सच का सामना करें, गुनाह से तोबा : मनजीत Face the truth, sin against crime





धर्म - कर्म 


सरदार मंजीत सिंह 
दोस्तों आज आप लॉक डाउन में जिंदगी जी रहे हैं, यानी टेंशन फ्री जिंदगी । टेंशन फ्री जिंदगी में एक सवाल आपको दे रहा हूं । इस सवाल को आपने अपने आप से पूछना है। क्या जो जिंदगी आप जी रहे हैं आपने कुछ गलत तो नहीं किया। शांत होकर एकांत में एक बार यह सवाल अवश्य अपने आप से पूछें। क्या आपने जिंदगी जीते जी अपनी जिंदगी में कुछ गलत तो नहीं किया ? जब यह सवाल आप अपने आपसे पूछेंगे तब आपके सामने आपकी पिछली जिंदगी आपके आंखों के सामने आ जाएगी । तब आपको साफ-साफ सब कुछ नजर भी आने लगेगा और सुनने भी लगेगा कि आज समाज में जहां आप खड़े हैं यहां तक आपको पहुंचने के लिए कितने लोगों का हक मारना पड़ा, जो आपका नहीं था फिर भी आपने कई बार अनजाने में और कई बार जानबूझकर आपने दूसरों का हक मारा जो गलत था । आप सोचें जो जिंदगी आप जी रहे हैं उस पर किसी दूसरे का हक तो नहीं था । क्या आपने गुनाह किया दूसरों का हक मार ? आप आगे बढ़े सोचे कि आप इस दुनिया से एक बोझ लेकर जाना चाहते हैं । 

सोचे क्या आप के जीते जी लोग आपको कुछ ना कहें मगर जाने के बाद आपको लोग गलत कहे । आपकी पहचान एक फरेबी की बने। आज आप शांत हैं यह शांति दुनिया में फैली करोना वायरस बीमारी की वजह से मिली । चारों तरफ एक डर दहशत का माहौल है । इस समय जो भी बात आप अपने आप से करेंगे उसका उत्तर इमानदारी से आपकी जुबान पर आएगा भले ही उसका जवाब आप दुनिया में में ना बाटे, मगर आपको मालूम हो जाना चाहिए की जिंदगी में गलत काम गलत राह चल यह रुतबा पाया । जरूरी यह नहीं कि आज समाज में क्या रुतबा है जरूरी है मन का आत्म संतोष  जो आपके रुतबे से कई गुना ज्यादा है । आज दुनिया में लाखों लोग इस बीमारी की वजह से मर चुके हैं । आप सुरक्षित हैं यह कृपा है परमात्मा की इसलिए परमात्मा मेरे माध्यम से यह सवाल आपको दे रहा है । अवश्य सोचें अभी कुछ बिगड़ा नहीं अगर आपने कहीं कुछ गलत कर लिया या हो गया तो उसको सुधारा जा सकता है । यह सवाल आप की बाकी बची जिंदगी में अहम हैं। इस सवाल के जवाब में आपकी शांति छुपी है । इसको सुधारा जा सकता है अगर आप सोचते हैं दुनिया से सबको चले जाना है । जिसने इस धरती पर जन्म लिया चाहे वह आम इंसान हो या देवी देवता सबको जाना है और जाने के साथ-साथ खाली हाथ हम आए थे और खाली हाथ चले जाना है । सोच कर देखो जब चले ही जाना है और वह भी खाली हाथ तो फिर आप क्यूं यह पाप क्या आप अपने लिए कर रहे हैं । 

यह बच्चों के लिए एक कहानी सुनाता हूं एक इंसान चोरी करता है जब पकड़ा जाता है राजा उससे पूछता है चोरी क्यों करते हो उसने कहा बच्चों के लिए । राजा ने कहा बच्चों से पूछा जो तुम गुनाह करते हो क्या बच्चे भी हिस्सेदार बनेंगे ? चोर ने कहा हां राजा । राजा ने फिर कहा बच्चों से पूछो जब उसने बच्चों से पूछा तो बच्चों ने कहा चोरी आप करते हैं हम क्यों गुनाह में हिस्सेदार बनेंगे ? चोर ने कहा चोरी कर ला कर तो आपको ही देता हूं । बच्चों ने कहा आप जितना लाएंगे हम उसी में गुजारा कर लेंगे मगर आपके काम में हमें हिस्सेदार नहीं । सोच लो दोस्तों यह चोरी पाप गुनाह आप अपने लिए करते हैं इसका दंड आपको मिलना है  तो फिर क्यों कर रहे हो कि लोग आपके जाने के बाद आपके बच्चों से कहें चोर के बच्चे या चोर का परिवार। आज ही अपनी गलती को सुधारने के लिए परमात्मा के दर पर जाएं और हाथ जोड़ माफी मांगे कि आप से गलती हो गई जिनका हक मारा है उन्हें वापस दे दे । परमात्मा वाहेगुरु माफ कर सकता है । अगर आप दिल से माफी मांगे मैं आपके साथ हूं यह सवाल परमात्मा नहीं मुझसे पूछने को कहा है । दोस्तों जितना आप शांति में जिंदगी बसर करते हैं आपके अंदर परमात्मा एक सब्र पैदा करता है । सब्र में जीने वाला दूसरों की दौलत देख विचलित नहीं होता । अब जरूर सोचें वाहेगुरु ने आपको एक मौका दिया है ।आज आप  शांत हैं सुरक्षित हैं इस मौके को हाथ से ना जाने दें । 

सरदार मंजीत सिंह 

अध्यात्मिक एवं सामाजिक विचारक

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