खुल्लम - खुला : इवीएम का करंट EVM current





                                                         संजय त्रिपाठी 

करंट भी प्रतिक्रिया करता है। यह पहली बार पता चला। हालांकि न्यूटन के तीसरा नियम स्पष्ट है कि ‘ क्रिया के विपरीत और समान प्रतिक्रिया होती है। ’ दिल्ली में भी न्यूटन का तीसरा नियम साफ देखने को मिल रहा। हाई स्कूल और इंटर की बोर्ड की परीक्षाएं कुछ राज्यों में शुरू हो रही हैं और कुछ में शुरू होनेवाली है। इस बार के बच्चों को न्यूटन के तीसरे नियम से पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। खासतौर से दिल्ली और एनसीआर के बच्चों को। बाहरी बच्चें भी अगर सोशल मीडिया पर ज्यादा ध्यान लगाते होंगे तो उन्हें भी कोई परेशानी नहीं होगी। अगर वे चाहे तो इसका विस्तृत वर्णन भी आसानी से कर सकते है। वर्णन करते समय उन्हें सिर्फ देश के गृहमंत्री अमित शाह के चुनाव के दौरान कहे गये शब्दों को अक्षरश: कोट करना पड़ेगा। उत्तर देते समय उनके यह शब्द - ‘‘ बटन इतनी जोर से दबावो की करंट शाहीन बाग में लगे। ’’ की व्याख्या से ही न्यूटन के कथन की सच्चाई सामने आ जायेगी। कई बार यह भी सुनने में आया है कि जरनेटर को बंद किये बिना अगर बिजली का स्वीच आॅन कर दिया जाता है तो जरनेटर में भी करंट आ जाता है। लेकिन इस बार शाहीन बाग के जगह दिल्ली की जनता ने इतनी जोर से बटम दबाया कि करंट इवीएम तक जा पहुंचा। लोग मान कर चल रहे हैं कि दिल्ली में ‘आप’ की विजय ‘टुकड़े - टुकड़े गैंग’ की विजय है, पाकिस्तान की विजय है और शाहीन बाग की विजय है। अब बीजेपी क्या कर सकती है? विजय तो पाकिस्तान का हो गया, विजय तो शाहीन बाग का हो गया, विजय तो ‘टुकड़े - टुकड़े गैंग’ का हो गया, विजय तो देशद्रोहियों का हो गया। आज दिल्ली की हवा में जो नफरत फैली है बीजेपी के चुनाव अभियान की वजह से उसको अभी कम होने में समय लगेगा। लेकिन इतना हुआ है कि दो दिन पूर्व गृहमंत्री अमित शाह ने यह स्वीकार कर लिया है कि ‘ गोली मारो’ और ‘पाकिस्तान की जीत’ जैसे बयानों ने बीजेपी को नुकसान पहुंचाया है। रविवार को शाहीन बाग के लोगों से उनके मुलाकात का समय भी तय हुआ है। ऐसे में अब लगता हैं कि इसका भी कोई हल शीघ्र ही निकल जायेगा। जिस तरह से 2014 के चुनाव में बीजेपी की जीत ने हिन्दुवादी और राष्ट्रवादी मुहिम को चलाया और दूसरी पारी में इस पर ज्यादा फोकस किया इससे पूरे देश में नफरत का माहौल सा बनता गया जो देश को हर तरह से नुकसान पहुंचाया। कुछ समय तक अमित शाह का सबसे ज्यादा प्रहार मुस्लिमों पर किया जाना ही सीएए और एनसीआर को लेकर मुस्लिम समुदाय को उद्ेल्लित कर दिया। आज देश के कई राज्यों में इसके खिलाफ जो धरना - प्रदर्शन हो रहा है वह एक दिन की उपज नहीं बल्कि छह वर्षो से एक धर्म विशेष के नाम पर इनके साथ किया जा रहा बरिष्ठ नेताओं व आम कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध के कारण हुआ है। इसमें सबसे ज्यादा आग में घी डालने का काम सोशल मीडिया पर युवाओं द्वारा किया जा रहा है। कई ऐसे कारणों का ही नतीजा है कि दिल्ली में शाहीन बाग के जगह करंट इवीएम तक पहुंच गया। धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में आप अपनी संख्या और ताकत तो बढ़ा सकते हैं, लेकिन ज्यादा समय तक किसी को धर्म के आधार पर दबा नहीं सकते, क्योंकि लोकतंत्र में सत्ता की डोर जनता की हाथ में है। आज ‘आप’ के संयोजक अरविन्द केजरीवाल अपने मंत्रिमंडल के साथ शपथ ग्रहण कर रहे हैं। यह हमें सीखाता है कि नफरत और करंट से ऊपर उठकर समाज में समरसता के लिए कार्य करें, तभी भारत विश्व गुरू बन समता है।    



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