खुल्लम - खुला : चुनाव आ गया, विसात बिछा गया !

                                                     खुल्लम - खुला 


                                                       संजय त्रिपाठी 




सतरंज के बिसात पर मोहरे बैठाये जा रहे हैं । सब अपनी - अपनी चाल की तैयारी कर रहे। कौन किसे मात देगा यह तो समय बतायेगा, लेकिन चाल तो सब चलने को तैयार बैठे हैं। दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही तो जाता है । यूपी बीजेपी के लिए प्रतिष्टा का प्रश्न है, जिसे वह किसी भी कीमत पर बाजी पलटने नहीं देगी। लखीमपुर खीरी ने थोड़ा किरकिरी तो किया है पर योगी की पहल ने संभाल लिया है। चुनाव तक सब कुछ मिल जायेगा या आश्वासन का दौर तो चलाया ही जायेगा। फिलहाल पीड़ितों के कुछ तो गम कम हुए हैं । हालांकि हाईकोर्ट ने इस पर भी सवाल उठा दिया है, फिर भी मामला सलट जायेगा। यह घटना भी चुनावी परिदृश्य में किस पर असर डालेगा यह कहना अभी जल्दीबाजी होगा, पर विपक्षी सभी इसे अपना हथियार बनाने में लगे है। कांग्रेस की प्रियंका झाड़ू की जो चाल चली है वह असर तो दिखा रहा पर लड़ाई अभी बहुत लंबी है। नजरबंदी भी कांग्रेस के लिए कारगर हथियार बना तो पर  धारदार नहीं है। अखिलेश भी सभी मोहरों को परख कर चाल की तैयारी कर रहे वहीं मायवती भी मैदान में कूद कर यह एहसास करा दी है कि हाथी बैठा है रूका नहीं है। हाथियों के बीहड़ के बीच अपनी रैली में उन्होंने साफ कहा कि लोगों की भीड़ देख बसपा को कम न आंके वह आज भी छक्का छुड़ाने के लिए काफी है। पर उनका सबसे ज्यादा जोर कांग्रेस शासन में बहुजन समाज की उपेक्षा पर ही रही। वर्तमान सरकार पर कभी भी न तो वे हुंकार भरी न ही उनका हाथी चिघाड़ मारा। 

विपक्षियों को रोकने की रणनीति राहुल के लखनऊ पहुंचने तथा भूपेश बघेल के धरने पर बैठने के कारण धाराशाही हो गई। सरकार ने शाम होते - होते सभी पार्टियों के पांच जनों के साथ लखीमपुर खीरी की दर्शन की इजाजत दे देती है। पहले दो मुख्यमंत्रियों और प्रियंका के साथ राहुल आंसू पोछने का काम करते हैं, उसके बाद अखिलेश और बसपा के सतीश मिश्रा भी हमदर्दी दूर करने जाते हैं। भला संजय सिंह कहा पीछे रहने वाले थे, पहली किसान पर थार यूएसवी गाड़ी चढ़ाने का वीडियो तो उन्होंने ही जारी किया था। अब दंगल का लाइव टेलिकास्ट गोदी मीडिया चैनल भी दिखाने में लगे पर उसमें भी कई मोड़ आये जो दिखाया कि आखिर गोदी मीडिया होती क्या है ? चलो देर आये दुरूस्त आये। सुप्रीम कोर्ट के सख्ती के बाद केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा भाजपा नेता आशीष मिश्रा को यूपी पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। पर अभी प्रधानमंत्री इस घटना पर दो शब्द नहीं बोल पाये हैं जबकि घटना के बाद ही गरीबों को मकान बांटने और उनसे हंस - हंस कर बाते करते रहे। भला देश का किसान इतना बुरा हो गया है जिसके लिए एक शब्द भी प्रधानमंत्री के मुंह से नहीं निकल पा रहा है। यूपी में सतरंज का बिछात अभी क्या - क्या गुल खिलायेगा यह देखना बाकी है। नजरे खोल कर रखे कोई नई चाल देखने को मिल सकती है । हम भी अपनी नजर खोल ही रखें हैं।

 राम - राम जी!   




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