रोजगार सृजन करने वाले उद्योगों के साथ छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक मदद करे केंद्र सरकार: वीरेन्द्र यादव industrias generadoras de empleo: Virendra Yadav





सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

साहिबाबाद । राशन वितरण करते हुए एक बयान में सपा के पूर्व प्रत्याशी वीरेन्द्र यादव एडवोकेट ने कहा कि देश में दोहरी व्यवस्था चल रही है, एक तरफ तो केन्द्र सरकार वन्दे भारत अभियान के द्वारा विदेशों में फँसे भारतीयों की लाने की व्यवस्था हवाई जहाज से कर रही है, दूसरी ओर देश में फंसा मजदूर मजबूर हो, सडकों, रेल पटरियों, पगडंडियों पर चलने को विवश है। क्या उसका जीवन, जीवन नहीं है, जो सर पर गठरी लिए, पत्नी व दुधमुंहे बच्चों को लेकर जा रहा अव्यवस्था का शिकार है। 

उन्होंने कहा कि आज प्रवासी मजदूर सडकों, रेल की पटरियों पर सरकार की लाठी, डंडों से पीट रहा। भूखा, प्यासा पगडंडियों, गाँव के किनारों से मई की धूप सहता चलता चला जा रहा है।  कहीं रेल की पटरी पर कटकर प्राण त्याग दे रहा है, तो कहीं सडकों पर भूखा, प्यासा तथा सड़क दुर्घटना में जान गँवा दे रहा है। उसने कल्पना भी नहीं किया होगा कि मै अपनी माटी गाँव की नहीं छू पाऊंगा, न परिवार से मिल पाऊंगा। सरकारें मजदूरों को गंतव्य स्थान पर पहुँचाने में संवेदनहीन बनी हुई है। जबकि जान गंवाने वालों की संख्या सौ के करीब पहुँच रही है। लॉकडाउन के 50 दिन हो रहे है आज भी देश में लाखों मजदूर फंसा हुआ, सडकों पर पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है और अन्य तरह के कष्ट में है। सरकार द्वारा जो भी इंतजाम किया जा रहा है वह अपर्याप्त है प्रशासन को इस बात की जानकारी ही नहीं है, कि अधिकतर लोगों के पास न राशन कार्ड है, न बैंक में कोई खाता, उन तक न राशन पहुँच रहा है, न कोई सरकारी सहायता, न ठीक भोजन, न उनके घर जाने के लिए पास ही बन पा रहा है। 
   
श्री यादव ने उ0प्र0 सरकार से मांग करते है कि जरुरतमंदों को जो अपने मूल निवास जाना चाहते हैं अविलम्ब जांचकर उन्हें जाने की अनुमति प्रदान की जाय, बस, ट्रेन की व्यवस्था की जाय। मजदूर ही भारत की बिगड़ी हुई, अर्थव्यवस्था को बचा सकता है । भारत की अर्थव्यवस्था को यदि पटरी पर लाना है तो मेरी केन्द्र सरकार से भी मांग है कि बड़े उद्योगपतियों की मदद तो हो ही रही है, उसके साथ-साथ लघु, सुक्ष्म, मझोले, कुटीर उद्योगों को आर्थिक सहायता दी जाय, दुकानदारों की मदद की जाय, यही वह वर्ग है जो सबसे अधिक रोजगार पैदा करता है क्योंकि लॉकडाउन ने इनकी सारी आर्थिक व्यवस्था को बिगाड़ दिया है। देश में बड़ा निम्न, निम्न माध्यम वर्ग है, जो अपनी व्यथा कह नहीं सकता लेकिन वह टूट चुका है उसके खाते में भी कम से कम 5000 रुपये डाले जाय। सरकारी मदद की जाय, जिन देशों में कोरोना संकट है वहां की सरकारें छात्रों, नवजवानों को बेरोजगारी भत्ता दे रही है, भारत सरकार उनसे प्रेरणा ले अधिक से अधिक छात्रों, बेरोजगारों की मदद करे। युवा वर्ग की कठिनाइयों को समझने की आज बहुत ही आवश्यकता है। 

                                                         



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