बिना तैयारी के बंद के कारण लोगों की आजीविका पर हुआ भारी असर Unpredictable shutdown has a huge impact on people's livelihood





  • बंद की बीच शहरों में फंसे मजदूरों के लिए सरकार की ओर से कोई तैयारी नहीं
  • केवाईएस ने जनता में भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के व्यवस्थित वितरण के लिए सेना के जवानों की तैनाती की मांग की


                                                                 विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली । क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) कोरोना महामारी और देश भर में चल रहे बंद (लॉकडाउन) के दौरान सरकार के कुप्रबंधन की निंदा करता है, जिसके कारण लोगों की आजीविका पर भारी असर पड़ा है। विविध रिपोर्टों में यह सामने आया है कि कामगारों और आम जनता को न केवल रोजगार से बेदखल किया गया है, बल्कि वे सभी रोजगार, भोजन और आश्रय के बिना शहरों में फंसे हुए हैं। कई रिपोर्टों के अनुसार कुछ राज्य सरकारें श्रमिकों और बेघरों को खिलाने का इंतजाम कर रहे हैं, परंतु संकेत स्पष्ट है कि सरकार की ओर से हुई तैयारी अपर्याप्त है। इसके अलावा, शहरों में फंसे मजदूर पैदल अपने गांवों में वापस जाने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि बंद (लॉकडाउन) से पहले उन्हें अपने गांवों तक सही सलामत पहुँचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कोई सुनिश्चित उपाय नहीं किया गया था।

जाहिर है, कोरोना महामारी के दौरान देश-भर के शहरों में फंसे मजदूर, जो मूल रूप से भूखे मर रहे हैं, उन्हें लेकर सरकार चिंतित नहीं है, जबकि विदेशों में फंसे भारतीय अमीरों को देश में वापस लाने में सरकार जरूरत से ज्यादा तत्पर दिखी थी। आज ऊँचे वेतनवाले और उद्यमियों के पास बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और खाद्य सुरक्षा उपलब्ध है, जबकि कामकाजी जनता भूखी मर रही है। वहीं कामकाजी लोगों के सामने जो दुविधा बार-बार आ रही है, वह या तो कोरोना के लिए हर रोज जान जोखिम में डालना या फिर भूखा रहना है।

केवाईएस कोरोनावाइरस से लड़ने के लिए केंद्र सरकार के उपायों की कमी की कड़ी आलोचना करता है। साथ ही यह मांग करता है कि लॉकडाउन के प्रभावी रहने तक लोगों के बीच भोजन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के मुफ्त और सही वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सेना के जवानों को तैनात किया जाना चाहिए। देश भर के विभिन्न शहरों में काम कर रहे लोगों को अपने घरों तक पहुंचांने के लिए विशेष उपाय किए जाने की मांग भी वह उठाता है। केवाईएस ने सरकार से बेघर और खाली छोड़ दिए गए लोगों के लिए खाली स्कूल, मॉल, बैंक्वेट हॉल आदि को आश्रय-घरों में बदलने का आह्वान करता है। इसके अतिरिक्त, यह भी मांग करता है कि जिला प्रशासनों को निर्देश दिया जाये कि सबसे ज्यादा असुरक्षित लोगों खासकर वृद्ध और विकलांग लोगों की जरूरतों को पूरा किया जाये।



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