केवाईएस ने डॉ कफील की रिहाई के लिए उत्तर प्रदेश भवन पर विरोध प्रदर्शन में हिस्सेदारी निभाई KYS took part in protests at Uttar Pradesh Bhavan for Dr. Kafeel's release




  • प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा किया गया हिंसा और लिया गया हिरासत में
  • डॉ कफील पर थोपे गए एनएसए कानून को वापस लेने और सभी सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने की मांग उठाई
  • यूपी सीएम के शर्मनाक बयान “मरने के लिए आएगा तो जिंदा कैसे बचेगा” की केवाईएस करता है कड़ी निंदा
  • जनविरोधी यूएपीए, एनएसए और अंग्रेजों के समय के राजद्रोह कानून को रद्द करने की मांग उठाई

                                                                 विशेष संवाददाता


नई दिल्ली। क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने आज उत्तर प्रदेश भवन पर डॉ कफील को रिहा करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सेदारी निभाई। शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकते हुए दिल्ली पुलिस ने 100 से भी अधिक प्रदर्शनकारियों हिरासत में लिया और मारपीट की।

ज्ञात हो की डॉ कफील खान को पिछले दिनों एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया है। इस जनविरोधी कानून का उपयोग कर यूपी सरकार ने जनतांत्रिक रूप से आवाज उठाने वाले लोगों पर दमन का सिलसिला एक बार फिर शुरू कर दिया है। एक बार फिर से यूपी पुलिस का जन-विरोधी चेहरा सामने आया है। पुलिस ने भाजपा शासित यूपी सरकार का दाहिने हाथ की तरह काम करते हुए सरकार के सांप्रदायिक और जनविरोधी रवैये को अमली जामा पहनाने का काम किया है।


जैसा की ज्ञात है कि यूपी में सीएए कानून के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों में यूपी पुलिस ने आम जनता को प्रताड़ित करने को अपना लक्ष्य बना लिया है। प्रदर्शनकरियों को चिन्हित कर रात के समय छापेमारी, हिरासत में लिए गए लोगों पर बढ़ाचढ़ा कर धाराएँ लगाना और स्वयं पुलिस द्वारा जन संपत्ति को नुकसान पहुंचाने कि तमाम विडियो सामने आ चुके हैं। ऐसे में डॉ कफील को गिरफ्तार कर पुलिस, सरकार कि देख-रेख में जनतांत्रिक अधिकारों का पूर्ण हनन करने पर आमादा है। सरकार ने आम जनों पर एनएसए जैसे कानूनों का इस्तेमाल कर अपनी सांप्रदायिक नफरत भरी मानसिकता को ऊजागर किया है। यूपी सरकार ने उच्च न्यायलय के समक्ष स्वयं इस बात को माना की सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 22 लोगों की मौत हुई और 322 से अधिक जेलों में डाल दिये गए हैं। यह भी तथ्य है की बहुत से लोग अभी तक लापता हैं। भाजपा शाषित यूपी सरकार ने जनतंत्र को ताक पर रखते हुए जन-अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं की बलि चढ़ा दी है। यूपी सीएम द्वारा दिया गया बयान “मरने के लिए आएगा तो मरेगा ही” सरकार की इसी मानसिकता को दिखाता है।

यूपी सरकार की हरकतों के पीछे भाजपा शासित केंद्र सरकार का रवैया है, जिसने राज्य सरकार को निरंकुशकता की छूट दे रखी है। केंद्र सरकार द्वारा यूएपीए का इस्तेमाल अपनी आलोचना करने वाले लोगों को जेल में डाले रखने के औजार के तौर किया है। इससे केंद्र सरकार के पास संस्थानों को नियंत्रित करने और उसकी आलोचना करने वाले लोगों के खिलाफ अत्यधिक ताकत मिल चुकी है। इसी के साथ-साथ सीएए कानून का विरोध करने वाले आम जनों पर अंग्रेजी हूकूमत द्वारा लाये गए राजद्रोह कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना बेहद शर्मनाक है।

केवाईएस भाजपा सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करता है और यूएपीए , एनएसए तथा राजद्रोह के कानून को पूरी तरह से रद्द करने की मांग करता है। इसके साथ ही साथ नागरिकता संशोधन कानून जिसकी पूरे विश्व में कड़ी निंदा हो रही है, भाजपा सरकार की सांप्रदायिक मानसिकता को ऊजागर करता है। अपनी तानाशाही में भाजपा ने भारतीय संविधान के धर्म-निरपेक्षता के सिद्धान्त को भी तोड़ा है, जहां पर यह बात सुनिश्चित की गयी है कि धर्म के आधार पर किसी समुदाय या व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। केवाईएस भाजपा शाषित केंद्र व यूपी सरकार की रवैये की कड़ी निंदा करता है तथा सबसे अपील करता है कि इन जन-विरोधी कदमों के खिलाफ आंदोलनों को मजबूत करें। आने वाले दिनों में केवाईएस भाजपा की जन-विरोध नीतियों के खिलाफ अपना आंदोलन और तीव्र करेगा।



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