केवाईएस ने यूजीसी पैनल की अनुशंसाओं की आलोचना की KYS criticized UGC panel recommendations






  • लॉकडाउन के बाद सेमेस्टरों और अकादमिक सत्रों को बढ़ाकर क्लासें आयोजित  करने की मांग की


  • ऑनलाइन शिक्षा से जुड़ा कोई भी फैसला बिना छात्रों और शिक्षकों की व्यापक सलाह के न पारित किया जाये: केवाईएस


                                                               विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा गठित पैनलों की अनुशंसाओं की कड़ी आलोचना करता है। यह दोनों पैनल लॉकडाउन के दौरान भारत में शिक्षा की स्थिति देखकर परीक्षा और ऑनलाइन शिक्षा के संबंध में बनाए गए थे।

इन पैनलों की अनुशंसाएँ पूरी तरह से छात्रों और शिक्षकों की जरूरतों को नकारती हैं और सिर्फ ऑनलाइन शिक्षा को लाने की सरकारी मंशा को ही आगे बढ़ाने का काम करती हैं। छात्रों और शिक्षकों में यह डर है कि अगर यह अनुशंसाएँ पारित हो जाती हैं तो अबसे 25ः सिलबस का हिस्सा ऑनलाइन ही पढ़ना होगा, सभी विश्वविद्यालयों को वर्चुअल कक्षाएँ स्थापित करनी होंगी और ई-लर्निंग सिलेबस बनाकर डिग्री में बदलाव लाना होगा। इस तरह से न सिर्फ शिक्षकों की नौकरियाँ जाएंगी, बल्कि जो छात्र अभी बेहद बेकार अनौपचारिक शिक्षण संस्थानों में पढ़ने को मजबूर हैं, उनके लिए औपचारिक शिक्षा तक पहुँचने के सभी रास्ते बंद हो जाएँगे।

ज्ञात हो कि कमिटियों ने तथ्यों को नकारते हुए यह साबित करने की कोशिश की है कि लॉकडाउन के बीच ऑनलाइन पढ़ाई से लगभग 70 प्रतिशत सिलबस हो चुका है। यह तथ्य पूरी तरह से गलत है क्योंकि भारत में अधिकांश छात्र-छात्राओं के पास इंटरनेट की सुविधा मौजूद नहीं है, मगर फिर भी इस तथ्य को कमिटियों द्वारा नजरअंदाज किया गया। जहाँ इंटरनेट उपलब्ध है वहाँ नेटवर्क और इंटरनेट स्पीड की समस्याएं मौजूद हैं। ज्ञात हो कि छात्रों का एक बड़ा हिस्सा बहुत ही छोटी सी जगह में अपने परिवारों के साथ रहता है। इन तंग जगहों में ऑनलाइन पढ़ाई एक व्यवहारिक विकल्प नहीं है। इसीलिए, ऑनलाइन शिक्षण छात्रों में पहले से ही मौजूद असमानता की खाई को अधिक गहरा बना रहा है। इस तरीके से यह कमिटियाँ भारत में शिक्षा के मौजूदा समस्याओं को उजागर करने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा के साथ समस्या सिर्फ यह नहीं है कि वो संभव है कि नहीं, बल्कि यह आने वाले समय में शिक्षा के अनौपचारीकरण का भी रास्ता खोलता है, जिससे छात्रों की एक बड़ी संख्या औपचारिक शिक्षा से बाहर हो जाएगी।

केवाईएस यूजीसी कमिटियों की सख्त आलोचना करता है और यह मांग करता है कि लॉकडाउन खुलने के बाद छात्रों को कक्षाएँ सुनिश्चित की जाएँ और उसके बाद ही परीक्षा आयोजित करवाई जाएँ। साथ ही, ऑनलाइन शिक्षा जैसी सभी योजनाएँ को, जो करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती हैं, उन्हें बिना छात्रों और शिक्षकों से व्यापक सलाह के न पारित किया जाये।


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