मोदी की जन-विरोधी नीतियाँ, अमरीका में ट्रंप की नीतियों का ही प्रतिरूप हैं: केवाईएस Modi's anti-people policies are only replicas of Trump's policies in America: KYS




  • केवाईएस ने डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा की निंदा की, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में हुआ शामिल
  • मंदी के बीच घुटती अर्थव्यवस्था के बावजूद राजनीतिक तमाशे के लिए किया गया 130 करोड़ का खर्च



                                                          विशेष संवाददाता 
नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) के कार्यकर्ताओं ने अन्य प्रगतिशील संगठनों के साथ मिलकर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत यात्रा के खिलाफ आज जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में हिस्सेदारी निभाई। अमरीकी राष्ट्रपति के दो दिवसीय भारत यात्रा के लिए 100 करोड़ से अधिक रुपये खर्चे किए गये हैं। यह बात सामने आ रही है कि राष्ट्रपति ट्रंप, जो अपनी जन-विरोधी नीतियों के लिए अपने देश और विश्व भर में निंदित हैं, प्रवासी भारतीयों के वोट को अपनी ओर करने के लिए भारत यात्रा पर आए हैं। मौजूदा भाजपा सरकार द्वारा इस अवसर पर किए जाने वाले खर्चे से यह स्पष्ट जाहिर होता है कि अपने घरेलू विफलताओं को छिपाने के लिए ही राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी जन-विरोधी नीतियों का समर्थन किया जा रहा है, जिससे प्रवासी भारतीयों को ट्रंप के पक्ष में लाया जा सके।  


ज्ञात हो कि जनता को बाँटने के उद्देश्य से डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लाई गई कट्टर राष्ट्रवादी नीतियों की कड़ी आलोचना उनके देश में ही होती रही है। ट्रंप के द्वारा लाई गई अप्रवासी-विरोधी नीतियाँ, विविध देशों से प्रताड़ित हो कर अमरीका में आने वाले और वर्षों से मेहनत करने वाले समुदायों पर कहर के रूप में बरपाई गयी हैं। उनके कार्यकाल में स्पष्ट रूप से कुछ जातीयताओं और अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मेक्सिकन, मुसलिम और अश्वेतों के साथ भेदभाव किया गया है, जो ट्रंप प्रशासन की नफरत फैलाने वाली सोच को बेनकाब करता है।

ट्रंप प्रशासन द्वारा सिर्फ उन समुदायों के लोगों पर ही जुल्म नहीं किया गया है जिनको कथित तौर ओर गैर-अमरीकी माना गया है, बल्कि देश के मजदूरों पर भी दमन बढ़ाया गया है। ट्रम्प कार्यकाल में श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले मालिकों के लिए दंड हटा दिया गया है और श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाने वाले लोगों को ठेका देकर पुरस्कृत भी किया गया। यही नहीं, विश्व भर में स्वतंत्रता का ढिंढोरा पीटने वाला ट्रंप प्रशासन विश्व भर में हथियारों का सबसे बड़ा उत्पादक और  निर्यातक है।

दुःख की बात है कि भारत में मौजूदा भाजपा सरकार, ट्रंप प्रशासन का प्रतिरूप ही है। जन-विरोधी नीतियों की चर्चा करें तो मौजूदा सरकार धार्मिक आधार पर भेदभाव करने वाले नागरिकता संशोधन कानून, 2019 को लायी है और विभाजनकारी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर लाने का भी वादा करती रही है। एक ऐसे दौर में जब देश की अर्थव्यवस्था महंगाई की मार झेल रही है, वहीं सरकार द्वारा बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा युद्ध के हथियार खरीदने में खर्चा किया जा रहा है, जिसका सबसे बड़ा निर्यातक अमरीका ही है। भारतीय कार्पोरेटों के लिए लुभावने सौदों को लाकर और उनके लिए अन्य देशों के लोगों के शोषण के रास्ते को खोल कर मोदी सरकार विश्व के प्रमुख साम्राज्यवादी देश का सहभागी होना चाहता है। और तो और, देश के ही लोगों का शोषण और प्रबल करने के लिए देश की श्रम नीतियों को कमजोर बनाया जा रहा है।

केवाईएस अमरीकी राष्ट्रपति के भारत यात्रा का कड़ा विरोध करता है, जिसका मूल मकसद सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक प्रचार और तमाशा है, जिसके सहारे दोनों मोदी और ट्रंप प्रशासन की जन-विरोधी और निंदित नीतियों के लिए समर्थन जुटाया जा सके। ध्यान हो कि ट्रंप की यह यात्रा, ब्राजिल के राष्ट्रपति बोल्सनारो, जो कि एक और जन-विरोधी शासक हैं, की यात्रा के तुरंत बाद हो रही है। इन यात्राओं से यह स्पष्ट होता है कि मौजूदा भाजपा सरकार सीएए जैसी नीतियों को लाकर इन अत्याचारी शासकों के नक्शे-कदम  पर चल रही है। केवाईएस का यह मानना है कि ट्रंप जैसे शासकों को आमंत्रण देने के स्थान पर हमारे देश की जनता को अमरीकी उत्पीडि़तों और विश्व भर में अमरीकी सरकार द्वारा शोषित-उत्पीडि़त लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए, जो दशकों से अमरीका की जन-विरोधी नीतियों का निरंतर विरोध कर रहे हैं।



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