वेतन की मांग को लेकर श्रमिकों का दो कारखानों पर प्रदर्शन Demonstration of workers at two factories over demand for salary





                                                     सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

साहिबाबाद । थाना लिंक रोड क्षेत्र साइट 4 साहिबाबाद के दो कारखानों के मजदूरों ने कंपनी प्रबंधकों द्वारा वेतन नहीं देने के विरोध में शनिवार को प्रदर्शन कर कंपनी के गेट के बाहर हंगामा किया । कर्मचारियों का कहना था कि कंपनी ने देश भर में हुए लाॅकडाउन के समय का वेतन देने का वायदा कर नहीं दिया और उन्हें भूखा मरने के लिए छोड़ दिया है।       
        
जानकारी के अनुसार साइट 4 साहिबाबाद की मेटल का सामान बनाने वाली एक कंपनी तथा पानी के जहाज और कैमरे के सामान बनाने वाली दूसरी कंपनी के सैकड़ों कर्मचारियों ने  शनिवार को अपनी- अपनी कंपनी के गेट के सामने  प्रदर्शन किया और वहां  हंगामा किया।  कर्मचारियों का कहना था कि कंपनी प्रबंधकों ने  मार्च के वेतन में से 9 दिन के लॉकडाउन के दिनों का पैसा काट लिया है। जबकि कंपनी ने वायदा किया था कि वह मार्च माह का पूरा वेतन बिना कोई कटौती किए देगी। इसके अलावा कंपनी ने लाॅकडाउन के समय अप्रैल माह का वेतन भी नहीं दिया है। जबकि देश के प्रधानमंत्री ने भी कंपनी प्रबंधकों से लाक डाउन के समय का वेतन देने के अलावा मानवीय आधार पर मजदूरों का पूरा ध्यान रखने के लिए कहा था। कंपनी के प्रबंधक इस मुद्दे पर अपना पक्ष बताने के लिए मीडिया के सामने तो नहीं आए लेकिन उनका जो उनका पक्ष सामने आया है वह यह है कि वे बंदी के समय का वेतन कहां से दें।
         
गौर तलव है कि कंपनियों में दो तरह के मजदूरों से अपने  यहां काम लिया जा रहा है। एक वह है जो कंपनी के मस्टरोल पर हैं और दूसरे वो जो ठेकेदार के मजदूर कहे जाते हैं। उनसे काम तो कंपनी का प्रवंधन अपने हिसाब से काम लेता है लेकिन नाम ठेकेदार के मजदूर कहे जाते है। इनमें से एक कंपनी की बात की जाय जो कैमरे व पानी के जहाज के कल पुर्जे बनाती वाली में करीब 800 मजदूर काम करते हैं। जिनमें से केवल 150 कर्मचारी कंपनी के हैं शेष 650 श्रमिक तीन अलग-अलग ठेकेदारों के कर्मचारी कहे जाते हैं। ठेकेदारों के कर्मचारियों को कंपनी कोई भी पैसा देने को तैयार नहीं है। कंपनी प्रबंधकों की दलील है कि उनका ठेकेदार  भुगतान करेगा । लेकिन ठेकेदार कंपनी से लापता हो गए हैं और वह मजदूरों को ढूंढने से भी नहीं मिल रहे । मजदूरों का तर्क है कि जब उन्होंने काम कंपनी के लिए किया है तो उस कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि वह चाहे स्वयं वेतन दे या ठेकेदार से उनका वेतन दिलाये।  जैसा कि उन्हें लाॅकडाउन शुरू होने के समय वेतन देने का वायदा किया था। मजदूरों का कहना है  कंपनी और कंपनी के ठेकेदारों ने उन्हें भूखा मरने के लिए छोड़ दिया है। वे चाहते हैं कि उनका वेतन मिले और वेतन पाकर के अपने वतन वापस चले जाएं। इस समय उनके सामने भूखा मरने की स्थिति है। मकान मालिक किराया मांग रहा है और उनको 2 जून की रोटी के भी लाले पड़े हैं।
        
हंगामा की सूचना पर थाना लिंकरोड की पुलिस आई और मजदूरों को समझा-बुझाकर के घर वापस भेज दिया कि सोमवार को कंपनी प्रबंधकों से बात की जाएगी।
      
इस मामले में श्रमिक यूनियन सीटू के जिला गाजियाबाद के उपाध्यक्ष बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि कंपनी प्रबंधकों को सभी श्रमिकों का पूरा वेतन देना चाहिए। क्योंकि यह उनकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है । सभी मजदूरों ने काम उनके कारखाने के लिए किया है। ठेकेदारों की नियुक्ति कंपनी अपने आप को कानून से बचाने के लिए स्वयं करती है तथा श्रमिकों को ईएसआई ,फंड, बौनस आदि अन्य सुविधाओं से बंचित रखा जाता है।

फोटो कैप्शन- एक कंपनी के बाहर हंगामा करते श्रमिक। फाइल एफ.1 

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