - पर - दिन बढ़ रहा है। विपक्षी पार्टी चिल्ला रहे है, हल्ला - गुला मचा रहे है, लेकिन मोदी - अमीत अपने मस्त चल में आगे बढ़ रहे है। देखने से ऐसा लगता है कि सब परेशान है। जोकतंत्र पर चारो तरफ से प्रहार हो रहा है, फिर भी दोनों लोकतंत्र को बचाने के लिए रात - दिन शपथ खा रहे है। बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष तो कहता है कि 2014 का चुनाव अखलाक ने जीताया यह चुनाव विपक्षी अपने बयानों व कारनामों से ही जीता देंगे। आज देख लो पार्टी का छुटभैया नेता या कार्यकर्ता भी पूरी जोश में पार्टी के पक्ष में सोशल मीडिया पर खड़ा दिख रहा है। उसे लगता है कि मोदी को पांच साल और मिल गया तो 15 लाख वाली जुमला सच हो जायेगी।’ मैने ठेकेदार जी को टोकते हुए कहा कि आप तो हमेशा बीजेपी के पीछे ही पड़े रहते है, आखिर बात क्या है। कुछ दूसरे पार्टियों की भी बात कर लीजिए। ठेकेदार जी एक बार फिर भड़क गये। ‘ तुम जानते हो कि मैं बीजेपी के ही पीछे पड़ा रहता हूं। तुम ठहरे पत्रकार, जब भी सोचोगे, उल्टा ही सोचोगे। जो देख रहा हूं वह कह रहा हू। आज सुबह पार्क में सैर करने गया तो एक सज्जन मिल गये। उन्होंने मिलते ही कहा ‘ देखिए क्या जबाना आ गया है। जो अच्छा काम करता है, लोग उसी के पीछे पड़ जाते है। आज देश में हाईवे से लेकर गांवों तक सड़क धड्डल्ले से बन रहे है। सबको हर तरह की सुविधा समय पर मिल जा रही हैं। किसी भी महकमें में जाइये कही रिश्वत नहीं ली जाती। सरकारी कर्मचारी बिना रिश्वत के काम ही नहीं करते थे, वे भी आज कल रिश्वत मांगने से डर रहे है। उत्तर प्रदेश में योगी के एनकाउंटर से बदमाश प्रदेश छोड कर ही भाग गये है। विदेशों में आज अपने देश का गर्व से लिया जाता है। फिर भी लोग मोदी के पीछे पड़े हुए है।’ उनकी बात सुनकर मैं हैरान हो गया। जान न पहचान मैं तेरा मेहमान वाली कहावत मेरे साथ हो गई । उस बंदे को मैं जानता भी नहीं था, लेकिन वह मोदी के करनामों से मुझे खुश करने में लग गया। मैं ठेकेदार जी को बीच में टोकते हुए बोला - ठीक ही तो कह रहा है। मोदी को जवाब सारे विपक्षी एक होकर ही दे सकते है। अब भी जनता के बीच मोदी का जलवा कायम है। ठेकेदार जी हंस पड़े कुछ देर रूक कर बोले ‘ विपक्षी पार्टियों के महागठबंधन की चर्चा जोरों पर चल रहा है। लेकिन इन्हें एक करना मेढ़को को तराजू पर तौलने जैसा हैं। एक को तराजू पर रखो तब तक दूसरा कूद कर नीचे चला जायेगा। अखिलेश कहते हैं कि मैं बड़ा, मायावती जी कहती है कि सम्मानजनक सीट पर ही समझौता होगा। कुछ कांग्रेस को आगे रखने को तैयार ही नहीं है। कांग्रेस की हालात तो ‘ कमजोर की लुगाई, गांव भर की भौजाई ’ जैसी हो गई है। राहुल को कोई नेता मानने को तैयार ही नहीं है। भला कांग्रेस कैसे नीचे गिर कर सबको उठायेगी। लेकिन राजनीतिक पैतरा कोई भी गुल खिला सकती हैं । 


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