संपादकीय : सावधानी हटी, दुर्घटना घटी ! Caution abated, accident happened!




 
मालगाड़ी की चपेट में आने से 16 प्रवासी मजदूरों की मौत

यह श्लोगन मैं तो बचपन से देखता आ रहा हूं। शायद आप लोग भी देखते ही होंगे और नई पीढ़ी तो देख ही रही है। लेकिन कोरोना काल में इसकी अहमीयत और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इस समय लाॅकडाउन में पूरा देश फंसा है। अब तो हर पल, हर घड़ी सावधानी की ही जरूरत है। जरा सा भी असावधान हुए कि किसी घटना के शिकार हुए। इस समय घटना व दुर्घटना की बात नही है यह असावधानी तो कोरोना वायरस के शिकार होने के लिए भी घातक है। लाॅकडाउन तोड़ कर बिना तैयारी या सावधानी के घर से निकले तो भी वायरस के शिकार से कोई बचा नहीं सकता। सब लोग रात - दिन एक दूसरे को इससे बचाव के उपाय व सावधानियां बता रहे हैं फिर भी यह दिन - दूना रात चैगुना बढ़ता ही जा रहा है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अपने - अपने स्तर पर इसे नियंत्रित करने तथा बचाव करने में लगे हुए हैं, लेकिन जब भी किसी मामले में कमियां नजर आती है तो एक - दूसरे पर आरोप - प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो जाता है। ऐसे समय में ‘ घर में रहे - सुरक्षित रहे ’ मंत्र का पालन करने में ही सबकी भलाई है। जो भी घर से बाहर निकला वो कई दिन के लिए अपने साथ अपने पूरे परिवार को भी घर से बाहर लेकर चला जाता है। हर पल, हर घड़ी ही बचाव हमें और आपको सुरक्षित रख सकता है। हम परिवार के साथ घर के अंदर ही कुछ और समय हंस - बोल कर बिताये, इसी में समझदारी है। इसके साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी सभी को सावधान रहने की भी जरूरत है। कोरोना के कारण लाॅकडाउन ने सारे व्यवस्था को चैपट कर दिया है सिर्फ जिंदगी बचाने के लिए। 

इस वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का अभी कोई ठोस इलाज व वैक्सिन की खोज नहीं हो पाई है, जो पूरे विश्व के लिए सिरदर्द बना है। अमेरिका, चीन, इटली, फ्रांस, जापान जैसे देश इस वायरस की मार से घुटने पर आ गये हैं, उनकी अर्थव्यवस्था खत्मी के कगार पर है ऐसे में हमारे देश के समक्ष तो एक विकट समस्या है ही। करीब 40 दिनों के लाॅकडाउन और मजदूरों की बेचैनी देखते हुए प्रशासन ने इस वायरस से बचाव की सावधानी बरतते हुए कुछ उद्योगों को चलाने, कुछ निर्माण कार्य तथा अन्य क्षेत्रों के कार्य भी शुरू करने की इजाजत दे दी है। उद्याोगपतियों, उसके उच्चाधिकारियों व मजदूरों को भी बंदी के बाद खुलने वाले उद्योगों को खोलते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। खासतौर से पहले हर स्तर पर उसकी निगरानी करने के बाद ही श्रमशक्ति को आगे बढ़ने व कार्य शुरू करने के लिए लगायें। विशाखापत्तनम से 30 किमी दूर वेंकटपुरम में स्थित एलजी पाॅलिमर्स इंडस्ट्री के प्लांट में गैस लीक होने से 13 लोगों की मौत हो गई, करीब 11 सौ लोग प्रभावित हुए है। इसमें 250 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है जिसमें से 20 वेंटिलेटर पर है। यह हादसा भी लाॅकडाउन के बाद कुछ मजदूरों द्वारा दोबारा खोलने की तैयारी करने के दौरान हुआ, जिसमें 3 बजे स्टायरीन गैस का अचानक रिसाव होने लगा। इसी तरह छत्त्ीसगढ़ के रायपुर में भी एक बंद पेपर मिल खोलने से पहले सफाई के दौरान गैस लीक के चलते 7 मजदूर बीमार हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसमें से 3 की हालत गंभीर है। उधर तमिलनाडू में नेवेली लिग्नाइट कंपनी में एक बाॅयलर में विस्फोट से 7 लोग घायल हो गए। नासिक में एक कंपनी में आग लगने से भी कई मजदूरों के घायल होने की समाचार है। 

यह सभी घटना गुरूवार की है और लाॅकडाउन के बाद कंपनी खोलने की तैयारी में हुआ है। दूसरी तरफ शुक्रवार को तड़के महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में मालगाड़ी की चपेट में आने से 16 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। सभी मजदूर पटरियों के सहारे महाराष्ट्र के जालना से मध्यप्रदेश की ओर जा रहे थे। बताया जाता है कि सभी मजदूर 40 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने के कारण थक गये थे और भोजन करने के बाद पटरी के सहारे ही सो गए। रविवार सुबह मध्यप्रदेश से झांसी आ रहे 5 मजदूर आम से लदा एक ट्रक पलटने से दब कर मर गए। ट्रक में 20 मजदूर सवार थे। घासल मजदूरों में 2 की हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। इससे पूर्व भी लाॅकडाउन के दौरान घर वापसी के दौरान सैकड़ों मजदूरों के मरने की समाचार आ चुकी है, कुछ ऐसे भी होंगे जिनके विषय में किसी को कोई जानकारी ही उपलब्ध नहीं होगी। ये सभी घटनाएं किसी न किसी रूप में असावधानी का ही नतीजा है। इस समय सबसे ज्यादा मार्मिक दूर्दशा में देश का मजदूर वर्ग है और हम सबकी स्नेह की उन्हें आवश्यकता है।  


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