अंबेडकर विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारियों ने किया हड़ताल Safai workers strike in Ambedkar University



  • भाजपा सरकार द्वारा श्रम-कानूनों में मजदूर-विरोधी बदलावों की भर्त्सना की
  • ठेका प्रथा को खत्म करने की मांग उठाई



                                                         सर्वोदय शांतिदूत ब्यूरो 

नई दिल्ली । अंबेडकर विश्वविद्यालय के सफाई कर्मचारियों ने आज अखिल-भारतीय मजदूर हड़ताल के अवसर पर हड़ताल में हिस्सेदारी निभाई। उन्होने अपनी यूनियन, सफाई कामगार यूनियन (एस.के.यू.) द्वारा आयोजित हड़ताल में गर्मजोशी से हिस्सेदारी की।

अखिल-भारतीय हड़ताल के आयोजन का मुख्य कारण सत्तारूण भाजपा सरकार द्वारा श्रम कानूनों का सरलीकरण करने के नाम पर श्रम कानूनों को कमजोर करने का प्रयास किया जाना है। केंद्र सरकार की मंशा के तहत 40 से अधिक श्रम कानूनों को मात्र 4 कानूनों में सिमटाया जा रहा है। इस मजदूर-विरोधी योजना के पीछे सरकार व्यापार को बढ़ावा देने का बहाना बना रही है, जबकि इसके जरिए पूंजीपति वर्ग को मजदूरों का और भी अधिक शोषण करने का अवसर दिया जाएगा।  साथ ही, काम के घंटे बढ़ाने और ठेका प्रथा को कानूनी जामा पहनाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।


ज्ञात हो कि मौजूदा समय में भारत के कामगार अतिशोषणकारी परिस्थितियों में काम करने को मजबूर है। आज भी बिना किसी सुरक्षा के मानकों के पालन के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी से भी नीचे काम करने को मजबूर होना पड़ता है। छोटी फैक्ट्रियों में तो सिर्फ न्यूनतम मजदूरी का ही नहीं, बल्कि अन्य श्रम कानूनों का भी खुलेआम उल्लंघन किया जाता है। कम दाम में ज्यादा काम छोटी फैक्ट्रियों में बेहद आम है, जहां न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन पर मजदूरों को 12-14 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। मजदूर बेहद कठिन काम भी बिना किसी सुरक्षा साधनों के करने को मजबूर हैं। आये दिन श्रम कानूनों में बदलाव कर के पूंजीपतियों का मुनाफा बढाया जा रहा है। हर क्षेत्र में ठेकेदारी प्रथा बढ़ी है जिसके कारण ृकंपनियां अपनी मनमर्जी से मजदूर को काम से निकाल सकती है।

ज्ञात हो कि देशी-विदेशी कम्पनियाँ श्रम कानूनों को पूरी तरह दरकिनार कर मजदूरों का शोषण कर रही हैं, जिसमें केंद्र सरकार उसका साथ दे रही है। प्राइवेट कंपनियों से नियंत्रण हटाने के नाम पर असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे भारत के बहुसंख्यक कामगारों का अति-शोषण करना और भी आसान किया जा रहा है। श्रम कानूनों में प्रस्तावित बदलाव जैसे वेज कोड और वेज रुल्स द्वारा काम के घंटों को 8 से 9 घंटे और ओवरटाइम के घंटों को 12 से 16 घंटे द्वारा मजदूरों का शोषण और बढ़ाने का इरादा है।

सफाई कर्मचारी कामगारों में सबसे ज्यादा शोषित हिस्सों में एक हैं। वो ज्यादातर दलित परिवारों से आते हैं और ऐतिहासिक तौर पर उन्होने शोषण का सबसे बदतर रूप झेला है। श्रम कानूनों में होने वाले बदलाव उनकी शोषित-उत्पीड़ित स्थिति को भी ज्यादा गहरा करेंगे। आने वाले दिनों में सफाई कर्मचारियों और उनकी यूनियन ने अन्य कामगारों के साथ भी एकता बनाने का इरादा किया है।



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