केवाईएस ने डीयू प्रशासन के ऑनलाइन परीक्षा करवाने के फैसले की कड़ी भर्त्सना की KYS strongly condemns DU administration's decision to conduct online examination





  • इस कदम को तुरंत वापस लेने की मांग की


  • लॉकडाउन के बाद कक्षाएँ सुनिश्चित करने और ऑफलाइन परीक्षा करवाने की करता है मांग


                                                         विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) डीयू प्रशासन द्वारा हाल ही में ऑनलाइन मोड में परीक्षाओं के आयोजन संबंधी जारी किए गए हालिया नोटिस की कड़ी भत्सना करता है। कल परीक्षा विभाग के डीन के द्वारा विभागाध्यक्षों को जारी किये गये इस नोटिस में उन्हें  विशेष रूप से रेगुलर, एसओएल और एनसीडब्ल्यूईबी पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्रों की ऑनलाइन परीक्षाएँ कराने के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए कहा गया है।

यह निर्णय एक ऐसे समय में आया है जब पूरा देश लॉकडाउन के संकट से गुजर रहा हैं। यह निर्णय पिछड़े और हाशिए के वर्ग के छात्रों, जिसमें कॉरेसपोंडेंस छात्रों का एक बड़ा वर्ग शामिल है, उनके प्रति डीयू प्रशासन की उदासीनता को उजागर करता है। यह निर्णय विशेष रूप से निंदनीय है क्योंकि केवाईएस और शिक्षक समूहों द्वारा प्रशासन को यह पहले भी स्पष्ट किया गया है कि छात्रों के एक बड़े समूह के पास इंटरनेट सुविधाओं तक पहुंच नहीं है, जो ऑनलाइन परीक्षाओं के लिए जरूरी है। जहाँ इंटरनेट उपलब्ध है वहाँ नेटवर्क और इंटरनेट स्पीड की समस्याएं मौजूद हैं। ज्ञात हो कि छात्रों का एक बड़ा हिस्सा बहुत ही छोटी सी जगह में अपने परिवारों के साथ रहता है। इन तंग जगहों में ऑनलाइन पढ़ाई एक व्यवहारिक विकल्प नहीं है। इसीलिए, ऑनलाइन शिक्षण छात्रों में पहले से ही मौजूद असमानता की खाई को अधिक गहरा बना रहा है। ऑनलाइन शिक्षा के साथ समस्या सिर्फ यह नहीं है कि वो संभव है कि नहीं, बल्कि यह आने वाले समय में शिक्षा के अनौपचारीकरण का भी रास्ता खोलता है, जिससे छात्रों की एक बड़ी संख्या औपचारिक शिक्षा से बाहर हो जाएगी। ऑनलाइन शिक्षा के साथ समस्या केवल इसकी व्यवहार्यता नहीं है क्योंकि केवल बहुत ही सीमित छात्रों के पास इंटरनेट की सुविधा है, बल्कि जिस तरह से यह अधिकांश छात्रों के लिए शिक्षा के अनौपचारिककरण के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए रास्ता साफ कर रहा है।

ज्ञात हो कि डीयू में पढ़ने वाला एक बड़ा हिस्सा स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में कॉरेसपोंडेंस मोड का छात्र है। यह छात्र हाशिये के समुदायों से आते हैं, और अपने परिवार से पढ़ने वाली पीढ़ी हैं। साथ ही, ज्यादातर छात्र ऐसे परिवारों से आते हैं जो दिहाड़ी मजदूर हैं। इस लॉकडाउन के समय में इन छात्रों और उनके परिवारों को राशन और आय न होने के कारण बेहद ही खराब स्थिति देखने को मजबूर होना पड़ा है। ऐसी स्थिति, डीयू प्रशासन उनका बोझ कुछ हल्का करने और उनकी मदद करने की जगह उनकी स्थिति को और भी ज्यादा बदतर बना रहा है। इसके अलावा, हाशिए के वर्गों के छात्रों को पहले से ही विकट स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि न ही बिलकुल थोड़ी दी जाने वाली साप्ताहिक कक्षाएं आयोजित की गयी है, बल्कि उनको दिया गया स्टडी मटेरियल भी अधूरा और बेहद खराब है। इस प्रकार, संकट के दौरान केवल अकादमिक कैलेंडर में तेजी लाने का प्रयास कर रहे डीयू प्रशासन की उदासीनता के कारण डीयू के इन बहुसंख्यक छात्रों पर दोगुना बोझ पड़ रहा है।

केवाईएस मांग करता है कि डीयू द्वारा ऑनलाइन परीक्षा कराने के फैसले को तुरंत वापस लिया जाये। समय की मांग है कि लॉकडाउन खुलने के बाद छात्रों को कक्षाएँ सुनिश्चित की जाएँ और उसके बाद ही परीक्षा आयोजित करवाई जाएँ। केवाईएस मांग करता है कि लॉकडाउन खुलने के बाद डीयू को सेमेस्टर और अकादमिक-सत्र का आवश्यक विस्तार करते हुए कक्षा-शिक्षण को पुनः शुरू किया जाना चाहिए। केवाईएस ऑनलाइन परीक्षा के प्रस्ताव की कड़ी भर्त्सना करता है और मांग करता है कि पहले से चली आ रही ऑफलाइन परीक्षा प्रणाली के तहत ही परीक्षा आयोजित की जाए। डीयू के ऐसे बहुसंख्यक छात्र-विरोधी कदम के खिलाफ आने वाले समय में केवाईएस आंदोलन तेज करेगा और साथ कल डीयू के इस कदम के खिलाफ आयोजित किए जा रहे अभियान में भी हिस्सेदारी निभाने की सबसे अपील करता है। 


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