सावधान ! गहरी साजिश है बुल्ली बाई ऐप Precaution ! Deep conspiracy is Bulli Bai app








                                                                 संजय त्रिपाठी 


देश में नफरत फैलाने का साजिश दिन - पर - दिन बढ़ता जा रहा है। इस मामले में सोशल मीडिया का अहम रोल है। वैसे भी देश कोरोना महामारी व राजनीतिक अदूरदर्शिता के कारण गंभीर स्थिति से जूझ रहा है। विकास की रफ्तार धीमी पड़ती जा रही है। आवाम संधर्ष से जूझ रहा तो कुछ चंद अमीरों की संपत्ति बेतहाशा बढ़ती जा रही है, ऐसे में नफरत देश को बर्बाद कर देगा। जब भी आपसी भाईचारा खत्म होता, मनों में द्वेष पनपने लगता है, धार्मिक उन्माद बढ़ जाता है, एक समुदाय दूसरे का दुश्मन बन जाता है तब विकास की गति अवरूध हो जाती है, दंगा - फसाद बढ़ जाता है और ऐसे हालात में गृहयुद्ध की स्थिति बन जाती है। क्या आज देश को अस्थिर करने के लिए कुछ लोग ऐसे साजिश रच रहे हैं ? कुछ वर्ष पूर्व कई राज्यों में कई अलग - अलग मुद्दों को लेकर सरकार व आम जन के खिलाफ साजिश शुरू हुआ जिसका परिणाम आज भी देश भुगत रहा और अभी कबतक इससे जूझना पड़ेगा कोई तय नहीं है। 80 के दशक में पंजाब जल रहा था। 

सरकार को इसे रास्ते में लाने में बहुत कुछ खोना पड़ा। देश के कई राज्यों में नक्सली हिंसा को आज भी सरकार झेल रही, वहां की आवाम को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि आजादी के सामय से ही हिन्दू - मुस्लिम में धार्मिक विवाद होता रहा है, लेकिन पहले इतनी नफरत नहीं थी जितनी कुछ वर्षो से देखने को मिल रहा। खासतौर से आज मुस्लिम वर्ग सबसे ज्यादा नफरत की नजरिये से देखा जा रहा। सोशल मीडिया में दो वर्ग इस तरह बंट गए हैं जिसमें एक वर्ग मुस्लिमों से सिर्फ नफरत से भरा पोस्ट ही डालता है। हालांकि इस पोस्ट के सहारे एक पार्टी की सरकार बनती व बिगड़ती है। इस पार्टी का मीडिया सेल सिर्फ मुस्लिम धर्म, मुगल शासक और जवाहर लाल नेहरू को सबसे ज्यादा निशाने पर रखती है। दोनों समुदायों में घृणा का आलम यह है कि सार्वजनिक जगहों पर मुल्ला, मुस्लिम टोपी, नमाज पढ़ते लोग देख हिन्दू वर्ग की नजरिया ही बदल जाती है। वे मुस्लिमों को असहज दृष्टि से दखने लगते हैं, वही जहां मुस्लिम वगे ज्यादा संख्या में हैं वहां साधु - महात्मा को देख मुस्लिम वर्ग असहल महसूस करने लगता है। इस हालात के लिए कुछ संगठन, कुछ उन्मादी लोग और कुछ अपना स्वार्थ सिद्ध करने वाले लोगों को जिम्मेदार माना जा सकता है। 

सभी जानते हैं कि आज कल कहानी, कविता, चुटकुला, हास्य प्रसंग और कुछ इतिहासिक अप्रमाणित घटनाओं का उल्लेख अपने पोस्ट के माध्यम से  मुस्लिम समुदाय के खिलाफ करके नफरत फैलाया जा रहा है। इसी कड़ी का एक हिस्सा लग रहा है ‘ बुल्ली बाई ’ ऐप । इस ऐप के माध्यम से मुस्लिम समुदाय की महिलाओं की जानकारी और इजाजत के वगैर उनकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें निलामी के लिए इंटनेट पर डाला जा रहा जो एक गहरा साजिश के तरफ इशारा कर रहा है। इसमें अभी तक चार लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है जिसमें उत्तराख्ण्ड की एक 18 साल की लड़की भी शामिल है। इसी तरह का एक मामला पिछले वर्ष जुलाई में भी सामने आया था जो सुल्ली डील के नाम से चर्चीत हुआ था। लेकिन इस मामले में कोई खास कार्रवाई नहीं हुई थी। हालांकि इस बार मुंमई पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए अभी तक इस मामले में चार युवकों को गिरफ्तार किया है जिसमें पहली गिरफ्तारी  बेंगलुरु से विशाल कुमार नामक छात्र की की गई। दूसरी गिरफ्तारी उत्तराखण्ड की 18 वर्षीय श्वेता नामक एक गरीब युवती की हुई थी जिसके माता - पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है। लड़की इंटरमीडियट पास है और 3 बहनों व एक भाई की जिम्मेदारी इसी के कंधे पर है। आर्थीक रूप से यह परिवार बहुत मकजोर है।  इसी तरह तीसरी गिरफ्मारी भी उत्तराखण्ड के कोटद्वार से मयंक रावत की हुई है। ऐप बनाने वाला युवक दो दिन पूर्व आसाम से पकड़ा गया है जिसका नाम नीरज विश्नोई है। 

अब तक की गई गिरफ्तारियों में सभी टीनउजर्स है और सबकी आर्थिक पृष्ठभूमि बहुत ही कमजोर है। सभी बहुसंख्यक समुदाय से भी ताल्लुक रखते हैं। कहां जा रहा है कि देश के कई राज्यों नई दिल्ली, मुंम्बई, कर्नाटक, कोलकता, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड आदि राज्यों में बुल्ली बाई ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं मुबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नगराले का कहना है कि इस ऐप के माध्यम से सिखों और मुस्लिमों में नफरत फैलाने का कार्य किया जा रहा है। सिखों और मुस्लिमों में नफरत फैलाने के इरादे से कई अकाउंट बनाये गए हैं। उन्होंने बताया है कि ट्विटर पर बुल्लीबाई, सेगओएक्स11, जाटखालसा, जाटखालसा7, सीख-खालसा 11, जैसे अकाउंट बनाया गया है । इन अकाउंट का इस्तेमाल इस मामले में किया जा रहा था। जांच में यह भी पता चला कि एक खालसा सुपरीमैसिस्ट ‘ बुल्ली बाई ’ ऐप का फाॅलोवर है। नगराले का कहना है कि सोशल मीडिया मंच पर कई अकाउंट बनाये गए, ताकि सिख और मुस्लिमों के बीच विवाद पैदा किया जा सके। 

अभी तो जो भी जांच सामने आया है उसमें साफ हो रहा है कि ऐसे युवको का इस्तेमाल कर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिन्दुओं के बाद अब सिखों में घृणा पैदा किया जाए। अब पुलिस का यह दायित्व बनता है कि मुखोटे के पीछे छिपे असली गुनाहगार का चेहरा सामने लाये ताकि लोगों को पता चल सके अमन पसंद देश में नफरत का खेल खेलने वाले सौदगर कौन हैं ? समाज में ऐसी जहरीली सोच पैदा करने वालों को सामने लाना ही इस ममाले को सही अंजाम पर पहुचाना होगा साथ ही राजनीतिक दलों का भी दायित्व अब ऐसे मामलों में बढ़ जाता है। 






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