ाुल्लम - खुला : चल चमेली बाग में झूला झूलाऊंगा ! Khulam - Khulla



  

                                                       संजय त्रिपाठी
हमारे देश का कल आम बजट आ गया। इस बार का बजट भाषण 73 वर्षो में सबसे लंबा था। वित्तमंत्री ने 2 घंटे 41 मिनट लंबा बजट भाषण दिया। यह पिछले 73 वर्षो में पेश 91 बजट भाषणों में सबसे लंबा था। इसमें उन्होंने एक कश्मीरी कविता भी पढ़ी। इसपर एक अखबार ने हेडिंग बनाया - ‘वतन के वित्त की चर्चा थी .......... अफसाना छिडा डल झील का। ’ बजट तो पेश हो गया, बहुत लोग खुश भी हैं तो बहुत दुखी व मायूस भी। कुछ का कहना है कि अब तक जो भी नया के नाम पर आया हैं वह परेशान ही किया है। उन्हें लगता है कि यह बजट सिर्फ झूला झूलाने वाला बजट है। चाहे वह टैक्स पेयर्स के लिए हो या व्यवसायी या उद्यमी के लिए कुछ समय बाद रोना सभी को है। नोटबंदी, जीएसटी, कानूनों में संशोधन के बाद नये सरकार का नया बजट पहले ही बहुत बड़ा संकेत दे रहा है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इकाॅनामी की रफ्जार बढ़ाने को कुछ नहीं है इस बजट में। मध्यम क्लास तो पूरी तरह माथे पर हाथ रख रखा है, निम्न क्लास को कभी भी किसी बजट से कोई मतलब ही नहीं रहता। उन्हें तो रोज कमाना ओर रोज खाना है। सरकार तो महंगाई ही बढ़ायेगी, कमाने खाने में भी दिक्कत होगी, इसलिए वे बजट पर जोर ही नहीं देते। जिन्हें बजट से नफा - नुकसान निकालना है वे गड़ाये रहें इस पर दृष्टि। लेकिन जो बजट पर नजरे गड़ाये हुए है उनका भी कहना है कि अपने दूसरे बजट में वित्त मंत्री ने किसी राहत पैकेज का एलान नहीं किया। आर्थिक सुस्ती से देश को निकालने के भरोसेमंद उपाय नहीं किया। जो भी हो बजट में हमेशा ही सस्ता - महंगा, नफा - नुकसान, आय - व्यय का लेखाजोखा चलता रहता है, लेकिन इस बार तो युवाओं के लिए सबसे जोखिम भरा बजट हो रहा है। पहले ही देश के युवा नफरत की आग में झुलस रहे है। जामिया और शाहीनबाग की घटना इसका उदाहरण है। पहले जात -पात की नफरत ही देखने में आता था, अब धार्मिक उन्माद का नफरत दिखाई दे रहा। दो लौड़ो ने तीन दिन के अंदर दो बार गोली चलाकर दिखा दिया कि ‘भारत में यदि रहना है तो बंदे मातरम्  कहना है।’ ऐसे में कुछ युवा तो नफरत के आग में फंसे हैं, कुछ अपने फीस कि जड़ में इलझे हैं, कुछ सीएए और एनसीआर में उलझे हैं, लेकिन उनका क्या होगा जो ‘आई लव यू’ के जाल में उलझे हैं। सरकार को इन आशिक मजनुओं की चिंता भी करनी चाहिए। बेचारों पर इस बजट में वित्तमंत्री ने उनके दिल पर आरा चला दिया। ‘बैलेनटाइन डे’ नजदीक हैं और आशिक पूरे एक साल से सपने सजोये हैं, लगता है इस बार कई के सपनों पर पानी फिर जायेगा। देश के हर गम से बेखबर दिलजले आशिक ‘बैलेनटाइन डे’ की हर पल गिनती करते रहते हैं, लेकिन आज वो कुछ मायूस दिख रहे थे। आज 9 - 10 बजे मोहननगर मंदिर के तरफ अपने एक साथी से मिलने चला गया। बात करते घुमते - घूमाते हम दोनों भी मंदिर के पीछे पार्क में चले गए। एक प्रेमी - प्रेमिका जोड़ा आज के दिन बहुत दुखी थे, वे अपने देश के वित्त मंत्री को कोस रहे थे। युवक बार - बार कह रहा था कि इस बजट ने तो हमारे जिंदगी में आग ही लगा दी। आशिक का कहना था कि - मैं हर पल इंतजार कर रहा था कि तुम्हारी उम्र अब दो माह बाद 18 साल की हो जायेगी और हम दोनों कोर्ट में शादी कर लेंगे, कोई रूकावट बीच में नहीं आयेगी। लेकिन इस बजट ने शादी की उम्र 18 से भी आगे करने पर विचार कर रही है, इसके लिए उसने बकायदा एक टास्क फोर्स बनाकर नये सिरे से उम्र का आंकलन करेगी। मुझे लगता है कि यह घटाने के जगह बढाने का फार्मूला है, क्योंकि सरकार बीजेपी की है। इसमे हिन्दू - मुस्लमान भी नहीं है कि एक उम्मीद बना रहे। निराश जोडे बहुत ही मायूस थे और उनका कहना था कि अब तो यही गाना पड़ेगा - चल चमेली बाग में झूला झूलाऊंगा। 



Share on Google Plus

0 comments:

Post a comment