केवाईएस ने भाजपा सरकार की आर्थिक पैकेज को बताया जुमलेबाजी KYS calls BJP government's economic package jumlebaazi





  • संकट के दौर में बदहाल स्थिति में जीने को मजबूर कामगार आबादी की जगह सरकार का पूरा ध्यान उद्योगों और व्यापारियों को लाभ सुनिश्चित करने पर


  • कामगारों को 3 महीने की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने की जगह, उद्योगों, ठेकेदारों और मध्यम-वर्ग के लिए बड़े फायदे किए गए घोषित


                                                                 विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) केंद्र सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज के नाम पर सिर्फ जुमलेबाजी की कड़ी भर्त्सना करता है। कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की गयी थी, लेकिन इसकी कोई भी विस्तृत जानकारी नहीं दी गयी थी। वित्त मंत्री ने आज इसके ऊपर जानकारी दी। यह पैकेज महज एक धोखा है, जो पिछले घोषित किए गए पैकेजों को भी सम्मिलित कर 20 लाख करोड़ का दिखाया गया है। साथ ही, इस पैकेज में पिछले सालों में शुरू की गयी तमाम योजनाओं का ही बदला हुआ रूप है। एक तरीके से यह सिर्फ जुमलेबाजी है, जिसमें केंद्र सरकार को महारत हासिल है।
इस पैकेज में बहुसंख्यक कामगार आबादी जो लॉकडाउन के कारण बेहद ही बदहाल स्थिति में है, उसको संकट से बाहर निकालने के लिए कुछ नहीं किया गया है। इसके इतर सरकार ने कॉर्पोरेटों और उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए तमाम कदमों और राहतों की घोषणा की है। लघु, छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए 3 लाख करोड़ के लोन घोषित किए गए हैं, लेकिन मजदूरों को इस संकट से बचाने के लिए ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया गया है। ज्ञात हो इन्हीं लघु, छोटे और मध्यम उद्योगों में श्रम कानून बिलकुल भी लागू नहीं होते और यहाँ पर मजदूरों का अति-शोषण व्याप्त है। लेकिन सरकार को इन्हीं उद्यमों की परवाह है, साथ ही, इन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इनकी परिभाषा में भी बदलाव किया गया है ताकि इन्हें श्रम कानूनों से बचने और अपना शोषण जारी रखने में मदद की जा सके।

वित्त मंत्री ने ठेकेदार, रियल एस्टेट और टैक्स देने वाले मध्यम-वर्ग के लिए घोषणा करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार की प्राथमिकता में कौन से लोग हैं। इसने ठेकेदारों के लिए समय सीमा को बढ़ा दिया। मध्य-वर्गों के लिए अपना आयकर रिटर्न दाखिल करने को लेकर ऐसा ही किया गया है। इस प्रकार,        ‘ आत्मनिर्भर भारत अभियान ’ और आत्मनिर्भरता की सारी बातें, इस संकट के दौरान मजदूरों के लिए कुछ न करने के संबंध में जुमलेबाजी है, जबकि सरकार उद्योगों, कार्पोरेटों और मध्यम वर्ग को बचाने में व्यस्त है। इस अभियन का उद्देश्य सिर्फ मजदूरों को उनके ही भरोसे छोड़ देना है, क्योंकि केंद्र सरकार ने इस संकट के समय उनका साथ देने की अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है।  

इस पैकेज की घोषणा होने के बाद शेयर बाजारों में भी उछाल आया है, जिससे सरकार का कॉरपोरेट और व्यापार समर्थक चरित्र साफ उजागर होता है। जहां देश के ट्रेड यूनियन और मजदूर 3 महीने की मूलभूत न्यूनतम आय और किराये पर रोक जैसे ठोस कदमों की मांग कर रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार उद्यमियों को खुश करने के लिए इन मुद्दों की अनदेखी कर रही है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट घरानों पर कामकाजी जनता द्वारा भारी टैक्स लगाने की मांग करने के बावजूद भी अर्थव्यवस्था में मंदी को लेकर उठ रही सभी चिंताओं का हल कॉर्पोरेट घरानों के फायदे को देख कर किया जा रहा है। आने वाले समय में देश की कामकाजी जनता के मुद्दों के प्रति सरकार की उदासीनता के खिलाफ ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर केवाईएस अपना संघर्ष तेज करेगा।



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