गोपालगंज: 6 विधानसभा क्षेत्रों में भारी उलट - पलट की संभावना Gopalganj: Major reversal in 6 assembly constituencies



  • हथुआ - कुचायकोट में कांटे की टक्कर, गोपालगंज में हुआ त्रिकोणीय मुकाबला 

  • बैंकुंठपुर और बरौली में बदलाव की लहर, भोरे बन सकता माले का गढ़

                                         संजय त्रिपाठी  






गोपालगंज । संसदीय क्षेत्र गोपालगंज के छह विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे चरण 3 नवम्बर को होने वाले मतदान को देखते हुए सभी प्रत्याशी हर स्तर पर अपनी ताकत झोंक रहे हैं। चुनावी समर में सभी योद्धा अपनी कोई भी दाव चुकना नहीं चाहते। एक तरफ प्रत्याशियों में बेचैनी नजर आ रही है, वहीं इस बार मतदाता पूरी तरह शांत दिख रहा। मतदाताओं की शांति प्रत्याशियों के बेचैनी को और बढ़ा रहा है। इस बार सभी 6 विधानसभा क्षेत्रों 99 - बैंकुंठपुर, 100 - बरौली, 101 - गोपालगंज, 102 - कुचायकोट, 103 - भोरे और 104 - हथुआ में हर बार से अलग भारी उलट - पलट की संभावना नजर आ रही है।  जिले में कुल 92 प्रत्याशी 6 विधानसभा सीट के लिए मैदान में है।

99 - बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र 

गोपालगंज जिले की बैकुंठपुर विधानसभा सीट पर दूसरे चरण में 3 नवंबर को वोटिंग है। 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मिथिलेश तिवारी को यहां से विजयी हुए थे। 2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन से आरजेडी ने प्रेम शंकर प्रसाद को अपना कैंडिडेट बनाया है। जबकि बीजेपी ने एक बार फिर से मौजूदा विधायक मिथिलेश तिवारी पर ही भरोसा जताया है।

देखा जाए तो पिछले 5 विधानसभा चुनावों में बीजेपी यहां से 2015 में पहली बार सफलता प्राप्त की थी। 2015 के विधानसभा चुनाव में यहां से बीजेपी के मिथिलेश तिवारी जेडीयू के मंजीत कुमार सिंह को 14 वोटों से हराया था। 2015 के विधानसभा चुनाव जेडीयू और भाजपा एक दूसरे के विरोध में चुनाव लड़े थे। लेकिन इस बार दोनों दल गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में यहां बीजेपी और महागठबंधन में कांटे की टक्कर तो नजर आ रही, लेकिन इस बार महागठबंधन यहां बीजेपी पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। 

बैकुंठपुर विधानसभा सीट पर यादव, मुस्लिम, राजपूत की संख्या अधिक और निर्णायक है। 2020 के विधानसभा चुनाव 3.16 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिसमें 1.63 लाख पुरुष और 1.53 महिला मतदाता हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में महिला मतदाताओं की वोटिंग परसेन्टज पुरुषों से अधिक था। इस बार कुल बूथें की संख्या 445 हैं तथा 13 उम्मीदवार मैदान में है। जानकारों की माने तो यादव - मुस्लिम गठजोड़ के कारण इस बार यह सीट मिथलेश तिवारी को निकालपाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। 

                          100 - बरौली विधानसभा क्षेत्र 

यहां राजद और भाजपा की सीधी टक्कर नजर आ रही है। 2015 के विधानसभा चुनाव आरजेडी नेतमउल्ला यहां से चुनाव जीते थे। 2020 के विधानसभा चुनाव आरजेडी ने रियाजउल हक, और भाजपा ने रामप्रवेश राय को अपना कैंडिडेट बनाया है। जैसे - जैसे चुनाव की तिथि नजदीक आ रही है यहां दोनों प्रत्याशियों के टकराव की स्थिति बढ़ती जा रही है। 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर नजर डाले तो इस सीट पर अभी तक 16 बार चुनाव हुए हैं जिसमें सबसे ज्यादा 12 बार कांग्रेस और 4 बार भाजपा विजयी रही है। 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद के नेतमउल्ला ने भाजपा के प्रत्याशी राम प्रवेश राय को 504 वोटों से हराया था। जबकि राम प्रवेश राय ने 2000, फरवरी और अक्तूबर 2005, 2010 के विधानसभा चुनाव में नेतमउल्ला को हराया था। पिछले 5 चुनावों में चार बार भाजपा यहां से सफल रही है। 

हालांकि बीजेपी की इस सीट पर पकड़ मजबूत मानी जाती है, लेकिन इस बार समीकरण कुछ बदला सा नजर आ रहा है। वैसे जातिय समीकरण की बात करें तो मुस्लिम और यादव वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। राजपूत, ब्राह्मण,कोइरी वोटर भी इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जमीनी सच्चाई यह है कि मुस्लिम - यादव गठजोड़ यहां भी हावी है, लेकिन यहां के अधिकांश वोटर नेतमउल्ला से नाराज चल रहे हैं। राजद ने यहां से अपना प्रत्याशी रियाजउल हक को बना कर वोटर को मनाने का प्रयास किया है। वैसे भाजपा के रामप्रवेश राय की पलड़ा यहां भारी नजर आ रहा है। 

इस सीट पर कुल वोटरों की संख्या करीब 3 लाख है जिसमें 1.54 लाख पुरूष तथा 1.45 लाख महिला मतदाता है। यहां कुल बूथों की संख्या 430 है और इस सीट से 18 प्रत्याशी अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। 

                     101 - गोपालगंज विधानसभा क्षेत्र 

गोपालगंज विधानसभा क्षेत्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है। इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। गोपालगंज सीट पिछले कुछ विधानसभा चुनाव से बीजेपी के खाते में है। गोपालगंज विधानसभा सीट से सुभाष सिंह मौजूदा विधायक हैं।

साल 2015 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सुभाष सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के रियाजुल हक उर्फ राजू को गोपालगंज सीट से एक कड़े मुकाबले में 5074 वोटों से हराया था। सुभाष सिंह की इस सीट पर काफी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

इस सीट पर बीजेपी की ओर से सुभाष सिंह और कांग्रेस की ओर से आसिफ गफूर को टिकट दिया गया है। वहीं बसपा से साधू यादव ने ताल ठोक कर मुकाबले को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। जानकारों की माने तो इस बार सुभाष सिंह आत्मघात का शिकार हो सकते हैं। संघ और पार्टी की एक धड्डा उनके खिलाफ अंदरूनी मोर्चा खोल रखा है । हालांकि साधू यादव के मैदान में आने और उनकी चुनावी रैली तथा मतदाताओं के बीच किये जाने वाले वायदों को देखे तो वह बीजेपी - कांगे्रस के बीच की मुकाबला को खीच कर त्रिकोणीय बना दिए हैं। कहा जा रहा है कि यहां से एक बार विधायक और सांसद रहते हुए उनके द्वारा किये गये कार्यो से जनता का झुकाव उनके तरफ बढ़ता जा रहा है।

गोपालगंज विधानसभा सीट पर 2015 में बीजेपी के सुभाष सिंह ने जीत हासिल की थी। तब सुभाष सिंह को 78491 वोट हासिल हुए थे। वहीं दूसरे नंबर पर रहे आरजेडी के रियाजुल हक उर्फ राजू को 73417 वोट मिले थे। 2015 के विधानसभा चुनाव में गोपालगंज में 298694 मतदाता थे। वहीं कुल 172533 लोगों ने मतदान किया था। 2015 के विधानसभा चुनाव में यहां 57.79ः मतदान हुआ था। 2015 में बीजेपी को 45.49ः और आरजेडी को 42.55ः वोट मिले थे। इस बार इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 3.24 लाख है जिसमें पुरूष मतदाताओं की संख्या 1.63 लाख तथा महिला मतदाताओं की संख्या 1.61 लाख है। कुल मतदान बूथों की संख्या 482 है तथा यहां सबसे ज्यादा 22 प्रत्याशी मैदान में हैं।

गोपालगंज विधानसभा सीट पर बीजेपी की पिछले कुछ सालों से मजबूत पकड़ देखने को मिली है। अक्टूबर 2005, 2010 और 2015 के चुनाव में इस सीट से बीजेपी के सुभाष सिंह विजेता रहे हैं। वहीं दूसरे नंबर रियाजुल हक का भी इस सीट पर अच्छा दबदबा माना जाता है। फरवरी 2005 के चुनाव में बीएसपी की टिकट पर रियाजुल हक चुनाव जीते थे। इसके बाद अक्टूबर 2005 में बीएसपी से, 2010 और 2015 में आरजेडी की टिकट पर चुनाव लड़ते हुए दूसरे नंबर पर रहे थे। वहीं सुभाष सिंह 2000 के चुनाव में बीपीएसपी और फरवरी 2005 में एलजेपी की टिकट पर चुनाव लड़े और हार गए थे। 

                   102 - कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र 

कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र में दो बाहुबलियों की लड़ाई यहां के मुकाबले को रोचक बना रहा है। हालंकि 2015 के चुनाव में भी इन दोनों बाहुबलियों के बीच ही मुकाबला हुआ था जिसमें जदयू प्रत्याशी अमरेन्द्र कुमार पांडेय ने विजय प्राप्त की थी। 

2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से काली पांडेय, जेडीयू ने अमरेन्द्र पाण्डेय, लोजपा ने रवि पाण्डेय और रालोसपा ने सुनीता देवी को अपना कैंडिडेट बनाया है। कुचायकोट विधानसभा सीट पर दूसरे चरण में मतदान होंगे। 2015 के विधानसभा चुनाव यहां से अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय जीते थे।

अगर यहां के इतिहास पर नजर दौड़ाये तो 2015 में जेडीयू के अमरेन्द्र पाण्डेय लगातार दूसरी बार विधायक बने थे। तब उन्होंने लोजपा के काली प्रसाद पाण्डेय को 3 हजार वोटों से हराया था। अमरेन्द्र 2010 में भी विधायक बन चुके थे। यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद दोबारा अस्तित्व में आई थी। तब से यह तीसरा चुनाव होगा जहाँ कैंडिडेट अपनी किस्मत अजमा रहे हैं।

कुचायकोट विधानसभा सीट पर 3.22 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिसमें 1.67 लाख पुरुष मतदाता और 1.55 लाख महिला मतदाता हैं। इस सीट पर मुस्लिम, यादव और ब्राह्मण वोटरों की संख्या अधिक है। यहां कुल बूथें की संख्या 469 है तथा यहां से 13 प्रत्याशी मैदान में हैं। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार यहां जदयू और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच कांटे की टक्कर है। यह सीट ब्राह्मणों का गढ़ माना जाता है। हालांकि मुस्लिम - यादव का गठजोड़ तथा भूमिहार वोटरों का काली प्रसाद पांण्डेय के तरफ झुकाव होने से इस बार चुनाव की बाजी यहां पलट सकती है। अब देखना यह है कि अमरेन्द्र पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय इस सीट से अपनी हैट्रिक लगा पाते हैं या नहीं ? 

                           103 - भोरे विधानसभा क्षेत्र 

भोरे विधानसभा सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। 2020 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन से माले ने जितेन्द्र पासवान को अपना कैंडिडेट बनाया है। वहीं एनडीए गठबंधन में यह सीट जेडीयू के पास है। जेडीयू ने सुनील कुमार और लोजपा ने पुष्पा देवी पर भरोसा जताया है। 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से अनिल कुमार यहां से विधायक चुनें गए थे। 

2015 के विधानसभा चुनाव कांग्रेस यहां से विजयी हुई थी। तब कांग्रेस के अनिल कुमार ने बीजेपी के इंद्रदेव मांझी को 14 हजार वोटों से हराया था। मांझी 2010 में यहां से विधायक रह चुके थे। अभी तक इस सीट पर कुल 17 चुनाव हुए हैं जिसमें कांग्रेस को 9 बार जीत मिली है। 1985 के 2015 में कांग्रेस यहां अपना सूखा समाप्त किये था। पर 2020 में यह सीट महागठबंधन में माले के पास चली गई है।

2015 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 52.5 प्रतिशत वोट पड़े थे। जिसमें महिलाओं का मत प्रतिशत पुरुषों से काफी अधिक था। 2020 विधानसभा चुनाव में 3.38 लाख वोटर वोट करेंगे। जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 1.74 और महिला मतदाताओं की संख्या 1.63 लाख है। यहां कुल बूथों की संख्या 499 है और यहां से 11 प्रत्याशी अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। 

जातीय समीकरण की अगर बात करें तो इस पर कोइरी वोट बैंक काफी महत्वपूर्ण है। हालांकि हमेशा यहां जातिय समीकरण के अनुसार ही जीत हार तय होता रहा है। खासतौर से यह क्षेत्र फार्वाड और बैकवाॅर्ड की लड़ाई में अग्रणीय माना जाता रहा है। इस बार जानकारों के अनुसार यहां माले का खासी दबदबा नजर आ रहा है। लेकिन यहां सभी समीकरण चुनाव के एक दिन पूर्व धाराशही होने के अंदेशा भी जताया जा रहा है। 

                            104 - हथुआ विधानसभा क्षेत्र 

हथुआ विधानसभा क्षेत्र में चुनावी चर्चाएं खूब हो रही हैं। हथुआ सीट पर इस बार मुकाबला टक्कर का देखने को मिल रहा है। परिसीमन के बाद हथुआ विधानसभा सीट साल 2010 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह क्षेत्र मीरगंज विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आता था। इस सीट से जदयू के रामसेवक सिंह मौजूदा विधायक हैं, जिन्हें जदयू ने फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर जदयू के पास जीत की हैट्रिक लगाने का मौका है। हालांकि उन्हें टक्कर देने के लिए महागठबंधन की ओर से राजद ने राजेश कुमार कुशवाहा को मैदान में उतारा है। 
अगर पिछले चुनाव की बात करें तो यहां जदयू ने कब्जा किया। जदयू के रामसेवक सिंह को 2015 के चुनाव में जीत मिली। उन्होंने जीतन राम मांझी की हम पार्टी के उम्मीदवार महाचंद्र सिंह को 22,984 वोटों के अंतर से हराया था। रामसेवक सिंह को 57,917 वोट मिले थे, जबकि महाचंद्र सिंह के पक्ष में 34,933 वोट आए थे।

परिसीमन के बाद हथुआ सीट पर पहली बार 2010 के विधानसभा चुनाव में यह सीट जदयू के खाते में आई थी। जदयू के उम्मीदवार रामसेवक सिंह ने यहां से जीत हासिल की थी। 2010 के चुनाव में रामसेवक सिंह ने राजद के उम्मीदवार राजेश कुमार सिंह को 22,847 वोटों से मात दी थी। रामसेवक सिंह को 50,708 वोट मिले थे, जबकि राजेश कुमार सिंह के पक्ष में 27,861 वोट आए थे।

वैसे इस सीट पर राम सेवक सिंह की भारी पकड़ बताया जाता है। यहां कुल मतदाताओं की संख्या 3.03 लाख है जिसमें पुरूष मतदाता की संख्या 1.55 लाख तथा महिला मतदाता की संख्या 1.48 लाख है। यहां कुल बूथों की संख्या 438 है तथा 15 प्रत्याशी मैदान में ताल ठोक रहे है। पिछले कुछ दिनों से राम सेवक सिंह के तरफ से दिल्ली से एक युवाओं की नाट्य मंडली प्रचार में समां बांध रखा है। जहां भी इन युवाओं का दल अपना डांस और डाॅयलक्स बोलना शुरू करता हैं लोगों की हुजूम जुट जाती है। हालांकि शुरू में क्षेत्र के मतदाता राम सेवक सिंह के खिलाफ दिख रहे थे, जिससे लगता था कि राजेश सिंह का पलड़ा भारी हो रहा। लेकिन समय रहते उन्होंने अपने मतदाताओं पर पकड़ बनाया और इस बार अधूरे कार्यो को पूरा करने का आश्वासन देते हुए एक बार फिर विजय पताका फहराने के तरफ अग्रसर दिख रहे है। हालांकि राजेश सिंह भी जोरदार टक्कर दे रहे हैं। 


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