देश की सुरक्षा के लिए समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक अपनी सामर्थ्य का इस्तेमाल करेंगे: मोदी Modi will use his power from the sea to the space for the security of the country: Modi




नयी दिल्ली , ( शांतिदूत न्यूज नेटवर्क )   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि देश की सुरक्षा अभेद्य है तथा वह अपने हितों की सुरक्षा के लिए समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक अपनी सामर्थ्य का इस्तेमाल करेगा और न किसी के दबाव में झुकेगा, न प्रभाव में आयेगा और न ही अभाव को इसमें आड़े आने देगा। 

कारगिल विजय की बीसवीं वर्षगांठ के मौके पर यहां इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन करने के बाद श्री मोदी ने कहा कि भारत जल, थल और नभ में अपने उच्चतम सामर्थ्य को हासिल करने के प्रयास कर रहा है। उसने परमाणु पनडुब्बी अरिहंत के जरिये परमाणु त्रिकोण पूरा किया है और अंतरिक्ष रोधी मिसाइल का सफल परीक्षण कर अंतरिक्ष में भी अपनी पैठ बढाई है। भारत अपने हितों की रक्षा के लिए समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक अपने सामर्थ्य का इस्तमाल करता रहेगा और इस मामले में वह न किसी के दबाव में आयेगा , न ही किसी के प्रभाव में और न ही सेना को किसी चीज का अभाव होने देगा। दबावों की परवाह किये बिना सेना के आधुनिकीकरण के कदम उठाये जाते रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण शुरू करते ही कहा कि आज हर देशवासी शौर्य और राष्ट्र के समर्पित एक प्रेरणादायक गाथा को स्मरण कर रहा है। आज के अवसर पर मैं उन सभी शूरवीरों को नमन करता हूं, जिन्होंने कारगिल की चोटियों से तिरंगे को उतारने के षड़यंत्र को असफल किया। पीएम ने कहा कि करगिल में विजय भारत के वीर बेटे, बेटियों के अदम्य साहस की जीत थी। करगिल में विजय भारत के सामर्थ्य और संयम की जीत थी। करगिल में विजय भारत के संकल्पों की जीत थी और करगिल में विजय भारत के मर्यादा और अनुशासन की जीत थी। मोदी ने कहा कि अपना रक्त बहाकर जिन्होंने सर्वस्व न्यौछावर किया उन शहीदों को, उनको जन्म देने वाली वीर माताओं को भी मैं नमन करता हूं। करगिल सहित जम्मू-कश्मीर के सभी नागरिकों का अभिनंदन, जिन्होंने राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को निभाया है। 

प्रधानमंत्री ने  कहा कि युद्ध सरकारें नहीं लड़ती हैं बल्कि पूरा देश लड़ता है। सरकारें आती जाती रहती हैं लेकिन जो देश के लिए मरने जीने की परवाह नहीं करते हैं, वे अजर अमर होते हैं।   करगिल में विजय प्रत्येक देशवासियों की उम्मीदों और कर्तव्यपरायणता की विजय थी। सैनिक आज के साथ ही आने वाली पीढ़ी के लिए अपना जीवन बलिदान करते हैं। हमारा आने वाला कल सुरक्षित रहे, उसके लिए वो अपना वर्तमान स्वाहा कर देता है। सैनिक जिंदगी और मौत में भेद नहीं करते, उनके लिए कर्तव्य ही सब कुछ होता है। उन्होंने कहा कि मैं 20 साल पहले करगिल तब भी गया था जब युद्ध अपने चरम पर था। दुश्मन ऊंची चोटियों पर बैठकर अपने खेल, खेल रहा था। एक साधारण नागरिक के नाते मैंने मोर्चे पर जुटे अपने सैनिकों के शौर्य को उस मिट्टी पर जाकर नमन किया था

पाकिस्तान पर कश्मीर को लेकर शुरू से छल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह देश 1948, 1965, 1971 में यही किया। लेकिन 1999 में उसका छल पहले की तरह फिर एक बार छल की छलनी कर दी गई। मोदी ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी ने उस दौर में देशवासियों को भरोसा देता हुए कहा था कि जो जिस देश के लिए जान देते हैं, हम उनकी जीवनभर देखभाल भी न कर सकें, तो मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करने के अधिकारी नहीं समझे जाएंगे। करगिल युद्ध के समय अटल जी ने कहा था कि हमारे पड़ोसी को लगता था कि करगिल को लेकर भारत प्रतिरोध करेगा, विरोध प्रकट करेगा और तनाव से दुनिया डर जाएगी। लेकिन हम जवाब देंगे, प्रभावशाली जवाब देंगे उसकी उम्मीद उनको नहीं थी मुझे संतोष है कि अटल जी के भरोसे को हम मजबूत करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि भारत का इतिहास गवाह है कि भारत कभी आंक्राता नहीं रहा है। मानवता के हित में शांतिपूर्ण आचरण हमारे संस्कारों में है। हमारा देश इसी नीति पर चला है। भारत में हमारी सेना की छवि देश की रक्षा की है। तो विश्व में हम मानवता और शांति के रक्षक भी हैंरोने गिड़गिड़ाने के बजाय प्रभावी जवाब देने का यही रणनीतिक बदलाव दुश्मन पर भारी पड़ गया। 



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