डिप्टी कमिश्नर गुरूग्राम को घरेलू कामगार यूनियन ने कामगारों को राशन न मिलने का दिया ज्ञापन Deputy Commissioner Gurugram




  • सभी कामगारों को वेतन और राहत सामग्री सुनिश्चित करने के लिए खास कदम उठाने की भी मांग की!


विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली। घरेलू कामगार यूनियन (जीकेयू) गुरुग्राम में कामगारों को मूलभूत जरूरत का सामान और राशन न मिलने की कड़ी आलोचना करता है। इस संबंध में आज जीकेयू ने गुरुग्राम डिप्टी कमिश्नर को एक ज्ञापन भेजा।
ज्ञात हो कि लॉकडाउन के कारण शहर में कामगार, खासकर घरेलू कामगार बिना किसी जीविका और राशन के जीने के लिए मजबूर हैं। उनको सरकारी एजेंसियों द्वारा भी मदद नहीं दी जा रही है। हालांकि, जिला प्रशासन ने कहने को तो उनकी मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर  मुहैया कराये हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कोई भी मदद नहीं मिल रही है। इन हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल करने पर ज्यादातर कोई उठाता नहीं है, और अगर उठा भी ले तो कामगारों को किसी-न-किसी कारण से मदद के लिए मना कर दिया जाता है। कई बार इन नंबरों पर कॉल करने के बाद किसी अन्य व्यक्ति का नंबर दे दिया जाता है, और उसको कॉल लगाने के बाद किसी अन्य का नंबर मिलता है। साथ ही, पिछले दिनों कथित तौर पर कामगारों की मदद करने के लिए एक फॉर्म बांटा गया था, लेकिन अभी तक कामगारों को यह नहीं बताया गया है कि इन फॉर्म को कहाँ जमा करना है। अब हेल्पलाइन नंबरों पर यह भी बताया जा रहा है कि यह फॉर्म अब निरस्त कर दिया गया है, और राहत सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से ही मुहैया कराई जाएगी।

इससे यह साफ जाहिर है कि उन कामगारों को जो समाज के सबसे पिछड़े हिस्से से आते हैं, उन्हें मूलभूत जरूरत का सामान मुहैया कराने की जगह जिला प्रशासन बिना मदद के भूखे रहने की हालत में छोड़ रहा है। साथ ही, हेल्पलाइन नंबर जारी करने के बावजूद अभी भी बहुसंख्यक कामगारों को कोई सहायता नहीं मिली है। यह स्थिति हमें 2 हफ्ते पहले एक कामगार द्वारा आत्महत्या करने की घटना की याद दिलाती है, जिसकी मौत प्रशासन की उदासीनता के कारण हुई थी।  

ज्ञात हो कि गुरुग्राम में कामगार खासकर घरेलू कामगार जो सरस्वती कुंज, चक्करपुर, वजीराबाद, घाटा गाँव, बादशाहपुर, इत्यादि इलाकों में रहते हैं, उनके पास लॉकडाउन चलने तक के लिए न ही पैसे हैं और न ही राशन। झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले इन कामगारों की स्थिति आम समय में भी दयनीय होती है, लेकिन लॉकडाउन में तो उनके जीने के भी लाले पड़ गए हैं। जब वो किसी तरह घर से बाहर खाना लेने भी जाते हैं तो उन्हें पुलिस द्वारा परेशान किया जाता है। घरेलू कामगार बड़े-बड़े मकानों, बिल्डिंगों में काम करके अपनी आजीविका चलते हैं, मगर उनको भी अभी तक मालिकों ने पैसे नहीं दिये हैं। जब वो मालिकों से अपने वेतन के लिए कहते हैं, तो उन्हें काम के आने को मजबूर किया जाता है।  

सिर्फ इतना ही नहीं, एक तरफ जिला प्रशासन शहर के अमीर बाशिंदों की सुविधाओं का ध्यान रखने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाता दिखाई पड़ रहा है, लेकिन कामगारों को राहत पहुचाने में कोसों पीछे रहा है। इस अनदेखी के कारण हालात बदहाल हो चुके हैं। गुरुग्राम डीसी को सौंपे गए ज्ञापन में जीकेयू ने मांग उठाई कि सभी कामगारों विशेषकर घरेलू कामगारों को लॉकडाउन के दौरान भोजन सहित अन्य जरूरी सामान उपलब्ध करवाया जाए। जीकेयू ने यह भी मांग की कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सभी कामगारों को उनका बकाया वेतन भुगतान किया जाए अन्यथा उन्हें लॉकडाउन के दौरान न्यूनतम मजदूरी के आधार पर वेतन दिया जाए।


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