मेवाड़ में ‘आम बजट की समीक्षा’ पर विचार संगोष्ठी आयोजित Consideration seminar on 'Review of General Budget' held in Mewar






कोरोना का कहर गिरा सकता है भारत की अर्थव्यवस्था-डाॅ. कोहली

                                                            सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस के विवेकानंद सभागार में ‘आम बजट की समीक्षा’ पर आयोजित विचार संगोष्ठी में सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री, बिजनेस व स्टार्टअप गुरु डाॅ. शरद कोहली ने कहा कि अगर कोरोना वायरस का कहर यूं ही जारी रहा तो भारत की अर्थव्यवस्था और गिरेगी। भारत के आम बजट में वैसे तो कुछ उत्साहजनक है नहीं, बाकी कसर कोरोना पूरी कर देगा। अगर मार्च महीने तक कोरोना वायरस विश्वपटल पर छाया रहा तो भारत की अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ना तय है।


डाॅ. कोहली ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था का आलम यह है कि छींक अमेरिका में आती है तो जुकाम भारत को हो जाता है। चीन से भी हमारा अर्थतंत्र गड़बड़ाएगा। विशेषरूप से आटोमोबाइल इंडस्ट्री पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। कहने को तो हमारा देश कृषि प्रधान देश है। 70 प्रतिशत हिस्सा कृषि पर आधारित है लेकिन कृषि का हमारी जीडीपी में योगदान केवल 15 प्रतिशत ही है। जोकि बहुत ही कम है। इसी के मद्देनजर भारत सरकार ने इस बार कृषि क्षेत्र व किसानों की खुशहाली के लिए 16 बिन्दुओं का कृषि के लिए बजट तैयार किया है, जिससे भारत सरकार को बहुत उम्मीदें हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी आम बजट 4 से अब 6 प्रतिशत कर दिया गया है। लेकिन इसमें कितनी गुणवत्ता आ पाएगी, अगले साल ही पता चलेगा। उन्होंने कहा कि भारतीयों को भारत सरकार का नया टैक्स स्ट्रक्चर अभी तक रास नहीं आ रहा, इसीलिए बाजार में मांग घटी है। जिससे इंडस्ट्री में उत्पादन भी गिरा है। लोग बेरोजगार हो गये हैं। बाजार में निवेश को लेकर दुविधा का एक चक्र-सा बना हुआ है। सरकार को केवल अब रेलवे, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी उपक्रमों के शेयर प्राइवेट सेक्टर में बेचकर मुनाफा मिलने की ही उम्मीदें हैं। इसीलिए सरकार ने निवेश के क्षेत्र में पांच साल की योजनाओं को अमलीजामा पहनाने का प्रयास किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर सरकार शिक्षा का बजट 6 से बढ़ाकर दस प्रतिशत कर दे तो देश का भविष्य सुखद हो सकता है। निवेश की संभावनाएं ज्यादा बलवती होंगीं। मेवाड़ ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डाॅ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि भारत सरकार शुरू से अब तक वित्तीय घाटे का ही बजट बनाती आ रही है। हमें इसकी परिभाषा को बदलना होगा। चीन वर्ष 1980 तक हमसे पिछड़ा हुआ था लेकिन आज वह हमसे सौ साल आगे है। सरकार किस प्रकार को बजट प्रस्तुत करे इसके लिए नौजवानों को सवाल उठाने होंगे। इस बार का आम बजट केवल आई वाॅश करने वाला बजट है। इसे उत्साहवर्द्धक कतई नहीं कह सकते। इससे पूर्व डाॅ. गदिया व मेवाड़ ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल ने डाॅ. शरद को शाॅल व स्मृति चिह्न देकर सम्मनित किया। इस अवसर पर मेवाड़ परिवार के सभी सदस्य, विद्यार्थी आदि मौजूद थे। सफल संचालन अमित पाराशर ने किया। 


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