खुल्लम -खुला : राजनीतिक फांस में फंसे हनुमान Hanuman trapped in political france



                                        खुल्लम -खुला 

मेघनाथ हनुमान जी पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उन्हें नाग फांस में बांध लिया था, आज एक बार फिर हनुमान राजनीतिक फांस में फंसते नजर आ रहे हैं। जिसे देखो वही राजनीतिक पार्टियां हनुमान जी को अपना बताने में लगी है। ऐसा लग रहा है कि आज कल की राजनीति हनुमान जी के इर्द - गिर्द ही चल रही है। चुनाव के दौरान योगी ने हनुमान जी को दलित बता साधने की कोशिश की, लेकिन उल्टा ही पड़ गया। उनकी हाल तो उस मुल्ला जी जैसे हो गई जिन्हें ‘ न खुदा ही मिला, न विसाले सनम’। एक तरफ दलित वर्ग हनुमान जी के मंदिर पर अपना अधिकार जमाने लगे, तो दूसरी तरफ भाजपा का तीन राज्यों में बंटाधार ही हो गया। कांग्रेसी फुल कर कुपा हो गये है। सोशल मीडिया पर कहने लगे और हनुमान जी का अपमान करो? उनके अपमान का ही नतीजा है कि ़़तीनों राज्य बीजेपी के हाथ से निकल गई। अब तो कांग्रेसी यह भी कह रहे हैं कि हनुमान जी हाथ के पंजे से ही आर्शीवाद देते हैं, इसलिए वे पक्के कांग्रेसी है। बीजेपी के एमएलसी बुक्कल नवाब कहते हैं कि हनुमान जी मुसलमान है। क्योंकि मुसलमान अपने बच्चों का नाम बुरहान, अरमान, कुर्बान ही रखते है, और हमलोग हनुमान कहते है। मुस्लिम नाम होने के कारण हनुमान जी मुसलमान हैं। बीजेपी के एक मंत्री अब हनुमान जी को जाट बता रहे है। अब तो ‘अंजनी पुत्र पवन सुत नामा’ चैपाई हनुमान चलीसा से ही बदलना पड़ेगा। पता नहीं अभी कौन क्या बता देगा? अभी - अभी सोशल मीडिया पर चल रहा है कि बीजेपी के एक राज्य सभा सांसद का कहना है कि हनुमान जी तो बंदर है और बंदर पशु की श्रेणी में आता है। पशु दलित से भी नीचा है। आखिर जिनके नाम से सभी कष्ट दूर हो जाते है, जो भूत - प्रेत को दूर भगाते है, आज वे कौन हैं इस पर ही प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है? हनुमान जी जो भी हो लेकिन वे मानवता के मसीहा जरूर थे, क्योंकि उन्होंने दूसरों के कष्ट दूर करने के लिए हर तरह की कठिनाईयों को झेला। राजनीतिक चक्कर में उन्हें राजनेता न फंसाये क्योंकि अगर वे फंस गये तो दूबारा किसी न किसी पार्टी की लंका को जला देंगे साथ ही उसके नाश का कारण भी बन जायेंगे। वे ऐसा ही करते है। जाति -धर्म, समूहों में हनुमान जी को बांटने में हम लगे हैं। इसके लिए तो हम सब का जाति -धर्म ही काफी है फिर हमारे ये बहुरूपिया नेता बार - बार देवताओं को राजनीति में क्यों घसीट लाते है? मुझे तो ऐसा लगाता है कि ये राजनेता अब देवताओं में भी जाति - मजहब फैला कर आपसी दंगे, नक्सलवाद, आतंकवाद को बढ़ावा देंगे और इन्द्र देवता के सिंहासन पर खुद ही कब्जा जमा लेंगे। अब तो साधु, महात्मा, सन्यासी लोगों को सावधान हो जाना चाहिए। ‘जहां जाये खेड़ो रानी वहां न मिले आग पानी’ जैसी स्थिति पैदा करने में शुरू से अभिशप्त ये राजनेता अब देवताओं का नाश कर ही मानेंगे। मानवता का तो इन्होंने नाश कर ही दिया अब भूगोल व देवलोक बदलेगे। आप सब देवता लोग भी सावधान हो जाओ, क्योंकि ये मानेंगे नहीं देवताओं में भी दंगा करा कर ही छोडेंगे । आगे 2019 का आम चुनाव जो है।    
संजय त्रिपाठी  



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