खुल्लम - खुला सखि, वे मुझसे कह कर जाते ! Khullam - khula






                                                                 संजय त्रिपाठी  
महाराष्ट्र की इतिहास भी अमर हो गया। जब इतिहासकार देश की आधुनिक इतिहास लिख रहे होंगे तो वह महाराष्ट्र आकर सोचने के लिए विवश हो जायेंगे कि इसकी शुरूआत कैसे करें। राजा के चारण के रुप में, नवरत्न लेखकों के रूप में या फिर कम्यूनिष्ठ विचारकों के रुप में। वही स्थिति आज मेरे सामने भी पैदा हो गई है। सोशल मीडिया पर खुब शेयर किये जा रहे हैं कि समाचार पत्रों में आ रहा कि कल शिवसेना सरकार बनायेगी, टीवी चैनल दिखा रहे हैं कि महाराष्ट्र में फणडवीस की सरकार बन गई। सुबह उठ कर मैं भी हैरान हुआ जब पार्क में टहलने गया और वहां मेरे एक साथी ने बताया कि महाराष्ट्र में अभी - अभी बीजेपी की सरकार बन गई एनसीपी की समर्थन से। हालांकि मैंने उनकी बात का विरोध किया, लेकिन तभी एक दूसरे साथी आकर भी उन्हीं के बात का समर्थन किये। बाद में मुझे मानना पड़ा कि हो सकता है बात सही हो। जो साथी बाद में आये उन्होंने मेरे साथी के बात का समर्थन तो किया ही साथ ही मेरी खीचाई भी कर दी कि तुम कैसे पत्रकार हो जिसे अभी तक पता ही नहीं चल पाया कि देश में हो क्या रहा है ? अचंभा में तो मैं था ही कि बीती रात एक बजे तक जो भी खबरें मेरे पास आई थी उन सभी में शिवसेना - एनसीपी और कांग्रेस ही आज सरकार बना रही थी। मेरे घर पर सुबह - सुबह जो दो अखबार आये थे, वह भी इसी को फ्रंट पेज की लीड न्यूज बनाये थे। पार्क से जल्दी आकर टीवी खोला और देखा तो बीजेपी की सरकार बन गई थी और एनसीपी के शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने राज्यपाल महोदय जी को अपनी पार्टी के विधायकों का समर्थन लेटर भी दे चुके थे। टीवी वाले बार - बार दिखा रहे थे  - राज्यपाल के दाहिने तरफ फणडवीस और बायें तरफ भतीजा। मुझे लगा बुजुर्ग शरद पवार बुढ़ापे में सठीया गये हैं तभी तो रात में कुछ और कह रहे हैं और दिन निकलते कुछ और दिखा रहे है। कई तो कह भी रहे थे कि - ‘ मोदी है तो मुमकीन है। ’ कहा जा रहा है कि फणडवीस ने भी यह बात सरकार बनने के बाद कहा था। ऐसी उलट - फेर तो क्रिकेट के विश्वकप में भी कभी देखने को नहीं मिला है। अखबार वालों की तो पूरी तरह झंण्ड हो गई। चैनलवालों ने दिखा दिया कि थोड़ा बहुत हम ही कड़ाही के नजदीक रहनेवाले है और रहते हैं। तुम लोग तो खाली - पिली बजाते रहो। उधर चाचा भी नींद खुलने के बाद हैरान था कि भतीजा यह क्या कर दिया। घर के अंदरूनी मामले बाहर आ गये। सुप्रीम कोर्ट भी सोचा कि कितने मुश्किल से रात के अंधेरे में बनने वाली सरकार को कुछ समय के लिए तो राहत दिया जाय। सबसे ज्यादा किसी के चेहरे पर बारह बज रहा है तो वह हैं बाला साहब के सुपुत्र उद्धव ठाकरे जी। चेहरा संजय राउत जी का भी देखने लायक है। कांग्रेस की तो शुरू से ही यही दशा और दिशा रही है। जब वो अपनी नहीं बचा सकती तो भला दूसरे को बचाने के लिए कैसे दौड़ लगा सकती है। अभी तक यही चर्चा चल रही थी कि शिवसेना महाराष्ट्र की राजनीति से खत्म हो जायेगी तो कई कहते थें कि कांग्रेस का भी यही हाल होगा। अब समझ में नहीं आ रहा कि कौन पार्टी महाराष्ट्र की राजनीति में खत्म हो जायेगी। लेकिन चाचा को यह मलाल तो जरूर होगा कि भतीजा कम से कम एक बार अपनी प्लान तो बताता देता। इसी पर मैथलीशरण गुप्त की वह पंक्ति याद आ जाती है - सखि, वे मुझसे कह कर जाते ! 




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